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कामोत्तेजक दवाओं के कारण गैंडों के अस्तित्व पर संकट!

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैंडों के सींगों की बढ़ती हुई मांग की वजह से अवैध शिकार करने वाले गिरोह सक्रिय और संगठित हो गए हैं। ये गिरोह स्थानीय निवासियों को तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं और उन्हें गैंडों के शिकार में शामिल करते हैं।
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गैंडों की संख्या में लगातार चिंताजनक गिरावट दर्ज की जा रही है। यह देखा गया है कि कोरोनाकाल और उसके बाद से गैंडों का शिकार बढ़ रहा है। जानकार बताते हैं कि गैंडों का शिकार मुख्य रूप से उनके सींगों के लिए किया जाता है। वजह है कि इसका उपयोग कई एशियाई देशों में दवा बनाने के साथ-साथ यमन और ओमान जैसे देशों में खंजर आदि हथियार बनाने के लिए किया जाता है।

जानकार मानते हैं कि गैंडों के सींगों से तैयार चूर्ण में कुछ विशेष औषधीय गुण होते हैं। माना जाता है कि यह चूर्ण चीन तथा अन्य पश्चिम एशियाई देशों में कामोत्तेजक पदार्थों के लिए उपयोग होता है। इस विश्वास के कारण दुनियाभर में गैंडों का व्यापक रूप से शिकार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैंडों के सींगों की बढ़ती हुई मांग की वजह से अवैध शिकार करने वाले गिरोह सक्रिय और संगठित हो गए हैं। ये गिरोह स्थानीय निवासियों को तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं और उन्हें गैंडों के शिकार में शामिल करते हैं।

भारत में गैंडों के पतन का एकमात्र कारण अवैध शिकार ही नहीं है, बल्कि खतरनाक वनस्पतियों से उनके आवास को पैदा हुआ खतरा भी बताया जाता है। मुख्य रूप से असम के काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य में पार्थेनियम, लैंटाना जैसी 18 जहरीली वनस्पतियों ने गैंडों के आवास को खतरे में डाल दिया है। यह वनस्पति और इसी प्रकार की अन्य जहरीली वनस्पतियों की बढ़ती पैदावार को भी गैंडों के पतन के पीछे की वजह बताया जा रहा है। हालांकि, इसका अध्ययन करने के लिए 'भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून' ने भारत सरकार से एक पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए अनुमति मांगी है।

वहीं, एशिया के अंतर्गत नेपाल और भारत में 'गेंडा संवर्धन योजना' को अच्छी तरह से लागू करने का प्रयास भी किया गया था। नेपाल में पहले बड़े पैमाने पर गैंडों का अवैध शिकार किया जाता था। लेकिन, यह दवा किया गया कि 'गेंडा संवर्धन योजना' लागू होने के बाद गैंडों के अवैध शिकार को काफी हद तक नियंत्रित किया गया था, लेकिन फिर बाढ़, सूखा और जलवायु परिवर्तन के कारण जंगल में बढ़ती आग की घटनाओं में गैंडों के जीवन और उनकी दुनिया को खतरे में डाल दिया। हालांकि, विगत कुछ वर्षों के दौरान कुछ इलाकों में एक सींग वाले गैंडों की संख्या बढ़ी है।

संग्रहालयों और चिड़ियाघरों से तक चोरी हो रहे सींग

इंडोनेशिया, मलेशिया और जावा में गैंडों की दो दुर्लभ प्रजातियों की स्थिति गंभीर हो चुकी है। यहां तक कि दुनिया भर के कई वस्तु संग्रहालयों और चिड़ियाघरों में रखे गैंडों के सींगों तक को तस्करों ने हथिया लिया है। गैंडा तस्कर सबसे सुरक्षित कही जाने वाली जगहों से भी गैंडे के सींगों की चोरी करने में सफल रहे हैं।

बता दें कि दुनिया भर में गैंडे की पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। अफ्रीका में काले और सफेद गैंडे की दो प्रजातियां पाई जाती हैं। इसी तरह, इसकी तीन मुख्य प्रजातियां एशिया में पाई जाती हैं। इनमें वियतनाम और इंडोनेशियाई द्वीप पर पाए जाने वाले जावन और सुमातिरियन गैंडे शामिल हैं, जबकि भारत और नेपाल में पाए जाने वाले भारतीय गैंडे या एक सींग वाले गैंडे एशिया में पाए जाने वाले गैंडों की तीसरी प्रजाति है। जावन गैंडे की प्रजाति भारत के उत्तर-पूर्व में पाई जाती थी, लेकिन अब वहां से इस श्रेणी के गैंडे विलुप्त हो गए हैं।

वहीं, अफ्रीकी गैंडों की संख्या भी तेजी से घट रही है। दुनिया में सिर्फ 23 हजार 432 अफ्रीकी गैंडे बचे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका ने कुछ वर्षों में 22 हजार 137 गैंडों का संरक्षण किया है। इनमें से 6 हजार 195 काले और 15 हजार 942 सफेद गैंडे हैं। हालांकि, वर्ष 2018 और 2021 के बीच गंभीर रूप से लुप्तप्राय काले गैंडों की संख्या में सालाना तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन सफेद गैंडों की संख्या लगभग 3.1 प्रति वर्ष की दर से कम होती जा रही है।

दुनिया भर में गैंडों के संरक्षण के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और अलग-अलग देशों की सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए मुख्य रूप से तीन कार्यक्रम चल रहे हैं। पहला 'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम', दूसरा 'डीहॉर्निंग प्रोग्राम' और तीसरा संरक्षित अभयारण्यों में गैंडा संवर्द्धन की योजना। 'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम' के तहत गैंडों को जोखिम वाले क्षेत्रों से नए स्थानों पर ले जाया जाता है, जहां वे अपनी पीढ़ी को बढ़ने के लिए प्रजनन कर सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकते हैं।

पशु चिकित्सक क्यों कर रहे गैंडों के सींगों को सर्जरी?

'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम' के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका में वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड वन्यजीव और पर्यटन के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं के साथ इस दिशा में प्रयास कर रहा  है। पिछले 20 वर्षों में वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड के प्रयासों से 201 काले गैंडों को नए स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। साथ ही, इस अवधि के दौरान 12 गैंडे पैदा हुए हैं। इसी तरह, 'डीहॉर्निंग प्रोग्राम' के तहत प्रशिक्षित पशु चिकित्सक गैंडों के सींगों को सर्जरी करके निकालते हैं, क्योंकि गैंडा तस्कर गैंडों को उनके सींगों के लिए ही मारते हैं। सींगों को सफलतापूर्वक निकालने के बाद बिना सींगों के गैंडों को दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाता है।

वहीं,  संरक्षित अभयारण्यों में गैंडा संवर्द्धन की योजना को ध्यान में रखते हुए दक्षिण अफ्रीका के अभयारण्य में सफेद गैंडों को बचाने के लिए कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। कई देशों ने गैंडों के लिए संरक्षित अभयारण्य बनाए हैं। अंतिम शेष जावन गैंडों को उजंग कुलोन नेशनल पार्क में संरक्षित किया गया है।

दूसरी तरफ, खास तौर पर कोरोना काल के बाद गैंडों के सींगों की तस्करी एक बार फिर बढ़ रही है। यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, जिम्बाब्वे और केन्या में गैंडों के अवैध शिकार से जुडी हुई वारदातें सामने आ रही हैं।

उधर, अफ्रीकी गैंडों की संख्या भी तेजी से घट रही है। चिंताजनक तथ्य यह है कि दुनिया में सिर्फ 23 हजार 432 अफ्रीकी गैंडे बचे हैं। 'इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर' की रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका ने कुछ वर्षों में 22 हजार 137 गैंडों का संरक्षण किया है। इनमें से 6 हजार 195 काले और 15 हजार 942 सफेद गैंडे हैं। हालांकि, वर्ष 2018 और 2021 के बीच गंभीर रूप से लुप्तप्राय काले गैंडों की संख्या में सालाना तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन सफेद गैंडों की संख्या लगभग 3.1 प्रति वर्ष की दर से कम होती जा रही है।

दुनिया भर में गैंडों के संरक्षण के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और अलग-अलग देशों की सरकारें मिलकर काम कर रहे हैं। गैंडों की पांचों प्रजातियों  को विलुप्त होने से बचाने के लिए मुख्य रूप से तीन कार्यक्रम चल रहे हैं। पहला 'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम', दूसरा 'डीहॉर्निंग प्रोग्राम' और तीसरा संरक्षित अभयारण्यों में गैंडा संवर्द्धन की योजना। 'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम' के तहत गैंडों को जोखिम वाले क्षेत्रों से नए स्थानों पर ले जाया जाता है, जहां वे अपनी पीढ़ी को बढ़ने के लिए प्रजनन कर सकते हैं और अपने लिए तैयार की गई अनुकूल परिस्थितियों में अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकते हैं।

पशु चिकित्सक क्यों कर रहे गैंडों के सींगों को सर्जरी?
 
'ट्रांसलोकेशन प्रोग्राम' के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका में 'वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड' वन्यजीव और पर्यटन के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं के साथ गैंडों को बचाने की दिशा में प्रयास कर रहा  है। पिछले 20 वर्षों में 'वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड' के प्रयासों से 201 काले गैंडों को नए स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। साथ ही, इस अवधि के दौरान 12 गैंडे पैदा हुए हैं।

इसी तरह, 'डीहॉर्निंग प्रोग्राम' के तहत प्रशिक्षित पशु चिकित्सक गैंडों के सींगों को सर्जरी करके निकालते हैं, क्योंकि गैंडा तस्कर गैंडों को उनके सींगों के लिए ही मारते हैं। सींगों को सफलतापूर्वक निकालने के बाद बिना सींगों के गैंडों को दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाता है।

तस्वीरें साभार: वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ संगठन

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