Skip to main content
xआप एक स्वतंत्र और सवाल पूछने वाले मीडिया के हक़दार हैं। हमें आप जैसे पाठक चाहिए। स्वतंत्र और बेबाक मीडिया का समर्थन करें।

बिहार में यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड नहीं होगा लागू, राजनीतिक सरगर्मियां तेज़

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वे राष्‍ट्रीय स्तर पर भी यूसीसी का विरोध करेंगे।
nitish kumar

संभवतः बिहार ऐसा पहला प्रदेश है जहां के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कह दिया है कि इस राज्य में यूनीफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) नहीं लागू होगा। मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इसकी घोषणा इसी 15 जुलाई को उस समय की जब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का एक प्रतिनिधि मंडल उनसे मिलने पहुंचा। दल के सदस्यों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए यूसीसी को लेकर पूरे देश में मुस्लिम समाज के खिलाफ जारी संगठित दुष्प्रचारों के खिलाफ समुचित हस्तक्षेप करने की मांग की। तब नितीश कुमार ने उन्हें आश्वासन देते हुए उक्त घोषणा की।

जाहिर है कि इसके बाद सियासी घमासान होना लाज़मी है। जिसका अंदाजा प्रदेश के विपक्षी दल भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं और फिर उस पर सत्ताधारी दल के नेताओं की टिप्पणियों को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।

वैसे देखने-सुनने में तो जदयू नेताओं के बयान फिर भी काफी हद तक शालीनता के दायरे में हैं। जिसमें वे तथ्यों को सामने रखकर ये कह रहें हैं कि- यूसीसी लागू करने का अभी उपयुक्त माहौल नहीं है। लेकिन भाजपा नेताओं के बयान इसके ठीक उलट और धमकी भरे लहजे में सामने आ रहें हैं। जिनमें राज्य सरकार को ये आगाह किया जा रहा है कि- समान नागरिक संहिता जब लागू होगी तब नितीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे मुख्यमंत्री भी अपने राज्यों में इसे लागू करने से नहीं रोक पायेंगे।

वहीँ, राज्य के प्रमुख वामपंथी दल भाकपा माले ने सबसे आगे बढ़कर मीडिया के माध्यम से नितीश कुमार के बयान का स्वागत करते हुए कहा है- बिहार में यूसीसी नहीं लागू करने का बिहार सरकार का फैसला सराहनीय है। राज्य में एनआईए की गैरकानूनी गतिविधियों पर भी रोक लगाने की ज़रूरत है।

माले ने अपने बयान में भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह लोकसभा चुनाव के ठीक पहले यूसीसी लाकर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की कोशिश कर रही है। जिसके लिए एक तो केंद्र सरकार ने प्रस्तावित यूसीसी के स्वरूप और विषय-वस्तु को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव भी नहीं दिया है। लेकिन संघ-भाजपा का पूरा प्रचारतंत्र देश में मुस्लिम समुदाय को टारगेट करके उसे बदनाम करने में जुट गया है। बयान के माध्यम से व्यापक जनता का ध्यान दिलाते हुए यह भी बताया गया है कि यूसीसी का जितना विरोध मुस्लिम समुदाय की ओर से हो रहा है, उससे कई गुना ज्यादा विरोध, मेघालय व नागालैंड जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों और पूरे देश के आदिवासी समुदायों द्वारा किया जा रहा है।

माले ने साफ़ साफ़ कहा है कि यूसीसी का एजेंडा, मुसलमानों को खलनायक साबित कर देश और समाज को सांप्रदायिक रूप से बांटने की सोची समझी चाल है। जिसके तहत “लव जिहाद” जैसे विषाक्त मिथकों को ज़ोरों से प्रचारित-प्रसारित कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है कि “मुस्लिमों की आबादी, हिन्दुओं से अधिक हो जायेगी!” निराधार और बेतुके नैरेटिव्स फैलाकर यूसीसी को स्‍वीकार्य बनाने की कवायद ज़ोर शोर से चलायी जा रही है। ऐसे में हमारा राष्‍ट्रीय दायित्व बनता है कि केंद्र की सरकार के इस कुत्सित षड्यंत्र को सफल नहीं होने दिया जाय। जबकि पूरे देश की जनता बेलगाम महंगाई और बेरोज़गारी जैसे महासंकटों से परेशान हो गयी है। यूसीसी पर बहस छेड़कर भाजपा इन सवालों से लोगों का ध्यान भटकाकर भागना चाहती है।

माले ने भाजपा पर बिहार में सुनियोजित साम्प्रादायिक उन्माद फैलाने के साथ साथ यह भी आरोप लगया है कि वह एनआईए का इस्तेमाल करके मुस्लिम समाज के लोगों को आतंकित कर रही है। जैसा कि पिछले दिनों दरभंगा से लेकर फुलवारी शरीफ़ में एनआईए की जारी गैरकानूनी करतूतों ने दिखला दिया है। इसलिए बिहार की सरकार भाजपा निर्देशित एनआईए की सभी गैरकानूनी कार्रवाईयों पर त्वरित रोक लगाए।

हैरानी की बात है कि भाकपा माले के इतने तीखे आरोपों पर भाजपा के नेतागण साफ़ चुप हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए नितीश कुमार ने उनसे यह भी कहा कि वे राष्‍ट्रीय स्तर पर भी यूसीसी का विरोध करेंगे। इस मामले में हम अपने पुराने स्टैंड पर मजबूती से आज भी खड़े हैं। जिसके बारे में विधि आयोग को भी हमने साफ साफ़ पहले ही बता दिया है। इसकी चर्चा तो सबसे पहले देश की संसद में होनी चाहिए थी। लेकिन विधि आयोग ने जिस तरीके से राज्य सरकार से जो 16 सूत्री सवाल पूछे हैं, वे भी काफी आपत्तिजनक है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को यह भी भरोसा दिलाया कि बिहार में उनकी सरकार राज्य के हर वर्ग और तबके की सुख-सुविधा और समस्याओं के निराकरण के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है।

सनद रहे कि राजद ने भी अपना विरोध पहले ही दर्ज़ कर रखा है।

वहीँ बिहार में जन-सुराज यात्रा चला रहे प्रशांत किशोर ने भी समस्तीपुर में कहा है कि यूसीसी सीधे तौर पर पूरे देश कि जनता को प्रभावित करेगा। क्योंकि यह कौन नहीं जनता है कि बीजेपी के घोषणापत्र में यूसीसी का मुद्दा, राम मंदिर बनाने के साथ साथ धारा 370 को हटाने का मुद्दा काफी पहले से शामिल है।

ख़बरों में यह भी सूचना लगातार आ रही है कि राजधानी पटना से लेकर प्रदेश के कई हिस्सों और समुदायों में यूसीसी को लेकर विरोध की सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है।

देखना है कि वर्षो से समाजवादी और वामपंथी विचारों की आंदोलन की भूमि रही बिहार की धरती पर यूसीसी विरोध का मामला क्या रंग पकड़ता है। साथ ही बिहार की मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों में किस तरह का राजनीतिक टर्न लेता है। साथ ही महागठबंधन में शामिल सभी वाम दलों समेत अन्य राजनीतिक दल और उसके कार्यकर्त्ता व समर्थक सामाजिक तौर से ज़मीनी स्तर पर कहां तक अपनी सक्रियता निभाते हैं। क्योंकि यूसीसी को लेकर मामला आर-पार के राजनीतिक–वैचारिक संघर्ष जैसा ही बनता जा रहा है।  

अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।

टेलीग्राम पर न्यूज़क्लिक को सब्सक्राइब करें

Latest