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यूपी: कांवड़ यात्रा के बहाने मुस्लिमों को टारगेट? शक के आधार पर 90 मीट व्यापारियों पर धारा 151 के तहत चालान

सावन का महीना शुरु होने को है, और इससे पहले कांवड़ यात्रा भी शुरु हो गई है। इसे लेकर यूपी सरकार ने मीट की दुकानों को बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब पुलिस प्रशासन गोकशी के शक में मीट व्यापारियों को गिरफ़्तार कर रही है।
Kanwar Yatra
प्रतीकात्मक तस्वीर। PTI

धार्मिक आयोजनों के नाम पर दूसरे धर्म के लोगों को टारगेट करना, उनके व्यापार पर चोट करना और उन्हें डराना-धमकाना उत्तर प्रदेश में रुक नहीं रहा है। यहां हैरान करने वाली बात ये है कि ऐसे कारनामें ख़ुद पुलिस कर रही है।

दरअसल सावन का महीना शुरु हो रहा है, तो कांवड़ यात्रा निकलना भी लाज़मी है। ऐसे में प्रदेश की पुलिस अचानक से धर्म को बचाने निकल पड़ी है। और धर्म को बचाने वाले इस अभियान में अभी तक मुज़फ्फरनगर के 90 लोगों का चालान किया जा चुका है।

मामला क्या है?

बीते जून महीने में कांवड़ यात्रा को लेकर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की बैठक हुई थी, इस बैठक में पूरे जनपद से मीट सप्लायर से संबंधित खाद्य व्यापारियों को भी बुलाया गया था। इस दौरान ज़िला मजिस्ट्रेट ने व्यापारियों को आदेश दिया था कि 1 जुलाई से 17 जुलाई तक मीट की सभी दुकाने बंद रहेंगी।

मामला यहां तक तो ठीक था, मग़र अब महज़ इस शक की बिना पर कि मीट व्यापारी गोकशी का धंधा कर रहे हैं, ऐसे में करीब 90 व्यापारियों का चालान धारा 151 के तहत काट दिया गया। इसके बाद धमकी दी गई है कि पूरे मुज़फ्फरनगर में 500 लोगों को चिन्हित किया गया है, जिन पर कार्रवाई होगी। और ये अभियान कांवड़ यात्रा तक चलता रहेगा।

इस बात की जानकारी ख़ुद पुलिस अधिकारी की ओर से दी गई है...

अब सवाल ये उठता है कि अगर पुलिस प्रशासन को गोकशी का शक था, तो कांवड़ यात्रा का इंतज़ार क्यों कर रहे थे, क्योंकि प्रदेश में तो गोकशी हर हाल में ग़ैर कानूनी है।

दूसरी बात ये कि पुलिस की ओर से कहा जा रहा है कि ये अभियान तब तक चलेगा जब तक कांवड़ यात्रा चलेगी।

पुलिस प्रशासन की ये दोनों कंडीशन उसकी गंभीरता को कटघरे में खड़ा करती है।

धारा 151 क्या है?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 में अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी का प्रावधान मिलता है। धारा 151 के मुताबिक कोई पुलिस अधिकारी जिसे किसी संज्ञेय अपराध करने की परिकल्पना का पता है, ऐसी परिकल्पना करने वाले व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेशों के बिना और वारंट के बिना उस दशा में गिरफ्तार कर सकता है जिसमें ऐसे अधिकारी को प्रतीत होता है कि उस अपराध का किया जाना अन्यथा नहीं रोका जा सकता।

इस धारा का मतलब जानने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापारियों पर वही धारा लगाई गई है, जिसमें उन्हें बग़ैर किसी वारंट के कभी भी गिरफ्तार किया जा सके।

वैसे तो पुलिस की ओर से गिरफ्तारी की बात नहीं कही गई है लेकिन द रिपोर्ट हिंदी के एडिटर, फाउंडर और पत्रकार वसीम अकरम त्यागी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिन 90 लोगों का चालान काटा गया है, उन्हें 151 के तहत जेल भेज दिया गया है।

वसीम अकरम त्यागी अपने ट्वीट में लिखते हैं कि कांवड़ यात्रा के मद्देनज़र मुजफ्फरनगर पुलिस ने 90 ऐसे लोगों को थाने बुलाया जो गोश्त के व्यापार से जुड़े थे। इनमें हो सकता है कि कोई गोकशी के अपराध में लिप्त रहा हो, लेकिन ऐसा नहीं है कि सबके सब गोकशी में लिप्त हैं। बावजूद इसके पुलिस ने 151 के तहत जेल भेज दिया। जेल भेजने की वजह तो और भी अजीब है! पुलिस को लगता है कि ये लोग गोकशी कर सकते हैं! इसलिए इनके ख़िलाफ कार्रवाई की गई है, वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान यह अभियान चलेगा और अभी 500 लोगों पर इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। गजब है न!

वसीम अकरम त्यागी के ट्वीट से ये साफ है कि जिन 90 लोगों के खिलाफ चालान बनाया गया है, उनकी गिरफ्तारी भी हुई है, लेकिन पुलिस की ओर से ये खुलासा नहीं किया गया। हालांकि पुलिस ने इतना ज़रूर साफ कर दिया है कि कांवड़ यात्रा चलने तक कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा।

आपको बता दें कि कांवड़ यात्रा शुरु होने से पहले प्रदेश सरकार ने ये आदेश जारी किया था कि "कांवड़ भक्तों की आस्था का सम्मान करते हुए, कांवड़ यात्रा मार्ग पर कहीं भी खुले में मांस की बिक्री और खरीद नहीं होनी चाहिए। यात्रा मार्ग पर सफाई-स्वच्छता बनाए रखी जानी चाहिए।" इसके अलावा मार्ग में पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी। यह भी कहा गया कि "भीषण गर्मी को देखते हुए रास्ते में पीने के पानी की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जहां भी भोजन शिविर लगाए जाएं, टीम को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।"

भले ही सरकार और पुलिस ऐसे आदेश जारी करे, लेकिन सीधे तौर पर ऐसी सख्ती का असर लोगों के रोज़गार पर पड़ता है, इसके अलावा एक समाज के मन में ख़ुद को अलग-थलग देखने वाला नज़रिया पैदा होने लगता है। और मौजूदा वक्त में योगी सरकार फिलहाल यही करती दिखाई दे रही है, जिसके लिए उसने एक धार्मिक आयोजन को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की है।

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