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2024 के लिए नये सिरे से तैयारी: सपा का बूथ पर ज़ोर, कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा, आरएलडी का संदेश रथ

पांच में से चार राज्यों की हार ने कांग्रेस के साथ सपा और रालोद को भी सबक़ दिया है। उधर मायावती पर भी ‘इंडिया’ के साथ जाने का दबाव बढ़ रहा है।
uttar pradesh

देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों के ख़त्म होने के साथ, उत्तर प्रदेश में  विपक्षी दालों के बीच लोकसभा चुनाव 2024, की तैयारियों को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। प्रदेश के सभी प्रमुख विपक्षी दल, सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के “हिन्दुत्व” के एजेंडे के विरुद्ध “सामाजिक न्याय” के मुद्दे अर्थात “जातिगत जनगणना” को हथियार के रूप में देख रहे हैं।

सपा-रालोद "इंडिया" के साथ 

सभी दल पाँच प्रदेशों के हाल में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों विशेषकर कांग्रेस के प्रदर्शन को नज़र में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस की पाँच में से चार राज्यों में हुई हार के बावजूद समाजवादी पार्टी  (सपा) या राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने गठबंधन “इंडिया” यानी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ से अलग होने की कोई  बात नहीं कही है।

मुस्लिम वोट

बल्कि यह माना जा रहा है कि हिन्दी भाषी तीन प्रदेशों, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली हार के बाद, “इंडिया गठबंधन” के घटक दालों,  कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच पैदा हुई दूरियाँ कम हो सकती हैं। हालांकि मुख्य विपक्षी दल सपा और कांग्रेस दोनों की नज़रे अभी भी, प्रदेश के 19-20 प्रतिशत मुस्लिम वोट पर लगीं हुई हैं।

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) द्वारा अभी तक अकेले ही चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। लेकिन हाल में हुए चुनावों के बाद बीएसपी की एक मीटिंग प्रस्तावित है, जिसमें भविष्य की रणनीति की रूपरेखा पर विचार किया जायेगा।

भूमिका बड़े भाई जैसी हो 

सपा जिसके पास प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा में क़रीब 113 विधायक हैं, अभी भी “इंडिया गठबंधन” का हिस्सा बना रहना चाहती है। हालाँकि पार्टी की मंशा है कि 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में, “मुख्य विपक्षी दल” होने कारण उसकी भूमिका, विपक्षी गठबंधन में बड़े भाई  की जैसी  होनी चाहिए।

सपा-कांग्रेस में घटना तनाव

ज़ाहिर है कि हाल में आये चुनाव नतीजों का प्रभाव सपा समेत सभी  विपक्षी दालों की रणनीति पर भी देखने को मिल रहा है। इन चुनावों से पहले सपा और कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर जो तनाव उत्पन हुआ था, वह  अब कम होता नज़र आ रहा है। जिसका मुख्य कारण यह माना जा  रहा है कि कांग्रेस भले तीन राज्यों में बीजेपी से चुनाव हार गई हो, लेकिन उसने तेलंगाना में एक क्षेत्रीय दल, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), को  कमज़ोर कर चुनाव हराया है। इस से पहले कांग्रेस ने कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) को कमज़ोर किया था। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी और दोनों जगह मुस्लिम वोटों का झुकाव कांग्रेस की तरफ दिखाई दिया है।

कहा जा रहा कि सपा को इसी बात का भय है कि अगर उत्तर प्रदेश में भी मुस्लिम वोटों की हवा कांग्रेस की तरफ होती है तो उसको बड़ा नुकसान होगा। क्योंकि सपा की राजनीति का आधार “मुस्लिम-पिछड़ों” विषेशकर यादवों की राजनीति पर  है। मुस्लिम बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से, विधानसभा चुनाव 2007 और लोकसभा 2009 को छोड़कर सभी चुनावों में परंपरागत ढंग से सपा का वोटर रहा है।

“भारत जोड़ो यात्रा” का असर 

राहुल गाँधी की “भारत जोड़ो यात्रा” के बाद से मुस्लिम समाज का रुझान  क्षेत्रीय दलों से हटकर दोबारा कांग्रेस की तरफ हुआ है। सपा के नेता बताते हैं कि अगर “इंडिया गठबंधन” उनकी पार्टी को 40-50 सीटों तक का प्रस्ताव देता है तो  उनका आलाकमान इस पर मान जायेगा। पार्टी के रणनीतिकार बताते है उनकी पार्टी  “जातिगत जनगणना” के साथ “बेरोज़गारी” के सवाल पर भी जनता के बीच जाएगी।

कांग्रेस को 15-20 सीटें

मंडल की राजनीति से जन्मी सपा चाहती है प्रदेश में “इंडिया गठबंधन” की कमान उसके हाथ में रहे और वह सामान विचारधरा के दूसरे दलों को साथ लेकर चले और कांग्रेस को 15-20 सीटें दी जायें।

पहले यह माना जा रहा था की विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे से कांग्रेस और सपा के रिश्तों में आई दरार के कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव  “इंडिया गठबंधन” की अगली बैठक में शामिल होने के लिए, अपनी जगह राम गोपाल यादव को भेज सकते हैं। लेकिन पार्टी के नेताओं का कहना है कि अब ऐसा होने की सम्भावना कम है और स्वयं अखिलेश यादव  “इंडिया गठबंधन” की अगली बैठक में शामिल होने जा सकते हैं।  

बूथ प्रबंधन 

सपा का कहना है इस वक़्त वह बूथ भी मज़बूत करने पर काम कर रही है। हर ज़िले में दो पूर्व कबिनेट मंत्री बूथ मज़बूत करने के काम की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के नेता, इन दिनों, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का काम  भी कर रहे है। पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मुस्लिम और यादव मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे। इस लिए पार्टी कार्यकर्ता  जिनके नाम गायब थे, उसके नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा रहे हैं और फ़र्ज़ी मतदाताओं के नाम कटवा भी रहे हैं।

प्राथमिकता बीजेपी को हटाना 

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक़ जमाई ने न्यूज़क्लिक से कहा पार्टी की प्राथमिकता बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि जिस राज्य में जो दल मज़बूत हो, जैसे उत्तर प्रदेश में सपा,  वहां वह दल “इंडिया गठबंधन” का प्रतिनिधित्व करे। यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) की 2004-14 तक की सरकार की बात करते हुआ जमाई ने कहा दोनों बार सपा के संथापक मुलायम सिंह यादव ने बिना शर्त, बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस  को समर्थन दिया था। 

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा 

आगामी लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में जनता से जुड़ने के लिए परिवर्तन यात्रा निकलने जा रही है। प्रदेशभर में होने वाली इस यात्रा की अगुवाई पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय करेंगे। पार्टी के नेता बताते हैं कि दिसम्बर की 15 - 20 के बीच शुरू होने वाली यह  यात्रा पहले चरण में सहारनपुर से शुरू  होकर सीतापुर तक जाएगी।

पार्टी के स्थानीय नेताओं की माने तो पार्टी के राज्य के नेता चाहते हैं की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी आदि  भी इस यात्रा में शामिल हो। पार्टी के संगठन मंत्री अनिल यादव ने न्यूज़क्लिक को बताया कि इसकी शुरुआत सहारनपुर से होगी और यह  यात्रा मुज़फ्फरनगर  मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर बरेली, शाहजहांपुर होते हुए सीतापुर में समाप्त होगी। 

यात्रा के उद्देश्य  पर बात करते हुए यादव ने कहा कि यात्रा के दौरान जनता को समझाया जाएगा कि बीजेपी को हराने का माद्दा सिर्फ कांग्रेस में हैं। जनता को बताया जायेगा, कि बीजेपी की जन विरोधी नीतियों का विरोध कांग्रेस कर रही है, और जनता के अधिकारों के लिए बीजेपी के विरुद्ध,  कांग्रेस सड़क पर संघर्ष कर रही है। 

कांग्रेस का “वोटबैंक” कम नहीं हुआ

कांग्रेस के प्रदेश संगठन मंत्री यादव  ने कहा कि विभिन्न राज्यों में हुए चुनाव परिणाम में कांग्रेस सत्ता से भले दूर हुई है, लेकिन उसका “वोटबैंक” कम नहीं हुआ है। पार्टी के आलाकमान से कार्यकर्ता तक किसी तरह की हताश नहीं है और पार्टी नई ऊर्जा के साथ अपनी 2024 लोकसभा चुनावों की  तैयारी करनी होगी। 

यह पूछने पर की कांग्रेस कौन सी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, यादव ने जवाब दिया जिस पर पार्टी 2009 में विजय हुई थी। बता दें 2009 में कांग्रेस से उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक सीटें जीती थी।

सड़क पर उतरने की ज़रूरत 

 “इंडिया गठबंधन” में शामिल दलों की नाराज़गी के बारे बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी विपक्षी दल  गठबंधन से बहार जाएंगे या उसमें शामिल नहीं होंगे, जनता उनको माफ़ नहीं करगी।  यादव ने कहा, वह यह दावा ज़मीन पर विभिन सामाजिक संगठनो और  संस्थानों से बात करके कर रहे हैं। आखिर में उन्होंने यह भी कहा कि समाज के बुनियादी मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे बिना नरेंद्र मोदी से  राजनितिक लड़ाई जीतना असंभव है।  

बीएसपी  की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने चार राज्यों में हार का सामना करने के बाद, ज़मीनी हक़ीक़त जानने के एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक 10 दिसंबर को लखनऊ में  बुलाई है। बैठक में  देश भर के बीएसपी  नेताओं और पदाधिकारियों के साथ चर्चा के साथ राजनीतिक हालत  का जायज़ा लिया जायेगा। इसके अलावा यह बैठक  लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी "नए सिरे से शुरू" करने पर भी बात  होगी।

बीजेपी ने 81 करोड़ लोगों को मोहताज बना दिया 

मायावती ने 6 दिसम्बर को डॉ बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के 67 वें परिनिर्वाण दिवस के मौक़े पर  मोदी  सरकार की “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना” पर तंज कसते हुए कहा कि देश के 81 करोड़ से अधिक लोगों को सरकारी अनाज का मोहताज बना देना ना तो आज़ादी  के बाद का सपना था और ना ही संविधान बनाते समय बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने ऐसा सोचा था।

पिछले कुछ सालों में ऐसा बहुत कम ही देखा गया है जब मायावती ने बीजेपी सरकार की किसी नीति को निशाना बनाया है।  मायावती लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रही हैं, जबकि बीजेपी इस मुद्दे से असहज होती है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं यह इशारा है कि मायावती बीजेपी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने के लिए कोई रणनीति बना रही हैं। कहा यह भी जा रहा है दलित समाज का उन पर  “इंडिया गठबंधन” में शामिल होने का दबाव है। जिसकी मुख्य कारण यह है कि दलित समाज को लगता है बीजेपी के सत्ता में वापस आने से उच्च जतियों का वर्चस्व बढ़ेगा और उनका उत्पीड़न होगा। दलित समाज  को आरक्षण ख़त्म होने का भी ख़तरा है।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण  रोकना है 

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भी  “इंडिया गठबंधन” के साथ रहने का फैसला लिया है। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि इस सबक से ‘इंडिया’ गठबंधन” भविष्य में और  मज़बूत  बनकर उभरेगा। दुबे कहते हैं कि “इंडिया गठबंधन” ने जो कमियां छोड़ रखी थी, उनको 2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं होने देंगे। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के माध्यम से उनकी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामाजिक एकता को मज़बूत कर रही है ताकि जनता पर बीजेपी के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण असर न हो। 

चौधरी चरण सिंह संदेश रथ

बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर रालोद जनता के बीच पहुंचने लगी है। इसी क्रम में पार्टी आने वाले 10 दिसंबर से “चौधरी चरण सिंह संदेश रथ” निकालने की तैयारी में है। पार्टी के एक नेता के अनुसार  ये रथ यात्रा सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, बागपत, बिजनौर, मेरठ और गाज़ियाबाद होते हुए 23 दिसम्बर को दिल्ली किसान घाट में समाप्त होगी। कहा जा रहा है कि पार्टी 10 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। 

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