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पड़तालः लोकसभा भाषण में प्रधानमंत्री मोदी के दावों की सच्चाई

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के संबंध में कई दावे किए। उन्होंने कहा कि मणिपुर में बंद और ब्लॉकेड अब बीते दिन की बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगरतला उनके कार्यकाल में पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ा है।
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फ़ोटो साभार : संसद टीवी/यूट्यूब

कल गुरुवार, 10 अगस्त को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपना भाषण दिया। वे सदन में दो घंटे से ज्यादा समय तक बोले। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के संबंध में कई दावे किए। उन्होंने कहा कि मणिपुर में बंद और ब्लॉकेड अब बीते दिन की बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगरतला उनके कार्यकाल में पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ा है। पहली बार पूर्वोत्तर में एम्स जैसा संस्थान खुल रहा है। पहली बार मिजोरम को अखिल भारतीय जन संचार संस्थान जैसा इंस्टिट्यूट मिला है और पहली बार मणिपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खुल रही है। इसके अलावा भी बहुत सारे दावे किए हैं। तो क्या लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए ये दावे सही हैं? आइये, पड़ताल करते हैं।

क्या मणिपुर में बंद और ब्लॉकेड बीते दिनों की बात हो चुकी है?

प्रधानमंत्री का ये दावा हैरान करने वाला है। पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले तीन महीने से मणिपुर जल रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अविश्वास प्रस्ताव सत्र के दौरान लोकसभा में अपनी स्पीच में कह रहे हैं कि मणिपुर में बंद और ब्लॉकेड बीते दिन की बात हो चुकी है। 2 जून 2023 को मणिपुर मुख्यमंत्री के कार्यालय से बताया गया कि हिंसा में 98 लोगों की मौत हुई है और 37,450 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। और जून में हिंसा का ये सिलसिला रुक नहीं गया था, ये अभी तक चल ही रहा है। जिसमें ख़बरों के अनुसार 150 लोगों की मौत हो चुकी है, 4000 घरों को तहस-नहस कर दिया गया है, 300 पूजा स्थलों को तोड़ा या जलाया गया है और 60,000 लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। महिलाओं को नग्न करके जुलूस निकाला जा रहा है और गैंगरेप हो रहे हैं। ये वायरल वीडियो आपने देखे होंगे। स्पष्ट है कि मणिपुर में बंद और ब्लॉकेड बीते दिनों की बात होने का प्रधानमंत्री का दावा निराधार एवं गलत है।

क्या अगरतला रेल कनेक्टिविटी से पहली बार भाजपा कार्यकाल में जुड़ा है?

पूर्वोत्तर रेलवे की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार त्रिपुरा में पहली रेलवे लाइन वर्ष 1964 में आई थी। जिसे वर्ष 1990 तक कुमारघाट रेलवे स्टेशन तक विस्तार दिया गया। लेकिन त्रिपुरा की राजधानी अगरतला अभी भी रेल से नहीं जुड़ी थी। अगरतला को पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी से मीटरगेज ट्रैक के जरिये 2008 में जोड़ा गया। लमडिंग से अगरतला तक मीटरगेज रेलवे लाइन के जरिये अगरतला को पहली रेल वर्ष 2008 में मिल पाई थी और इसके साथ ही अगरतला पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे मैप पर आने वाली दूसरी राजधानी बन गया था। इससे पहले असम की राजधानी गुवाहाटी रेल से जुड़ चुकी थी। अगरतला तक ट्रैक बिछाने का काम काफी चुनौतीपूर्ण था। आतंकवाद, मुश्किल पहाड़ी इलाका और प्रतिकूल जलवायु की वजह से इस 109 किलोमीटर के ट्रैक को बिछाने में पंद्रह साल लग गए थे।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रैक बिछाने के दौरान 28 विद्रोही हमले हुए थे, जिसमें ट्रैक बिछाने वाले कर्मियों और गार्डों सहित 36 लोग मारे गए थे। मात्र इतना ही नहीं बल्कि 67 लोगों का अपहरण कर लिया गया था। फिरौती की रकम देने के बाद मात्र 19 व्यक्तियों को छोड़ा गया बाकि के बारे में कोई जानकारी नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस परियोजना को नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया था। वर्ष 2016 में अगरतला को ब्रॉडगेज रेलवे लाइन से जोड़ा गया। जिसकी स्वीकृति वर्ष 1996-97 में प्रदान की गई थी।

उपलब्ध जानकारियों से पता चलता है कि अगरतला वर्ष 2008 में रेलवे मैप पर आ गया था और रेल से जुड़ गया था। मीटरगेज ट्रैक का ब्रॉडगेज ट्रैक में कन्वर्जन वर्ष 2016 में हुआ है। इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा कि अगरतला आज पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ रहा है, भ्रामक है।

क्या मिजोरम में इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन भाजपा कार्यकाल में खुला है?

अखिल भारतीय जन संचार संस्थान की अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार मिजोरम में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन का उद्घाटन 8 अगस्त 2011 को किया गया था।

प्रेस इंफर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक विज्ञप्ति भी इस तथ्य की पुष्टि करती है। विज्ञप्ति के अनुसार 3 नवंबर 2022 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आइजोल में अखिल भारतीय जन संचार संस्थान  का नहीं बल्कि संस्थान की नई इमारत का उद्घाटन किया था। यह संस्थान वर्ष 2011 से विश्वविद्यालय के कैंपस में चल रहा था। यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये दावा कि भाजपा कार्यकाल में पहली बार मिजोरम में अखिल भारतीय जन संचार जैसे संस्थान खुल रहे हैं, भ्रामक है।

क्या पहली बार नॉर्थ-ईस्ट में एम्स जैसा संस्थान खुला है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये दावा सही है कि पूर्वोत्तर को पहला एम्स उनके कार्यकाल में मिला है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2017 को गुवाहाटी में एम्स का शिलान्यास किया था। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री भारती पवार ने सवाल क्रमांक 1404 का राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए 1 अगस्त 2023 को बताया है कि गुवाहाटी एम्स का 91% निर्माणकार्य पूरा हो चुका है। 2020-21 से एमबीबीएस की कक्षाएं एक अस्थायी भवन में शुरू हो चुकी हैं।

एम्स में शिक्षकों और गैर-शिक्षकों के पदों की स्थिति के बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री भारती पवार ने राज्यसभा में 15 मार्च 2022 को एक सवाल का लिखित जवाब दिया था। जिसके अनुसार गुवाहाटी एम्स में फैकल्टी के 183 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 21 पद ही भरे गए हैं। सीनियर रेजिडेंट के 40 पद स्वीकृत हं जिनमें से 7 भरे गए हैं। जूनियर रेजिडेंट के 40 पद स्वीकृत हैं जिनमें से एक भी नहीं भरा गया है। गैर-शिक्षकों के 1018 पद स्वीकृत हैं जिनमें से मात्र 7 पद ही भरे गए हैं।

हालांकि ये संस्थान स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।लेकिन प्रधानमंत्री का ये दावा सही है कि उनके कार्यकाल में पूर्वोत्तर को पहला एम्स मिला है।

क्या मणिपुर में देश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खुल रही है?

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में मणिपुर में पहली नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खोली गई है। प्रधानमंत्री का ये दावा सही है। नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार,16 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर, इंफाल में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी थी। फिलहाल यह खुमान लैंपक स्पोर्टस काम्पलेक्स की इमारत में चल रही है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं।)

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