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चुनाव बाद हिंसा को लेकर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से मिला माकपा का प्रतिनिधिमंडल, प्रभावित परिवारों के लिए की मुआवज़े की मांग

माणिक सरकार ने मुख्यमंत्री से राज्य में नए सिरे से बढ़ती हिंसा, क़रीब 2,016 घटनाओं का ज़िक्र किया और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
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फ़ोटो साभार: PTI

नई दिल्ली: ईस्टमोजो में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पोलित ब्यूरो सदस्य माणिक सरकार के नेतृत्व में विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [सीपीआईएम] के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा से मुलाकात की और चुनाव के बाद की क़रीब 2,016 घटनाओं की ओर उनका ध्यान दिलाया जिसमें पांच मौतें शामिल हैं। इस बारे में उनसे हस्तक्षेप करने को कहा और प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की।

बैठक के दौरान माकपा विधायक दल के प्रमुख जितेंद्र चौधरी और राज्य समिति के सदस्य पबित्रा कार और माणिक डे सहित कई वरिष्ठ नेता माणिक सरकार के साथ थे और उन्होंने मुख्यमंत्री से "विपक्षी पार्टी के समर्थकों पर बेरोकटोक हमलों और हिंसा" को रोकने का आग्रह किया। सदस्यों ने इस साल फरवरी में हुए राज्य विधानसभा चुनावों के बाद जारी राजनीतिक हिंसा की कथित घटनाओं पर चिंता जताई।

पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य माणिक सरकार ने मुलाकात के बाद दोपहर में मीडिया को जानकारी दी और कहा, “चुनाव अब खत्म हो गए हैं। भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) ने सरकार बना ली है। इसे यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संगठन, पार्टियां और व्यक्ति अपनी लोकतांत्रिक गतिविधियों को अंजाम दे सकें, जिसके विफल होने पर शांति और स्थिरता असंभव है। आम आदमी की आजीविका के साधन खतरे में हैं, जिसमें रबड़ के बागानों, कृषि क्षेत्रों, जल निकायों आदि पर हमले शामिल हैं। हमने इन तथ्यों पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।”

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, माणिक सरकार ने यह भी कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव भारत के चुनाव आयोग की सक्रिय भूमिका के बीच हुए थे, जिसके कारण निकटवर्ती समय सीमा में हिंसा अपेक्षाकृत कम थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि, “हिंसा को नए सिरे से अंजाम दिया गया था और इस साल चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से राज्य भर से 2,016 हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट एकत्र की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें कथित तौर पर पिछले 28 दिनों में 817 घटनाएं शामिल हैं।”

राज्य के कुछ हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करने वाली बहुदलीय सांसदों की टीम पर हमले का उल्लेख करते हुए माणिक सरकार ने कहा, “चुनाव के बाद त्रिपुरा का दौरा करने वाले सांसदों की टीम ने अपने क्षेत्र में हिंसा की 1,199 घटनाओं को इकट्ठा किया। राज्यपाल के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उन्होंने राज्य के राज्यपाल के सामने कुछ विशिष्ट सुझाव रखे थे, लेकिन उनकी ओर से क्या प्रयास किए गए, हमें नहीं पता। उन्हें राज्य छोड़े 28 से 29 दिन हो चुके हैं और इस बीच की अवधि में, हमने स्थिति में कोई बदलाव नहीं देखा है। आज के मेमोरेंडम में हमने 2016 की हिंसा की घटनाओं को सूचीबद्ध किया है, यानी इस अवधि में कुल 817 घटनाएं हुईं। मुख्यमंत्री ने हमें सूचित किया है कि उन्होंने अपने पार्टी कैडरों को किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने का निर्देश दिया था और पुलिस को भी निर्देश दिया था कि वे कानून के किसी भी उल्लंघन से निपटने में निष्पक्ष भूमिका निभाएं।”

इसके अलावा, पूर्व सीएम माणिक सरकार ने मीडिया कर्मियों को यह भी बताया कि हिंसा के इन वीभत्स कृत्यों में उनकी पार्टी के पांच लोगों की भी मौत हुई है। “चुनाव के बाद कल्याणपुर में हमारी पार्टी के एक कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा, चार और लोगों ने चुनाव के बाद हुई हिंसा में अपनी जान गंवाई। मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि वह हमारी सभी चिंताओं पर गौर करेंगे और इसलिए हम उनके हस्तक्षेप की प्रतीक्षा करेंगे।”

माणिक सरकार ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा था कि उनकी सरकार हिंसा और अवैध गतिविधियों में निष्पक्ष भूमिका निभाने पर जोर देती है लेकिन सीएम के आश्वासन जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। “हमने सीएम से राज्य, जिला और अन्य स्तरों पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ संवाद करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि प्रशासन लोगों के प्रति निष्पक्ष दृष्टिकोण बनाए रखे। उन्होंने इन सभी मुद्दों से निपटने में एक सक्रिय भूमिका निभाने का वादा किया है।” पूर्व सीएम ने कहा, “भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष यह सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी एक लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखे।”

उन्होंने कहा कि वाम दल विधानसभा के अंदर और बाहर राज्य सरकार को रचनात्मक सहयोग प्रदान करेगा और पार्टी के लिए अगली कार्रवाई का इंतजार करेगा क्योंकि मुख्यमंत्री ने एक महीने पहले ही नई सरकार का कार्यभार संभाला है। उन्होंने कहा, "अगर वह स्थिति को सामान्य करने में असमर्थ हैं तो हम कार्रवाई के बारे में फैसला करेंगे।"

गौरतलब है कि 16 फरवरी को चुनाव होने के बाद से राज्य भर से झड़प और आगजनी की खबरें आ रही हैं। 2 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हिंसा में तेज़ी आई है। चुनाव के बाद हिंसा का आकलन करने के लिए त्रिपुरा का दौरा करने वाले एक संयुक्त संसदीय प्रतिनिधिमंडल पर हुए हमले में कई लोग घायल हुए हैं।

मूल रूप से अंग्रेज़ी में प्रकाशित लेख को पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

CPI(M) Delegation Meets Tripura CM Over Post-Poll Violence, Seeks Compensation for Affected Families

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