विश्व बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का बोझ इस तरह घरेलू उपभोक्ताओं पर डाले जाने का यह नज़रिया अर्थव्यवस्था की कार्य प्रणाली की एक भ्रमित समझ पर टिका हुआ है।
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