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लोकतंत्र की शान जानिए, अपने वोट की पॉवर पहचानिए

25 जनवरी यानी राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस को भारत के मतदाताओं को लोकतंत्र में विश्‍वास रखते हुए यह प्रण अवश्‍य करना चाहिए कि वे देश के स्‍वतंत्र, निष्‍पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने और लोकतंत्र तथा लोकतांत्रिक मूल्‍यों को बचाने के लिए जागरूक बनेंगे और अपने वोट का इस्‍तेमाल बहुत सोच-समझ कर करेंगे।
National Voter's Day
फ़ोटो साभार : Great Telangaana

युवा मतदाताओं को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने हेतु प्रोत्‍साहित करने के लिए देश में हर साल 25 जनवरी को ''राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस'' के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि भारतीय निर्वाचन आयोग के स्‍थापना दिवस के उपलक्ष्‍य में 25 जनवरी 2011 से इसकी शुरूआत की गई।

प्रत्‍येक नागरिक का वोट ही देश के भविष्‍य की नींव रखता है। हर व्यक्ति का वोट राष्‍ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है। इसलिए धर्म, नस्‍ल, जाति, समुदाय, संप्रदाय, भाषा, क्षेत्र आदि से प्रभावित हुए बिना निष्‍पक्ष और निर्भीक रूप से मतदान करने का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन भारत के प्रत्‍येक नागरिक को अपने राष्‍ट्र के प्रत्‍येक चुनाव में भागीदारी की शपथ लेनी चाहिए।

क्‍या है राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस 2024 की थीम?

इस वर्ष की थीम है 'हर वोट को गिनना कोई भी पीछे छूटे न'। यह विषय समावेशी और सुलभ चुनावों के महत्‍व पर जोर देता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्‍येक मतदाता को अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर अवश्‍य मिले। यह मतादाताओं और चुनावी प्रक्रिया के बीच अंतर को पाटने, देश के हर कोने तक भारतीय निर्वाचन आयोग को पहुंचने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

क्‍या हैं राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस के उद्देश्‍य?

इसका प्रमुख उद्देश्‍य देश के मतदाताओं को जागरूक करना है। खास तौर से उन युवाओं के लिए जो पहली बार मतदान करने वाले हैं। उन्‍हें मतदान के महत्व के बारे में बताना व मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रियाओं की जानकारी देना। मतदाता सूची में अपना नाम चेक करना, मतदान केंद्र पर जाकर मतदान करना आदि के बारे में जागरूक करना है। इसके लिए निर्वाचन आयोग टीवी, रेडियो, समाचापत्रों और सोशल मीडिया के माध्‍यम से जागरूकता फैलाता है।

इसका उद्देश्‍य समावेशी राजनीति को भी बढ़ावा देना है। यह जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति की परवाह किये बिना सभी को वोट डालने का समान अधिकार देना है। इसके लिए मतदाताओं को प्रोत्‍साहित करना है। लोकतंत्र में मतदान एक पर्व की तरह है और इस भारत पर्व को मतदाताओं को बहुत ही सूझ-बूझ और हर्षोल्‍लास से मनाना चाहिए।

इस दिन का उद्देश्‍य लोकतांत्रिक मूल्‍यों को प्रोत्‍साहित करना भी है। देश के सभी पात्र नागरिक अपना वोट देकर अपनी सरकार चुनते हैं। इसलिए बिना किसी भी प्रकार के भेदभाव के देश के हर नागरिक के वोट का मूल्‍य समान होता है। लोकतांत्रिक मूल्‍यों को बचाने के लिए मतदान अवश्‍य करना चाहिए। देश के हर पात्र नागरिक को मतदान करने की शपथ लेनी चाहिए।

निर्वाचन आयोग मतदाताओं को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाता है ताकि हर मतदाता मतदान के महत्‍व को समझ सके और सर्वोत्‍तम उम्‍मीदवार के लिए अपना वोट करे।

मतदाताओं को प्रलोभन से बचना जरूरी

आज की राजनीति मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ चुकी है। इसलिए लोग इसे 'डर्टी पोलिटिक्स' भी कहने लगे हैं। आज राजनीति तिजारत हो गई है। इसलिए अधिकांश लोग जनहित के लिए नहीं बल्कि स्‍वहित के लिए राजनेता बनते हैं। इसमें 'इन्‍वेस्‍ट' करते हैं और फिर करोड़ों का लाभ कमाने की चाह रखते हैं। अत: ऐसे लोगों का लक्ष्‍य ऐन-केन-प्रकारेण सत्ता हथियाना रह गया है। इसके लिए ये मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं। मुफ्त की रेवडि़यां बांटते हैं। जो लोग अपना धन खर्च करके आपका वोट खरीदते हैं उनके सत्ता में आने पर आप उनसे जनकल्‍याण जनहित की उम्‍मीद कैसे कर सकते हैं।

राजनीति का बिजनेस करने वाले नेता मतदाताओं को लुभाने में माहिर होते हैं। वे लोक लुभावन वादे करते हैं। तरह-तरह के जुमले उछालते हैं। अपनी बातों से मतदाताओं को इस तरह प्रभावित कर देते हैं कि मतदाताओं को उनमे जननायक की छवि दिखने लगती है। और मतदाता अपना कीमती वोट उनकी झोली में डाल देते हैं।

सत्ता हथियाने के लिए स्‍वहितकारी नेता साम-दाम-दंड-भेद सारे हथकंडे अपनाते हैं। वे जाति और संप्रदाय के नाम पर वोट मांगते हैं। धर्म, लिंग, भाषा और क्षेत्रीयता के नाम पर वोट मांगते हैं। अपने प्रतिद्विंदी नेता या राजनीतिक दल की कमियां बता कर उन पर तरह-तरह के आरोप लगाकर वोट मांगते हैं। वे लोगों की धार्मिक आस्‍था को भी भुनाने में माहिर होते हैं। वे भगवान, देवी-देवताओं, मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट मांगते हैं। वे मतदाताओं को मुफ्त अनाज देकर भी उनका वोट हथिया लेते हैं। वे हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत फैला कर जन भावनाओं के आहत होने के नाम पर मतदाताओं को भावुक कर वोट मांगते हैं। इसके लिए हिंदू-मुस्लिम दंगा तक करवा देते हैं। और मतदाताओं की भावनाओं को भड़का कर अपना उल्‍लू सीधा करते हैं।

लोकतंत्र को भाता जागरूक मतदाता

एक बार यदि लालची लोगों के हाथ में सत्ता आ जाए तो फिर ये खुद को राजा समझने लगते हैं और जनता को दासी। फिर ये अपनी मनमानी करने लगते हैं। अपनी सोच और भावनाओं को जनता पर थोपने लगते हैं। करते अपने मन की हैं लेकिन जनता को बदनाम करते हैं।

जनता यानी मतदाता अपना वोट ऐसे राजनीतिक चुनने के लिए करता है जो उसके कल्‍याण के लिए काम करे। उसकी बुनियादी समस्‍याओं को हल करने का काम करे। महंगाई को नियंत्रित करे। बेरोजगारी को ख़त्‍म करे। सस्‍ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रावधान करे। जन-स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सस्‍ते और अच्‍छे अस्‍पताल, स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र मुहैया कराए।

पर नेता इन बुनियादी मुद्दों के लिए काम न करके मतदाताओं का ध्‍यान भटकाने के लिए आतंकवाद, मंदिर-मस्जिद को मुद्दा बना देते हैं। सिटिजन एमेंडमेंट एक्‍ट (सीएए), नेशनल रेजिस्‍टर ऑफ सिटिजन(एनआरसी) और यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को मुद्दा बना देते हैं।

यहां मतदाता को अपने विवेक से काम लेने की जरूरत होती है। उसे यह पहचान करनी होती है कि कौन नेता या रानजीतिक दल उनके बुनियादी मुद्दे उठा रहा है और कौन केवल उनका वोट लेने के लिए लोक लुभावन भाषण दे रहा है। यही क्षीर-नीर विवेक मतदाता में होना चाहिए। उसे काफी सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि उसे अपने मताधिकार का सही उपयोग करने के लिए जागरूक होना चाहिए। यही हमारा लोकतंत्र हम से उम्‍मीद करता है। क्‍योंकि जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र को सशक्‍त करते हैं। इसी वर्ष यानी 2024 में आम चुनाव हैं। इसलिए निष्‍पक्ष रहिए, सतर्क रहिए और समझदारी से अपने मत का इस्‍तेमाल कीजिए। यही राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस की सार्थकता है।

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