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वाराणसीः गंगा में खड़े क्रूज को नावों ने घेरा, डीएम संग हुई बैठक विफल के बाद बोट राइडिंग फिर ठप

नाविकों के नेता प्रमोद मांझी ने कहा कि ज़िला प्रशासन गोल-मोल बातें कर रहा है। वो कह रहे हैं कि वाटर टैक्सी आप ही ले लो। हम पेट के लिए जान भी दे सकते हैं, लेकिन अपने पेट पर किसी लात मारकर घुसने का मौका नहीं देंगे।
Varanasi Ganga Cruise Issue

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रविदास घाट पर खड़े चार क्रूजों को नाविकों ने अपनी नावों और बजड़ों से घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। नाविकों ने ऐलान किया है कि वो गंगा में क्रूज को भी चलने ही नहीं देंगे। गंगा में न नावें चलेगी और न क्रूज और न ही वाटर टैक्सी।

11 जुलाई 2023 की शाम से ही नाविकों ने नौकायन बोट राइडिंग पूरी तरह से ठप कर दी। नाविकों ने कहा कि वाटर टैक्सी को वो गंगा नदी में घुसने नहीं देंगे। घुस गई तो फिर चलने नहीं देंगे। आज सुबह के समय वाटर टैक्सी के विरोध में गंगा घाट पर एक साथ सैकड़ों नाव लेकर नाविकों ने विरोध प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। नाविकों को नारेबाजी करते देख गंगा स्नान करने आए श्रद्धालु सहम उठे। बनारस में सावन के महीने में बड़ी संख्या में सैलानी आ रहे हैं और वो बिना बोट राइडिंग किए ही मायूस होकर लौट रहे हैं।

गंगा में नौकायन ठप होने के बाद जिलाधिकारी एस. राजलिंगम आज दशाश्वमेध घाट पर पहुंचे। धरनारत नाविकों और मांझी समाज के सदस्यों के साथ उनकी काफी देर तक बैठक चली। माझी समाज के मुखिया प्रमोद माझी ने कहा कि यह बैठक विफल रही। लॉन्च होने वाले वाटर टैक्सी के विरोध में उतरे धरनारत नाविकों ने कहा कि किसी भी सूरत में वे गंगा में कोई नया प्रयोग नहीं होने दंगे। क्रूजों के चलने से उनकी माली हालत पहले से ही बिगड़ चुकी है। वाटर टैक्सियां चलने लगेंगी तो उनके सामने भूख से मरने की नौबत आ जाएगी।

दशाश्वमेध घाट पर माझी समाज के अध्यक्ष प्रमोद माझी और जल पुलिस के अफसर भी बैठक में शामिल थे। नाविकों ने जिला और पुलिस प्रशासन से जमकर अपना विरोध दर्ज कराया। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने मांझी समाज के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं को जाना।

वाराणसी में श्रद्धालुओं और सैलानियों की सुविधा के लिए वाटर टैक्सी की लॉन्चिंग होने वाली है। इससे सैलानियों को अस्सी से नमो घाट तक आने-जाने में काफी सहूलियत होगी। साथ ही समय की भी बचत होगी। शासन के इस फैसले से नाविक समाज के लोगों में गुस्सा है। उनको आशंका है कि वाटर टैक्सी आने से उनका धंधा चौपट हो जाएगा। पब्लिक को ज्यादा सहूलियत मिलेगी तो नाव में कोई नहीं बैठेगा। इससे बेरोजगारी का डर सता रहा है। बनारस की गंगा में आधा दर्जन क्रूजों के चलने से नाविक बेहाल हैं।

नाविकों के नेता प्रमोद मांझी ने कहा कि जिला प्रशासन गोल-मोल बातें कर रहा है। वो कह रहे हैं कि वाटर टैक्सी आप ही ले लो। हम पेट के लिए जान भी दे सकते हैं, लेकिन अपने पेट पर किसी लात मारकर घुसने का मौका नहीं देंगे। प्रशासन का कहना है कि वाटर टैक्सियां दान में मिली हैं। इसको चलाएंगे और आगे कोई टैक्सी नहीं आएगी। प्रशासन हमको फांसी दे, गोली मार दे, लेकिन जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक कोई ऐसी बात नहीं मानूंगा। काशी में क्या कृत्य हुआ है, नाविक इसके बारे में दुनिया भर में बताएंगे। आंदोलन में दशाश्वमेध, शिवाला, भदौनी, अस्सी से लगायत राजघाट तक के नाविक और गोताखोर शामिल हुए। उन्होंने अपनी आपत्तियों को सुनाया और अपनी तकलीफों को साझा किया।

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