Skip to main content
xआप एक स्वतंत्र और सवाल पूछने वाले मीडिया के हक़दार हैं। हमें आप जैसे पाठक चाहिए। स्वतंत्र और बेबाक मीडिया का समर्थन करें।

कोलकाता: ‘इंसाफ यात्रा’ का अंतिम पड़ाव, DYFI की ब्रिगेड रैली में उमड़ा जनसैलाब!

रैली में बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं ने काम और शिक्षा के अधिकार की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की शपथ भी खाई।
DYFI
फ़ोटो साभार : X/CPI (M)

रविवार, 7 जनवरी 2023 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य भर से लाखों युवा और आम नागरिक एकत्र हुए। यह विशाल रैली, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) द्वारा निकाली गई 50 दिवसीय 'इंसाफ यात्रा' के समापन का प्रतीक थी। आपको बता दें, डीवाईएफआई की इंसाफ यात्रा की प्रमुख मांग थी - काम और शिक्षा का अधिकार।

ब्रिगेड परेड मैदान में दूर-दूर तक बस लोगों का हुजूम ही नज़र आ रहा था। मैदान के हर कोने में डीवाईएफआई का झंडा लहराते हुए देखा जा सकता था। रैली में भाग लेने के लिए कुछ युवा अपने परिवार के सदस्यों के साथ आए थे।

न्यूज़क्लिक ने 36 वर्षीय आदिवासी महिला पुष्पा हेम्ब्रेम से बात की, जो कोलकाता शहर से लगभग 236 मील दूर पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बांसपहाड़ी इलाके से आई थी। वह अपने बेटे और बेटी के साथ यहां आई थीं। उनके पति दृष्टिबाधित हैं और घर पर ही रहते हैं।

उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "हमें न तो वृद्धावस्था पेंशन मिलती है और न ही विकलांग पेंशन क्योंकि हम एक विशेष विचारधारा के समर्थक हैं। हमारे गांव में पीने के पानी के पर्याप्त स्रोत नहीं हैं और हमारे गांव की सड़क भी जर्जर हालत में है। ब्रिगेड रैली से पहले निकाली गई 'इंसाफ यात्रा' की हमारे गांव में काफ़ी चर्चा रही और जहां से भी यह गुज़री, इसने दिल जीत लिया।"

रैली में भारी संख्या में युवाओं की भागीदारी पर टिप्पणी करते हुए, डीवाईएफआई के पूर्व महासचिव मोहम्मद सलीम ने रैली में कहा कि "वह राज्य में वामपंथी पुनर्जागरण और पुनरुत्थान के लिए युवाओं पर अपनी उम्मीदें लगाए बैठे थे।"

पेशे से नाई और CITU कार्यकर्ता राबिन प्रमाणिक(41), दक्षिण-24 परगना जिले से रैली में आए थे। उन्होंने कहा, “टीएमसी के हुड़दंगियों के दिन अब ख़त्म होने की कगार पर हैं और यह केवल अपने भाजपा के सहयोगियों से मिलने वाली ऑक्सीजन के सहारे जारी है।”

दरअसल इस ब्रिगेड रैली में कई वक्ताओं ने 'बीजेपी और टीएमसी के बीच गुप्त गठबंधन' का आरोप लगाया।

रैली के दौरान गुब्बारे, पोस्टर और प्लेकार्ड भी देखे गए जिनके माध्यम से आरोप लगाया गया कि "आरएसएस ने ममता बनर्जी को दुर्गा के रूप में चित्रित किया है, और टीएमसी सरकार के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ नहीं किया जाएगा।"

ब्रिगेड रैली के दौरान अपने भाषण में, डीवाईएफआई स्टेट के अध्यक्ष ध्रुबोज्योति साहा जिन्होंने कूचबिहार से शुरू होकर कोलकाता में समाप्त होने वाली 50 दिनों की 'इंसाफ यात्रा' में पूरे 2910 किलोमीटर की सड़क यात्रा की, उन्होंने अपना अनुभव जनता के साथ साझा किया कि पिछले 50 दिनों के दौरान लोगों ने किस तरह से 'इंसाफ पदयात्रियों' का समर्थन किया। इसके अलावा उन्होंने कृषि कार्य में बेहतर वेतन की मांग और राज्य में अधिक संख्या में प्रवासी श्रमिकों और दैनिक वेतन भोगियों को पैदा करने वाली प्रणाली के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई।

उन्होंने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले में उन्होंने विभिन्न राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के रूप में काम कर रहे पिताओं को अपने बेटों की मौत पर रोते हुए देखा है।

प्रवासियों की दुर्दशा को लेकर मोहम्मद सलीम ने भी सवाल उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि "क्या बंगाल के युवाओं किस किस्मत में नई दिल्ली में फर्श साफ करना, हरियाणा में कपड़े धोना, केरल में ओवरहेड टावरों में काम करना या चेन्नई के ईंट भट्टों में काम करना ही लिखा है।"

सलीम कहते हैं, “वे सामूहिक रूप से दक्षिणी राज्यों की ट्रेनों में यात्रा करते हैं, उनकी व्यक्तिगत पहचान प्रवासी श्रमिकों के टैग के पीछे छिपी होती है। वे अक्सर कफन में लिपटे हुए घर लौटते हैं।”

डीवाईएफआई की राज्य सचिव मिनाक्षी मुखर्जी ने बताया कि “सालों पहले, राज्य का औद्योगीकरण लगभग ख़त्म हो गया था जब टाटा नैनो परियोजना को ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक आंदोलन के बाद पश्चिम बंगाल से बाहर कर दिया गया था। तब सत्ता प्रतिष्ठान के एक वर्ग ने इसका मज़ाक उड़ाया था, लेकिन अब वे इसके दुष्परिणामों को समझते हैं, क्योंकि राज्य श्रमिकों और श्रमिक वर्ग के लिए रेगिस्तान में तब्दील हो गया है। कोई नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं।"

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य सचिव श्रीजन भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि स्कूलों और कॉलेजों को बिना किसी उचित आधार के बंद किया जा रहा है।

भट्टाचार्य ने दावा किया कि देशभर में सरकारी विभागों में 30 लाख और राज्य में छह लाख पद खाली हैं। “लोग काम, काम और केवल काम चाहते हैं। उन्हें ख़ैरात से शांत नहीं किया जा सकता है।”

रैली में बड़ी संख्या में वामपंथी नेताओं ने भाग लिया और वक्ताओं ने राज्य में "बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार" के प्रसार का भी आरोप लगाया।

डीवाईएफआई के एक नेता ने आरोप लगाया, "पूरे देश में जब लोग मौजूदा ताकतों द्वारा उत्पन्न खतरे के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं, पश्चिम बंगाल में सरकार भाजपा के साथ मिलकर काम कर रही है।"

रैली में जानकारी दी गई कि "डीवाईएफआई नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र राज्य के सभी बूथों पर यूथ ब्रिगेड तैयार करेगा।"

अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।

टेलीग्राम पर न्यूज़क्लिक को सब्सक्राइब करें

Latest