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यूपीः काशी द्वार योजना के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़‍िलाफ़ संयुक्त किसान मजदूर मोर्चा ने किया विरोध प्रदर्शन

"बनारस जिला प्रशासन ने जिन गांवों में जमीनों के अधिग्रहगण की योजना बनाई गई है वहां कई उच्च जातियों के बड़े किसान भी हैं लेकिन उनकी जमीनें जानबूझकर छोड़ दी गई हैं। इससे सरकारी नुमाइंदों की बद्नीयती की पता चलता है।"
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कड़ाके की ठंड के बावजूद बनारस के पिंडरा इलाके के किसानों ने पैदल मार्च निकालकर काशी द्वार योजना का कड़ा विरोध किया। किसानों के कहना है कि आवासीय परियोजना से प्रभावित होने वाले अधिसंख्य छोटी जोत के किसान हैं। जमीनें छिन जाएगी तो उनके सामने भूख से मरने की नौबत आ जाएगी। संयुक्त किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में शामिल किसान मोदी-योगी सरकार के ख़ि‍लाफ़ नारेबाजी कर रहे थे।

काशी द्वार योजना के लिए योगी सरकार ने बसनी, बेलवा, बहुतरा, पिंडरा, पिंडराई, समोगरा, कैथौली, जद्दूपुर, चकइन्दर और रघुनाथपुर के सैकड़ों किसानों की करीब 957 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इस परिजोजना से प्रभावित होने वाले 90 फीसदी किसान छोटी जोत वाले हैं। बाकी मझोले किसान हैं। इस जमीन पर बहुफसली खेती होती है। हाईकेट काशी द्वार योजना से प्रभावित होने वाले लोगों में अधिसंख्य दलित और पिछड़ी जाति के हैं।

काशी द्वार योजना में 96 फीसदी जमीनें कमेरा समाज की है जिन्हें बीजेपी का वोटबैंक माना जाता है। इस योजना को निरस्त करने की मांग को लेकर किसानों ने पिंडरा इलाके के रमईपुर गांव से मार्च निकाला। कड़ी ठंड के बावजूद किसानों का जत्था उत्तर प्रदेश किसान सभा के बैनर तले नारेबाजी करते हुए पिंडरा की ओर कूच किया। किसानों के मार्च में महिलाएं भी शामिल थीं। पिंडरा के तहसीलदार मार्च निकाले जाने से पहले रमईपुर पहुंच गए। वह चाहते थे कि किसान उन्हें मांग-पत्र सौंपकर लौट जाएं। किसानों ने तहसील के आग्रह को विनम्रता पूर्वक टाल दिया। दोपहर में किसानों का मार्च रमईपुर गांव से होकर पिंडरा तहसील परिसर में पहुंचा।

काशी द्वार योजना का विरोध क्यों

वहां किसानों की जनसभा को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान नेता रामजी सिंह ने कहा, "उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने काशी द्वार योजना के लिए उस इलाके के किसानों की जमीनों के अधिग्रहण की योजना बनाई है जिनकी जोत बहुत छोटी हैं। इस योजना का खाका इस तरह से खींचा गया है ताकि सिर्फ दलित और पिछड़ी जाति के लोग इसके जद में आएं। काशी द्वार योजना के लिए आखिर बड़े किसानों की जमीनों का अधिग्रहण क्यों नहीं किया जा रहा है। जमीनों के छोटे टुकड़े से ही किसानों की आजीविका चलती है। बेलवां गांव में मुसहर और नट समुदाय की जमीनों के अधिग्रहण की योजना क्यों बनाई गई है?"

किसान नेता फतेह नारायण सिंह ने काशी द्वार योजना के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए आरपार की लड़ाई का आह्वान करते हुए कहा, "बनारस जिला प्रशासन ने जिन गांवों में जमीनों के अधिग्रहण की योजना बनाई गई है वहां कई उच्च जातियों के बड़े किसान भी हैं लेकिन उनकी जमीनें जानबूझकर छोड़ दी गई हैं। इससे सरकारी नुमाइंदों की बद्नीयती की पता चलता है। बनारस के कलेक्टर इस बात का जवाब दें कि सामंती किसानों की जमीनों को इस योजना में क्यों शामिल नहीं किया गया है। हाईवे के किनारे बड़े किसानों की जमीनें आखिर क्यों अधिग्रहीत नहीं की जा रही हैं? पहले गरीब लोगों को और गरीब बनाने की यह योजना किसी के गले से नीचे नहीं उतर रही है।"

‘जान दे देंगे,पर जमीन नहीं’

आंदोलनकारी किसानों का नेतृत्व कर रहे प्रेम कुमार नट, अजित कुमार और नंदाराम शास्त्री ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "किसान अपनी जमीन कतई नहीं देंगे क्योंकि अधिग्रहण होने के बाद उनके पास एक इंच जमीन नहीं बचेगी। इस योजना से पहले इलाके के तमाम किसानों की जमीनें बाबतपुर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और सांस्कृतिक संकुल लिए अधिग्रहित की जा चुकी हैं। ऐसे में एक ही इलाके में जमीनों का अधिग्रहण न्यायोचित नहीं है। काशी द्वार योजना से प्रभावित किसान अपनी जान दे देंगे लेकिन जमीन हरगिज नहीं देंगे।"

भूमि अधिग्रहण के खिलाफ निकाले गए मार्च में पिंडरा, पिंडराई, समोगरा, बेलवा, पुरारघुनाथपुर आदि गांवों के किसान शामिल हुए। किसानों ने किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देने की बात कही और बाद में राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि को संबोधित पत्रक तहसीलदार को सौंपा।

कैसी होगी काशी द्वार योजना?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिंडरा इलाके में काशी द्वार योजना के तरह हाईटेक सिटी बसाने की कार्य योजना बनाई है। माना जा रहा है कि इस योजना से सिर्फ बनारस ही नहीं, जौनपुर के लोग लाभान्वित होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि काशी द्वार हाईटेक सिटी बाबतपुर एयरपोर्ट के करीब होने से ज्यादातर लोग लाभान्वित होंगे। इस योजना पर करीब 6964.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें से 4961.17 करोड़ रुपये किसानों को जमीन के मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा 2003.01 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च होंगे। किसानों को वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

काशी द्वार हाईटेक आवासीय योजना के लिए दस गांवों की करीप 957 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस आवासीय योजना को काशीद्वार भूमि विकास गृहस्थान योजना के नाम से जाना जाएगा। आवास विकास की जीटी रोड योजना के लिए नए मार्ग के निर्माण को भी शासन ने मंजूरी दी है। आवासीय योजना के प्लाट के शुरुआती रेट तय कर दिए गए हैं। इस योजना में 40215 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से प्लॉट बेचने के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। हालांकि भविष्य में लागत घटने या बढ़ने पर दरें संशोधित की जा सकती हैं।

वाराणसी में हाईटेक आवासीय योजना के लिए समोगरा के 71, कैथौली के 123, चकइन्दर के 112, पिंडरा के 417, बेलवां के 249, पिंराराई के छह, पुरा रघुनाथपुर के 115 बसौली के 152, बहुतरा के 203, जद्दूपुर के 124 सहित कुल 1572 खसरों की जमीन योजना के लिए ली जाएगी। इसमें से 45.419 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज की भी है। वहीं आवास विकास जीटी रोड बाईपास योजना को एक नए मार्ग से जोड़ेगा। जिसमें निबिया गांव से 26 भूखंड की 4.8410 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी।

यूपी आवास विकास परिषद के अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण के मुताबिक, "काशीद्वार योजना को शासन ने मंजूरी दे दी है। यह योजना हाईटेक होगी जिसमें कई सुविधाएं विकसित करने के लिए रोडमैप तैयार कर लिया गया है। सरकार की प्राथमिकता के मुताबिक इस योजना को लालबहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बिल्कुल करीब बनाया गया है। यहां बनारस के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर की दूरी तीस किमी और कैंट रेलवे स्टेशन की दूरी 25 किमी है।"

(लेखक बनारस के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।)

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