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बिहार : इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौतों का सिलसिला जारी

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और कुछ अन्य बीमारियों से अब तक 50 से ज़्यादा बच्चों की मौत की ख़बर है। हालांकि सरकारी तौर पर अभी केवल 11 मौतों की पुष्टि की गई है।
Bihar Children
प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार में उमस भरी गर्मी के बीच मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के इलाकों में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। मौसम की तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण संदिग्ध एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और कुछ अन्य बीमारियों से अब तक 50 से ज़्यादा बच्चों की मौत की ख़बर है। हालांकि सरकारी तौर पर अभी केवल 11 मौतों की पुष्टि की गई है।

स्थानीय लोग इस बीमारी को चमकी बुखार या दिमागी बुखार के रूप में जानते हैं

हर साल गर्मी और बारिश के मौसम के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश विशेषकर गोरखपुर की तरह उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुरपूर्वी चंपारणपश्चिम चंपारणशिवहरसीतामढ़ी व वैशाली में इंसेफेलाइटिस बीमारी का प्रभाव दिखता है।

पीड़ित बच्चों का मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल मातृ सदन (अस्पताल) में भर्ती होने का सिलसिला जारी है। इन बच्चों में आमतौर पर ग्रामीण गरीब तबके के बच्चे हैं।

हालांकि डॉक्टर सीधे तौर पर अभी सभी मौतों का कारण इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम नहीं मान रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है। 

केजरीवाल अस्पताल में भी चमकी बुखार से पीड़ित 39 बच्चों को भर्ती किया गयाजिसमें से चार बच्चों की मौत हो गई। सात बच्चों का अभी भी इलाज चल रहा है। 
एसकेएमसीएच में चिकित्सकों एवं कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। उमस भरी गर्मी के कारण ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले पर नजर रख रहा है। बरसात से पहले ये बीमारी हर साल बिहार में कहर बरपाती है। इसकी पूरी जांच की जा रही है। 

उन्होंने कहा, "लोगों को इस बीमारी को लेकर जागरूक कराना होगा। हर साल बच्चे काल की गाल में समा जा रहे हैं। ये चिंता का विषय है।"

इस बुखार के मुख्य लक्षण

चिकित्सकों के मुताबिकइस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखारउल्टी-दस्तबेहोशी और शरीर के अंगों में रह-रहकर कंपन (चमकी) होना है।  इस बीमारी की जांच के लिए दिल्ली से आई नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीम तथा पुणे के नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की टीम भी मुजफ्फरपुर का दौरा कर चुकी है।

इस साल की शुरुआत मेंराज्य सरकार ने इंसेफेलाइटिस के खिलाफ हजारों बच्चों को कवर करने के लिए एक विशेष टीकाकरण अभियान भी शुरू किया।

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