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भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक मंदिर में नमाज़ पढ़ने का क्या मामला है?
उत्तर प्रदेश के मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज़ पढ़ने को लेकर चार लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है और एक आरोपी फ़ैसल ख़ान को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि इनमें से दो लोगों ने 29 अक्टूबर को मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ी थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Nov 2020
उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक मंदिर में नमाज़ पढ़ने का क्या मामला है?

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित नंदबाबा मंदिर में नमाज़ पढ़ने का मामला गर्माया हुआ है। इसे लेकर चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि इनमें से दो लोगों ने 29 अक्टूबर को मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ी थी। पुलिस इस मामले में दिल्ली के जामिया नगर के रहने वाले और ख़ुदाई ख़िदमतगार संस्था के राष्ट्रीय संयोजक फ़ैसल ख़ान को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

क्या है मामला?

बीते दिनों ब्रज चौरासी कोस की यात्रा कर रहे दिल्ली निवासी फ़ैसल ख़ान और उनके एक मित्र ने नन्दगांव के नन्द भवन मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़कर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं। मंदिर के एक सेवायत की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने आरोपी फ़ैसल ख़ान, उसके मुस्लिम मित्र चांद मोहम्मद तथा दो हिंदू साथियों नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के खिलाफ धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने, धार्मिक सम्प्रदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने, समाज में ऐसा भय पैदा करने जिससे माहौल खराब होने का अंदेशा हो तथा उपासना स्थल को अपवित्र करने जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

बरसाना के थाना प्रभारी आजाद पाल सिंह ने बताया, ‘नन्दभवन के सेवायतों ने यह जानकारी दी कि गुरुवार यानी 29 अक्टूबर की दोपहर तीन युवक नन्द भवन पहुंचे थे जिनमें से एक ने अपना परिचय दिल्ली निवासी फ़ैसल ख़ान के रूप में दिया था। उसने सभी को बताया था कि वह भी प्रसिद्ध कवि रसखान के समान भगवान कृष्ण में अगाध श्रद्धा रखता है और उसी के वशीभूत होकर ब्रज चौरासी कोस की यात्रा कर रहा है। यात्रा में पड़ने वाले सभी धर्मस्थलों के दर्शन भी कर रहा है।’

थाना प्रभारी ने बताया कि उसने नन्द भवन में नन्दलाला और नन्द बाबा के भी दर्शन किए, इसके बाद जब गोस्वामीजन ठाकुरजी को शयन कराकर मंदिर के पट बंद करने के लिए अंदर चले गए, तब उन लोगों ने नमाज़ पढ़कर फोटो लिए और सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिए, इससे पूर्व उसने धर्म चर्चा के बीच रामचरित मानस की चौपाईयां भी पढ़कर सुनाईं।

आजाद पाल सिंह ने बताया कि रविवार को मंदिर के सेवायतों की जानकारी में यह वाकया आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैलने लगा। इस पर मंदिर के सेवायत कान्हा गोस्वामी ने मंदिर में नमाज़ पढ़ने वाले फ़ैसल ख़ान और मोहम्मद चांद तथा उन्हें अपने साथ मंदिर लाने वाले नीलेश व आलोक के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। थाना प्रभारी आजाद पाल सिंह के मुताबिक चारों व्यक्तियों के खिलाफ भादवि की धारा 153(ए), 295 तथा 505 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

आरोपियों से पूछताछ कर रही है पुलिस

एफआईआर के बाद कार्रवाई करते हुए यूपी पुलिस सोमवार को फ़ैसल ख़ान को दिल्ली के जामिया नगर में हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

मथुरा के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीश चंद्र ने बताया, ‘आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें अलग-अलग ठिकानों पर भेजी गई थीं। इनमें से एक टीम ने फ़ैसल ख़ान को दिल्ली स्थित जामिया नगर से हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए जाने के बाद से उससे पूछताछ की जा रही है कि आखिर ऐसा करने के पीछे उसका इरादा क्या था? उसने ऐसा किसके कहने पर किया?’

एक सवाल के जवाब में पुलिस अधीक्षक चंद्र ने बताया कि पूछताछ का दौर खत्म हो जाने के बाद ही तय किया जाएगा कि आरोपी को कब मथुरा लाना है।

मंशा पर उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि चार दिन पूर्व घटी इस घटना के बाद शनिवार को देर रात ‘कौमी एकता मंच’ से जुड़े मधुवन दत्त चतुर्वेदी ने 'प्रेम की मिसाल' के तौर पर मंदिर में नमाज़ पढ़े जाने के चार फोटो पोस्ट किए तो रविवार को विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने संदेह जताया कि मंदिर में नमाज़ पढ़ने के पीछे इन लोगों की मंशा कुछ और ही रही होगी।

मंदिर के सेवायतों व ब्राह्मण समाज के लोगों ने मिलकर मंदिर प्रांगण को गंगा-यमुना के जल से शुद्ध किया और बाकायदा हवन-यज्ञ कर शुद्धिकरण किया।

मंदिर के सेवायतों में वरिष्ठ आचार्य हरिमोहन गोस्वामी ने कहा, 'फैजल की नन्दलाला के प्रति श्रद्धा-भक्ति तो हमें समझ आती है, परंतु नमाज़ अदा करते हुए फोटो डालना पाखण्ड जान पड़ता है। गोस्वामी समाज इस कृत्य की घोर निन्दा करता है। इससे भी जरूरी बात यह है कि इस सबके पीछे इन लोगों का कोई छिपा मकसद भी हो सकता है।’

क्या है दूसरा पक्ष?

फ़ैसल ख़ान समेत सभी आरोपी 'ख़ुदाई ख़िदमतगार' नाम की सामाजिक संस्था के साथ जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। ख़ुदाई ख़िदमतगार दिल्ली की एक गैर-सरकारी संस्था है जो शांति, भाईचारा और सद्भावना के लिए काम करने का दावा करती है।

बीबीसी के मुताबिक इन आरोपों पर फैजल का कहना है कि वो किसी भी जाँच के लिए तैयार हैं, उनका इरादा किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था। वे ज़ोर देकर कहते हैं, "हमने मंदिर के पुजारी के आग्रह पर ही नमाज़ पढ़ी थी। हमारी वहां उनसे सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई थी।"

इस पूरे मामले पर ख़ुदाई ख़िदमतगार ने अपना बयान जारी किया है। ख़ुदाई ख़िदमतगार ने अपने बयान में कहा है कि गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और ख़ुदाई ख़िदमतगार (खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान द्वारा स्थापित किया गया गांधीवादी संगठन) के राष्ट्रीय संयोजक फ़ैसल ख़ान 24 से 29 अक्टूबर तक कृष्ण की पवित्र भूमि ब्रज पर अपनी पांच दिवसीय तीर्थयात्रा (यात्रा) पर थे। वह गोवर्धन की प्राचीन चौरासी कोसी यात्रा में भाग ले रहे थे।

अपनी यात्रा में उन्होंने कई लोगों के साथ-साथ विभिन्न मंदिरों के पुजारियों से मुलाकात की। कोई भी व्यक्ति उनकी यात्रा के वीडियो, चित्र देख सकता है जो उनके फेसबुक प्रोफाइल पर उपलब्ध हैं। इस दौरान हिंदू धर्म के दर्शन, तुलसीदास जी के छंद, रसखान जी और रहीमदास के बारे में बड़ी चर्चा हुई।

बयान में कहा गया है कि अपनी यात्रा के अंतिम दिन फ़ैसल ख़ान ने 'नंद बाबा' के पवित्र मंदिर का दौरा किया। उन्होंने वहां अपनी श्रद्धा का पालन किया। वह उनकी दोपहर की प्रार्थना का समय था, इसलिए उन्होंने उपयुक्त जगह मांगी। मंदिर में वहां मौजूद लोगों ने उन्हें यह कहकर मंदिर परिसर में ही प्रार्थना करने की अनुमति दी कि आप पहले से ही भगवान के घर में हैं इसलिए आपको कहीं और जाने की क्या आवश्यकता है।

यह सुनकर फ़ैसल ख़ान ने अपनी प्रार्थना पूरी की। इसके बाद वह और अन्य सदस्य कुछ और समय मंदिर में रहे और उन्होंने उसी मंदिर में अपना दोपहर का भोजन किया। सब कुछ ठीक था। 29 अक्टूबर को यात्रा पूरी हुई और वह सभी के साथ दिल्ली लौट आए। 3 दिनों के बाद उन्हें कुछ स्थानीय मीडिया के लोगों से जानकारी मिली कि कुछ लोग हैं जो 29 अक्टूबर को हुई घटनाओं से खुश नहीं हैं और वे पुलिस से शिकायत करने जा रहे हैं।

अपने बयान में संस्था ने आगे कहा है कि ख़ुदाई ख़िदमतगार शांति, प्रेम और सांप्रदायिक सद्भाव में विश्वास करती है, फ़ैसल ख़ान एक व्यक्ति के रूप में इन मुद्दों पर पिछले तीन दशकों से काम कर रहे हैं और ख़ुदाई ख़िदमतगार का उद्देश्य भी यही है।

गौरतलब है कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में कवि, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता फ़ैसल ख़ान के हिरासत में लिए जाने की निंदा कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ 

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