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देशभर में निकली किसान ट्रैक्टर परेड, मज़दूर और अन्य वर्ग भी साथ आए

परेड में भाग लेने वालों ने मोदी सरकार की कॉरपोरेट समर्थक किसान विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ संघर्ष तेज़ करने और किसी भी क़ीमत पर भारतीय गणराज्य के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र को मज़बूत करने की शपथ ली।
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26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन देशभर में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान उनको मजदूर संगठनों का भी साथ मिला और कई राज्यों में ट्रैक्टर के साथ अन्य गाड़ियां भी कदमताल करती दिखी।

एसकेएम ने काफी पहले ही गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर वाहन परेड का आह्वान किया था। जिसमें उसने कॉर्पोरेट लूट को समाप्त करने, कृषि को बचाने और भारत को बचाने का आह्वान किया था। इसको गणतंत्र दिवस पर समर्थन मिलता दिखा।

किसान मोर्चा ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर किसान परेड को पूरे भारत में बड़े पैमाने पर भागीदारी और उत्साह के साथ समर्थन मिला। विशेष रूप से उत्तर भारत में खराब मौसम का सामना करते हुए भी परेड में हजारों ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के साथ लाखों किसानों शामिल हुए। देर शाम तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, परेड 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 484 जिलों में आयोजित की गई।

किसान यूनियनों और संगठनों के अलावा, ट्रेड यूनियनों ने भी इसमें भाग लिया, जिससे जमीनी स्तर पर किसान-मज़दूर एकता और मजबूत हुई। छात्र, युवा, महिलाएं और अन्य वर्ग के लोग भी एकजुटता व्यक्त करते हुए परेड में शामिल हुए।

परेड में भाग लेने वालों ने मोदी सरकार की कॉरपोरेट समर्थक किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने और किसी भी कीमत पर भारतीय गणराज्य के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र को मजबूत करने की शपथ ली।

किसान मोर्चा ने अपने बयान में कहा कि परेड की भारी सफलता और भारत भर में जन सभाओं की कार्रवाई भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए एक चेतावनी है कि किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, जन विरोधी नीतियों को लागू करने का लोगों के व्यापक और मजबूत प्रतिरोध के साथ जवाब दिया जाएगा। .

किसान मोर्चा ने साफ तौर पर कहा कि यह परेड किसानों के संघर्ष के दूसरे चरण का हिस्सा थी, ताकि केंद्र सरकार पर 9 दिसंबर 2021 के लिखित आश्वासन को लागू करने और सभी फसलों के लिए गारंटीकृत खरीद के साथ एमएसपी@सी2+50% को वैध बनाने सहित किसानों की अन्य आवश्यक मांगों को लागू करने के लिए दबाव डाला जा सके। किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए व्यापक ऋण माफी, बिजली क्षेत्र के निजीकरण और प्री-पेड मीटर की स्थापना को रोकना, इनपुट की लागत को कम करना, सरकार द्वारा नियंत्रित सरल और सार्वभौमिक फसल बीमा सुनिश्चित करना, किसानों के लखीमपुर खीरी नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करना और मुकदमा चलाना और अन्य मांगें शामिल है।

एसकेएम ने पहले ही 16 फरवरी 2024 को ग्रामीण भारत बंद का आह्वान किया है, इसी दिन ट्रेड यूनियनों ने भी औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल का आह्वान किया है और एसकेएम को उम्मीद है कि उस दिन ग्रामीण भारत ठप रहेगा। संघर्ष को आने वाले दिनों में पूरे राज्यों, जिलों से लेकर गांवों तक बढ़ाया जाएगा और अंततः तब तक तेज किया जाएगा जब तक कि मोदी सरकार सभी मांगें पूरी नहीं कर लेती।

एसकेएम ने अपने बयान में कहा कि यह ध्यान में रखा जा सकता है कि कृषि के निगमीकरण ने कृषि संकट को जन्म दिया है, जिससे किसानों, श्रमिकों और युवाओं का जीवन भी तबाह हो गया है। 2014-2022 के मोदी वर्षों के दौरान 1,00,474 भारतीय किसानों ने आत्महत्या की है। हालांकि पिछले नौ वर्षों में कॉरपोरेट्स का 14.64 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर दिया गया, लेकिन किसानों का एक भी रुपया माफ नहीं किया गया। इनपुट के लिए सब्सिडी की वापसी और अनियंत्रित मूल्य वृद्धि ने कृषि में उत्पादन की लागत और किसान परिवारों के दैनिक खर्च को बढ़ा दिया है।

एसकेएम ने दोहराया है कि नरेंद्र मोदी भारत के अब तक के सबसे किसान विरोधी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने वास्तविक एमएसपी, ऋण माफी और प्रति वर्ष 2 करोड़ रोजगार सुनिश्चित करने के चुनावी वादे का उल्लंघन करके किसानों को धोखा दिया है।

परेड के दौरान किसानों ने शपथ ली। जो इस प्रकार थी-

“हम किसान, मजदूर और भारत के सभी तबकों के लोग : भारत के लोगों द्वारा खुद को भारत का संविधान सौंपने की इस 74वीं वर्षगांठ पर, और जो आज भाजपा नियंत्रित केंद्र सरकार की निर्लज्ज और बेशर्म कॉर्पोरेट कृषि नीतियों के कारण खतरे में पड़ गई है, भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत हमारे गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए गंभीरता से संघर्ष करने की शपथ लेते हैं।
हम: बिजली और मशीनरी सहित महंगे इनपुट को नियंत्रित करने और बेचने ;
अपने बाज़ारों के अनुरूप फसल पैटर्न को बदलने ;
कृषि सब्सिडी बंद करने और फसलों का सुनिश्चित मूल्य निर्धारण और खरीद न करने ;
खाद्य भंडारण को नियंत्रित करने और इसके जरिए मुनाफाखोरी के लिए खाद्य आपूर्ति को नियंत्रित करने ;
खाद्य प्रसंस्करण और खाद्य बाजारों पर कब्जा करने ;
गरीबों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सुरक्षा को कमजोर करने ;
और कृषि भूमि, वन और जल संसाधनों पर कब्ज़ा करने और उनका व्यावसायीकरण करने ;
के कॉर्पोरेट प्रयास का विरोध करने की शपथ लेते हैं।
हम अपने साथी ग्रामीणों को सांप्रदायिक एजेंडे के हमले के बारे में जागरूक करने की भी शपथ लेते हैं :
जो हमारे समाज के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बर्बाद कर रहा है ;
जो हमारे संविधान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए निहित समानता के अस्तित्व को नकारते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों को खतरे में डालता है।

हम जाति-वर्चस्व पर आधारित मनुवादी सिद्धांतों के खिलाफ :

जो महिलाओं, दमित जातियों और जनजातियों को अपनी अधीनता में रखना चाहते हैं और उन्हें सुरक्षित और संरक्षित रोजगार के साथ समानता, बौद्धिक और सम्मानपूर्ण जीवन और आजीविका के अधिकार से वंचित करते हैं ;
इसकी निंदा करते हुए किसानों, मजदूरों और सभी लोगों को इसके खिलाफ एकजुट करने की शपथ लेते हैं।

हम इस दिन सभी प्रकार के अन्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दमन और विशेष रूप से लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने की शपथ लेते हैं। हम अपने संविधान में निहित सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक विकास से संबद्ध अधिकारों का सम्मान करने और उन पर जोर देने की शपथ लेते हैं।

हम अधिनायकवाद, राज्य सत्ता द्वारा शक्ति के प्रयोग और आजीविका पर हमले के खिलाफ और संघीय अधिकारों और इस बहुराष्ट्रीय देश की विविधता की रक्षा के लिए पूरे भारत के लोगों के एकजुट और लोकतांत्रिक आंदोलन को जीवंत बनाने की शपथ लेते हैं।

हम कॉर्पोरेट लूट को ख़त्म करने, खेती बचाने और भारत को बचाने की शपथ लेते हैं।”

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