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दिल्ली: शेल्टर होम के ठेका कर्मचारियों को हाई कोर्ट से राहत

“आज जब दिल्ली में न्यूनतम मज़दूरी का रेट बढ़ गया तो हमें कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स कह कर भगाया जा रहा है। यह मज़दूरों का अपमान है।”
delhi high court
फ़ोटो : PTI

आज दिल्ली हाई कोर्ट ने ठेका मज़दूरों को राहत देने का काम किया। दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में DUSIB द्वारा संचालित शेल्टर होम में काम करने वाले ठेका कर्मचारियों से मौखिक रूप से उनकी सेवाएं समाप्त की जाने की बात कही गई थी जिसके बाद से इन कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया था। लेकिन आज दिल्ली शेल्टर होम वर्कर्स यूनियन बनाम DUSIB के मामले मे दिल्ली हाई कोर्ट ने स्टे देकर ठेका मज़दूरों को राहत प्रदान की। 

दिल्ली शेल्टर होम वर्कर्स यूनियन के सचिव विक्की शर्मा ने बताया, "दिल्ली में वर्तमान में 197 शेल्टर होम, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) द्वारा संचालित किए जा रहे हैं जिनकी संख्या सर्दियों के समय 300 तक हो जाती है। दिल्ली के शेल्टर होम में तकरीबन 1150 से ज़्यादा वर्कर्स केयर टेकर, स्वीपर, गार्ड, रिलीवर आदि के पद पर काम करते हैं। इन शेल्टर होम में लगभग 20,000 तक बेघर एवं बेसहारा लोग रहते है जो मज़दूर वर्ग से आते हैं। साल 2010 में DUSIB एक्ट बना और इसमें पहला संशोधन 2013 में हुआ। इस कानून के अनुसार दिल्ली में कच्ची बस्तियों के पुनर्वास एवं रिलोकेशन के अलावा दिल्ली के शेल्टर होम का संचालन DUSIB के माध्यम से होगा। इधर 5 वर्ष में टेंडर सिस्टम के हिसाब से वर्कर्स की भर्ती होने लगी। यह टेंडर गैर सरकारी संगठनों को दिया जाता था। संस्थाएं बदलती रहती थीं किंतु वर्कर्स वही रहते थे। इस वर्ष अचानक संस्थाओं ने वर्कर्स को निकालना शुरू कर दिया और शेल्टर होम में कार्यरत स्टाफ जो कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स अर्थात ठेका कर्मचारी हैं, को मौखिक रूप से मना कर दिया गया कि 1 सितंबर, 2023 के बाद आप अपनी सेवाए समाप्त कर घर जाओ जबकि सभी कर्मचारी PF, ESI की सुविधा ले रहे हैं।"

शेल्टर होम वर्कर मोना देवी के अनुसार, “कल 18 सितंबर को DUSIB के अधिकारी पुलिस लेकर वर्कर्स को खदेड़ने आए थे लेकिन वर्कर्स ने मिलकर आवाज़ उठाई फिर वो चले गए। अब DUSIB साफ मना कर रहा है कि हम आपको नही रख सकते, ऐसे में अब हम कहां जाए?”

दिल्ली शेल्टर होम वर्कर्स यूनियन से जुड़ी गुलफ्शा का कहना है कि "जब दिल्ली की न्यूनतम मज़दूरी कम थी तब हमें लगातार काम करने का मौका दिया जा रहा था, तब संस्थाएं ज़रूर बदली लेकिन हम सभी वही रहे। आज जब दिल्ली में न्यूनतम मज़दूरी का रेट बढ़ गया तो हमें कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स कह कर भगाया जा रहा है। यह मज़दूरों का घोर अपमान है।"

शेल्टर होम के एक केयर टेकर मोहित कुमार का कहना है कि "आज हमें दिल्ली हाई कोर्ट ने स्टे देकर राहत प्रदान की है और इस फैसले को DUSIB एवं दिल्ली सरकार को मानना होगा।"

अधिवक्ता कवलप्रीत कौर ने बताया कि "दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र कुमार की पीठ ने यह फैसला देकर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को राहत दी है और यह राहत मार्च 2024 तक रहेगी इसके बाद DUSIB और अन्य संस्थाओं के जवाब के बाद अगली सुनवाई होगी।"

लेबर राइट्स एक्टिविस्ट और नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बोंडेड लेबर (NCCEBL) के कन्वीनर निर्मल गोराना अग्नि ने बताया कि दिल्ली की सरकार खुद ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की बात करती है लेकिन इस मामले में दिल्ली सरकार फेल होती नज़र आई है, जो ठेका मज़दूरों के प्रति उसकी असंवेदनशीलता को दर्शाता है। ठेका श्रमिकों को नियमित करने की मांग को लेकर जनसंगठनों की ओर से हम सभी एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा करते हैं।

एडवोकेट विनोद कुमार ने बताया कि "ठेका मज़दूरों एवं कर्मचारियों के मानवाधिकारों का सवाल है, उनके हितों की रक्षा होनी चाहिए।"

शेल्टर होम के कर्मचारी अजय कुमार ने बताया का कहना है, "हम सभी वर्कर्स में से ज़्यादातर बेघर और बेसहारा हैं। DUSIB एक कानून के साथ-साथ बेघर और बेसहारा लोगों के हितों की रक्षा के लिए एक विचारधारा है जिसके मूल को अभी DUSIB एवं दिल्ली सरकार को समझने की आवश्यकता है।

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