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बिजली विभाग के कच्चे कर्मचारी बड़े आंदोलन की तैयारी में

दिल्ली में जल्द ही बिजली के स्मार्ट मीटर लगने वाले हैं। ऐसे में क्या उन कच्चे कर्मचारियों की नौकरी ख़तरे में आ जाएगी जो मीटर रीडर, बिल डिस्ट्रीब्यूटर और रिकवरी स्टाफ हैं?
Raw employees

राजधानी दिल्ली में मंगलवार को 'ठेकेदारी हटाओ राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा' नाम के एक संगठन ने दिल्ली के पावर सेक्टर की BSES कंपनी में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों की कई मांगों के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसे समर्थन देने के लिए दिल्ली के दूसरे तमाम विभाग में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े संगठन, यूनियन और कर्मचारियों ने भारी संख्या में पहुंचकर समर्थन दिया।

इस कार्यक्रम में दिल्ली की केजरीवाल सरकार को 2013, 2015 और 2020 के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए उस वादे को भी याद दिलाया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती है तो यहां कार्यरत सभी 25 लाख ठेका कर्मियों को पक्का कर दिया जाएगा।

कार्यक्रम में आरोप लगाया गया कि दिल्ली के पावर सेक्टर में कार्यरत बिजली वितरण कंपनियां पिछले 20 साल से आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं।

इस कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील भानु प्रताप और वकील महमूद प्राचा के अलावा MCD मजदूर फेडरेशन, दिल्ली जल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट विभाग से सफाई कर्मचारियों से जुड़े संगठनों और यूनियनों ने हिस्सा लिया और बिजली विभाग के ठेका कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया।

क्या मांग हैं?

इस कार्यक्रम में एक 15 सूत्री मांग पत्र पेश किया गया जिसकी कुछ मुख्य मांगें इस तरह हैं :-

- सभी कच्चे कर्मचारियों को तुंरत पक्का किया जाए।

- स्मार्ट मीटर लगने के बाद पावर सेक्टर में कार्यरत मीटर रीडर, बिल डिस्ट्रीब्यूटर और रिकवरी स्टाफ को इस बात की गारंटी दी जाए कि उन्हें 60 साल की उम्र से पहले नौकरी से नहीं हटाया जाएगा।

- कच्चे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय 20 लाख रुपये का टर्मिनल बेनिफिट दिया जाए।

- वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर सभी कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए।

- सभी संविदा कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के प्रत्येक सदस्य को कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए।

- ड्यूटी के दौरान किसी कर्मी की मौत हो जाने पर उसके परिवार को 20 लाख का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को तुरंत नौकरी दी जाए ताकि मृतक के परिवार का सही से भरण-पोषण सुनिश्चित हो सके।

दिल्ली के राजा राम मोहन राय मेमोरियल ट्रस्ट हॉल में जमा हुई कच्चे कर्मचारियों की भीड़

बड़े आंदोलन की तैयारी

कार्यक्रम में इस बात का भी ऐलान किया गया कि अगर इन मांगों को नहीं माना गया तो 27 सितंबर 2023 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास का घेराव किया जाएगा और अगर घेराव के बावजूद दिल्ली सरकार नहीं जागी और बातचीत के लिए तैयार नहीं हुई तो बिजली कर्मचारी अक्टूबर के पहले सप्ताह से राज्य स्तरीय हड़ताल पर जाएंगे।

गौरतलब है कि दिल्ली में BSES 50 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी में है। जहां एक तरफ स्मार्ट मीटर लगने से लोगों की परेशानी कम होने का दावा किया जा रहा है वहीं 'ठेकेदारी हटाओ राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा' का कहना है कि इससे मीटर रीडर, बिल डिस्ट्रीब्यूटर और रिकवरी स्टाफ में लगे कच्चे कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आ सकता है।

इस पर संगठन के अध्यक्ष डी सी कपिल ने कहा कि ''कल अगर स्मार्ट मीटर लगे तो हम नई टेक्नोलॉजी का साथ देंगे, ये बात सही है लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद इस पावर सेक्टर के अंदर जो हज़ारों मीटर रीडर, बिल डिस्ट्रीब्यूटर और जो रिकवरी करने वाला स्टाफ है इनके भविष्य का क्या होगा, इनकी नौकरी का क्या होगा, ये कहां जाएंगे? इसलिए हम केजरीवाल जी से कहना चाहते हैं कि हम स्मार्ट मीटर का विरोध नहीं कर रहे, स्मार्ट मीटर आप लगाएं लेकिन दिल्ली में स्मार्ट मीटर तब लगेंगे जब बिजली विभाग के कर्मचारियों को आप गारंटी देंगे कि 60 साल से पहले इनको नहीं हटाया जाएगा।'' इसके अलावा उन्होंने कहा कि ''ये कोई बड़ा काम नहीं है, सिर्फ विभाग और कच्चे कर्मचारियों के बीच से ठेकेदारों को हटा कर उन्हें नियमित करना है।''

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दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे ठेका कर्मचारियों ने बिजली विभाग के बाद दूसरे विभाग के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की लड़ाई को तेज़ करने का संकल्प लिया। इनके इस संघर्ष को समर्थन देने पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के वकील भानु प्रताप ने कहा कि ''मजदूरों की दिक्कतें बहुत हैं, मजदूरों का संघर्ष बहुत है और ये संघर्ष सालों से है और अगर पीछे जाएं तो ये सदियों से चल रहा है लेकिन उनकी समस्या कम होने की बजाए लगातार बढ़ती चली जा रही हैं। वोट लेकर सत्ता में आने के बाद सरकार सिर्फ चुनिंदा पैसे वालों के लिए काम करती है।'' उन्होंने आगे कहा कि ''अगर आप ठेका प्रथा को रुकवाना चाहते हैं, जिस आउटसोर्सिंग को ख़त्म करवाना चाहते हैं और सभी मजदूरों को नियमित करवाना चाहते हैं, तो सरकार ऐसा क्यों करे?, क्या हक है आपका कि आप सरकार को कह सकें कि हमें आउटसोर्सिंग नहीं चाहिए। हम सरकार के लिए काम करते हैं तो इसलिए हमें सरकार के नियमित कर्मचारी के रूप में रखा जाए, सरकार की जिम्मेदारियां और आपके हक के बारे जहां लिखा है वे भारत का संविधान है जिसे पढ़ना बहुत ज़रूरी है।''

कार्यक्रम में कहा गया कि दिल्ली में आप की सरकार बनने में बिजली विभाग के कच्चे कर्मचारियों ने घर-घर जाकर कैंपेन किया था क्योंकि उन्हें यकीन था कि सत्ता में आने के बाद उन्हें स्थाई कर दिया जाएगा लेकिन अब उन्हें अपनी नौकरी की चिंता सता रही है।

कार्यक्रम में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि वे भी कच्चे कर्मचारियों की इस लड़ाई में उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि ''चाहे सफाई कर्मचारी हों या फिर बिजली, पानी या स्वास्थ्य से जुड़े कच्चे कर्मचारी इन्हें अपनी परेशानी को लेकर दिल्ली की आम जनता के बीच जाना होगा उनका समर्थन मांगना होगा, उन्हें बताना होगा कि दिल्ली के बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सफाई विभाग के कच्चे कर्मचारी क्यों आंदोलन कर रहे हैं।'' साथ ही उन्होंने कच्चे कर्मचारियों के इस संघर्ष में हर तरह की क़ानूनी सहायता देने का भी आश्वासन दिया।

दिल्ली के कच्चे कर्मचारियों ने सड़क से लेकर कोर्ट तक संघर्ष करने की तैयारी कर ली है, लेकिन अब देखना होगा कि दीवाली तक क्या बिजली विभाग इन कच्चे कर्मचारियों की मांग मान लेता है या फिर दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन दस्तक देने वाला है। 

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