Skip to main content
xआप एक स्वतंत्र और सवाल पूछने वाले मीडिया के हक़दार हैं। हमें आप जैसे पाठक चाहिए। स्वतंत्र और बेबाक मीडिया का समर्थन करें।

केन्याई स्वास्थ्यकर्मी नई लड़ाई की कर रहे तैयारी 

श्रमिकों की मांगों में स्थायी कामकाजी हालात और बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर आय की मांग शामिल है। वे ऐसे समय में लामबंद हो रहे हैं जब सरकार स्वास्थ्य देखभाल सुधार के एक बेहद अलोकप्रिय दौर को लागू करने की तैयारी कर रही है।
Kenya

केन्या में विलियम रूटो की सरकार ने केन्या मेडिकल प्रैक्टिशनर्स, फार्मासिस्ट और डेंटिस्ट यूनियन (केएमपीडीयू) के डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा उठाई गई शिकायतों को दूर करने का एक और अवसर गंवा दिया है। जब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, स्वास्थ्य क्षेत्र में ट्रेड यूनियन के सदस्य अपनी नौकरियां छोड़ने की योजना बना रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के लिए स्थिर रोजगार की स्थिति सुनिश्चित करे, देश भर के सार्वजनिक अस्पतालों में मेडिकल इंटर्न रखने के अपने दायित्व को पूरा करे और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लायक भुगतान करे।

श्रमिकों की कार्रवाई स्वास्थ्य सेवा सुधार की पृष्ठभूमि में सामने आ रही हैं, जिसकी स्वास्थ्य कर्मियों ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा लगाई गई शर्तों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत से हासिल किए गए अधिकारों के नुकसान के रूप में आलोचना की है। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को सामाजिक स्वास्थ्य बीमा कोष (एसएचआईएफ) में बदलना शामिल है, यह कदम सरकार ने व्यापक विरोध और कानूनी चुनौतियों के बावजूद लागू किया है।
पीपल्स हेल्थ मूवमेंट (पीएचएम) केन्या के डैन ओवाला ने पीपल्स हेल्थ डिस्पैच को बताया कि हालांकि राष्ट्रीय बीमा मॉडल सही नहीं था - पूरी आबादी के लिए कवरेज का विस्तार किए बिना निजी प्रदाताओं का पक्ष लेना - एसएचआईएफ सभी पर अग्रिम कर लगाकर एक कदम आगे का बढ़ना है, वह भी उनकी समग्र आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना ऐसा किया गया है। यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले या अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले, प्रति दिन 1 अमेरिकी डॉलर से कम पर गुजारा करने वालों पर भी कर लगेगा।

टैक्स इकट्ठा करने के लिए, सरकार वेतनभोगी श्रमिकों से परे अपनी पहुंच का विस्तार कर रही है, जिसमें अन्य लोगों को भी शामिल किया जा रहा है, मोबाइल मनी लेनदेन के आधार पर आय की स्थिति निर्धारित करने के लिए फोन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें विदेश में परिवार के सदस्यों के भेजा गया धन भी शामिल है। यह तरीका संदिग्ध है।

इस बात की भी चिंता है कि नवीनतम स्वास्थ्य देखभाल सुधार पैकेज, जो दो अतिरिक्त फंड पेश करता है - प्राथमिक हेल्थकेयर फंड और आपातकालीन, क्रोनिक और गंभीर बीमारी फंड - वास्तव में कवरेज बढ़ाए बिना हेरफेर और भ्रष्टाचार के और अवसर पैदा कर सकता है।

ओवाला कहते हैं, "यह ऐसा है जैसे विश्व बैंक और आईएमएफ ने खुद ही ये कानून लिखे हैं।" 

केन्या में आईएमएफ कर्ज़ के परिणाम भयानक रहे हैं, आईएमएफ के प्रति देश का कर्ज़ 3.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें केवल जनवरी 2024 में दिया गया 940 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक कर्ज़ शामिल है। इन कर्ज़ों से जुड़ी नीतियों ने गरीब और श्रमिक वर्ग के समुदायों को असंगत रूप से प्रभावित किया है, जिससे मुख्य खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य सामग्रियों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे 73 फीसदी केन्यावासी गंभीर वित्तीय संकट में हैं।

इस वित्तीय तनाव ने स्वास्थ्य सेवा सहित सार्वजनिक सेवाओं को भी प्रभावित किया है, जिससे स्वास्थ्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। केएमपीडीयू की मुख्य मांगों में से एक, मेडिकल इंटर्न रखने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्रालय पर आती है, लेकिन इसे पर्याप्त वित्तीय धनराशि के साथ ही पूरा किया जा सकता है, जो नहीं किया जा रहा है।

स्वास्थ्य देखभाल के विकेंद्रीकरण से स्थिति और भी गंभीर हो गई है, काउंटी सरकारें कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन उन्हें कुल केंद्रीय स्वास्थ्य बजट का लगभग 35 फीसदी ही मिलता है। उनसे खास स्वास्थ्य मुद्दों जैसे तपेदिक या एचआईवी/एड्स में रुचि रखने वाले विभिन्न दानदाताओं के माध्यम से शेष धनराशि जुटाने की उम्मीद की जाती है।

ओवाला बताते हैं की, "राजकोष को लगता है कि दानदाताओं से बहुत सारा पैसा आ रहा है, लेकिन दानकर्ता स्वास्थ्य कार्यबल को धन नहीं देते हैं।" व्यवहार में, इसका मतलब है कि स्वास्थ्य कार्यबल के लिए पैसा किसी भी स्रोत से नहीं आ रहा है: अधिकांश दानदाताओं को यह मद फंडिंग के लिए पर्याप्त महत्वपूर्ण नहीं लगता है, जबकि केंद्र सरकार को उम्मीद है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को कहीं और संसाधन मिलेंगे। 

दानदाताओं के सीन से गायब होने की भी संभावना है क्योंकि उनकी रुचि कहीं और स्थानांतरित हो गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बेहद अनिश्चित स्थिति में आ जाती हैं - जिसे केवल समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के लिए पर्याप्त केंद्रीय धन आवंटित करके ही टाला जा सकता है। इसके विपरीत, केन्या में स्वास्थ्य सेवाएं वर्तमान में परियोजना कार्यान्वयन के समान हैं, जहां काउंटी स्वास्थ्य प्रदाताओं से धन की एक नई किश्त हासिल करने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है।

केंद्रीय वित्त पोषण की कमी और प्रतिगामी स्वास्थ्य सुधार का लिंडा मामा जैसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है। कार्यक्रम मूल रूप से 2016/2017 में शुरू किया गया था, जो 2010 के दशक की शुरुआत में मातृत्व देखभाल को मजबूत करने के प्रयासों पर आधारित था। लिंडा मामा का मुख्य उद्देश्य मातृ स्वास्थ्य में सुधार करना था, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कोष द्वारा कवर नहीं किए गए लोगों के लिए मातृत्व सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना भी शामिल था। कार्यक्रम ने इस क्षेत्र में कुछ प्रगति हासिल करने में मदद की, लेकिन, जैसा कि ओवाला बताते हैं, अनौपचारिक गर्भपात की संख्या को कुछ हद तक कम करने में भी मदद की।

एसएचआईएफ को छात्रों के लिए स्वास्थ्य लाभ पैकेज, लिंडा मामा और एडुअफ्या के दायरे को संभालना है, फिर भी इसे कैसे लागू किया जाएगा, इस पर संदेह बना हुआ है। ओवाला कहते हैं, ''हमने जो भी लाभ कमाया है, हम उसे उलट रहे हैं।''

पीपल्स हेल्थ डिस्पैच पीपुल्स हेल्थ मूवमेंट और पीपल्स डिस्पैच द्वारा प्रकाशित एक पाक्षिक बुलेटिन है। अधिक लेखों के लिए और पीपल्स हेल्थ डिस्पैच की सदस्यता लेने के लिए, यहां क्लिक करें।

अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।

टेलीग्राम पर न्यूज़क्लिक को सब्सक्राइब करें

Latest