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मध्य प्रदेश में दलित किशोर की हत्या, बहन के यौन उत्पीड़न के मामले में मां को भी किया गया निर्वस्त्र

पुलिस ने बताया कि सागर जिले में 2019 में उसकी बहन द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में एक दलित व्यक्ति को सैकड़ों लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला। उसकी बहन को भी पीटा गया और जब उसकी मां ने अपने बेटे को हमलावरों से बचाने की कोशिश की तो उसे निर्वस्त्र कर दिया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : Huffpost.Com

"मध्य प्रदेश के सागर जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां बेटी के यौन उत्पीड़न की शिकायत पर मां को निर्वस्त्र किया गया। वहां दलित शख्‍स की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्‍या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि सागर जिले में 2019 में उसकी बहन द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में एक दलित व्यक्ति को सैकड़ों लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला। उसकी बहन को भी पीटा गया और जब उसकी मां ने अपने बेटे को हमलावरों से बचाने की कोशिश की तो उसे निर्वस्त्र कर दिया गया।"

मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले का है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर 18 साल के इस युवक को डंडों से पीट पीट कर मार दिया, उसकी मां को निर्वस्त्र कर दिया, उसकी बहन को भी पीटा और मकान में तोड़फोड़ भी की है। घटना 24 अगस्त की है। पुलिस ने मीडिया को बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जिसमें 9 लोगों के खिलाफ हत्या की कोशिश और 3 के खिलाफ एससी/एसटी कानून के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं। 8 को गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव उइके ने बताया कि 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 18 वर्षीय पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग 2019 के मामले में समझौता करने के लिए उस पर दबाव डाल रहे थे और इसके कारण उन पर हमला हुआ।

हमें बेपर्दा कर दिया...

एनडीटीवी के अनुसार, दिल दहला देने वाली घटना के बारे में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई लड़की की मां ने बताया, "उन्होंने उसे (बेटा) बहुत पीटा। वह बच नहीं सका। हमें बेपर्दा कर दिया। मुझे निर्वस्त्र कर दिया गया। फिर पुलिस वाले आए और मुझे एक तौलिया दिया गया। मैं वहां तौलिया से अपने तन को ढक कर खड़ी रही, जब तब मुझे एक साड़ी नहीं दी गई।" उन्होंने कहा कि भीड़ ने उनके घर में भी तोड़फोड़ की। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, "घर का कोई भी सामान साबूत नहीं बचा है। यहां तक ​​कि पक्की छतें भी टूट गईं। फिर वे दो और भाइयों की तलाश में दूसरे घर में गए।" पीड़िता की चाची ने कहा कि कुछ लोग जबरदस्ती उनके घर में भी घुस गए और उनके पति और बच्चों को धमकाया। उन्होंने दावा किया, "उन्होंने मेरे बच्चों और पति को भी मार डाला होता। वे हमारे घर में घुसे और उन्होंने हमारा फ्रिज भी चेक किया। हम बेहद डर गए थे। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।"

2019 में पीड़िता ने लगाए थे धमकी देने और पीटने के आरोप

घटना के बाद गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है। पुलिस ने बताया कि जिला कलेक्टर द्वारा सरकारी योजनाओं के तहत मदद का आश्वासन देने और गिरफ्तारी की सूचना देने के बाद पीड़ित परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया। अधिकारी ने बताया कि 2019 में पीड़िता की बहन ने धमकी देने और पीटने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था और इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो मामला अदालत में है।

पूरे परिवार पर हमला

2019 में मृतक की बहन ने चार लोगों के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. मामले में अभी भी एक स्थानीय अदालत में सुनवाई चल रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह आरोपी लगातार इस परिवार पर शिकायत को वापस ले लेने का दबाव डाल रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर छपे मृतक के भाई के बयान के मुताबिक सभी आरोपी कथित "ऊंची जाति" के थे और उनका संबंध पूर्व सरपंचों के परिवार से है।

कांग्रेस ने की आलोचना तो भाजपा बोली त्वरित कार्रवाई की

मध्‍य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में इस घटना से राज्य में राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। इस घटना को लेकर विपक्षी कांग्रेस और बसपा ने भाजपा सरकार की आलोचना की है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल का कहा कि त्वरित कार्रवाई की गई। साथ ही कांग्रेस पर अपराधों पर चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी उत्पीड़न लगातार हो रहा है, जहां इस साल चुनाव होने हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में दलितों के खिलाफ अपराध की दर सबसे अधिक है और भाजपा ने मध्य प्रदेश को दलित उत्पीड़न की प्रयोगशाला बना दिया है। राज्य कांग्रेस प्रमुख कमल नाथ ने पीड़ित परिवार के लिए वित्तीय सहायता की मांग की और आरोपियों के भाजपा से संबंध होने का संकेत दिया। उधर, भाजपा ने कांग्रेस पर घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने दावा किया कि यह दोनों पक्षों के बीच विवाद का नतीजा था और कांग्रेस पर इस घटना का अनावश्यक रूप से राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। प्रदेश भाजपा सचिव रजनीश अग्रवाल के अनुसार, उनकी पार्टी की सरकार ने मामले में तुरंत कार्रवाई की, जबकि कांग्रेस सरकारें अपने शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठातीं।

देश में बढ़ रहे दलितों के खिलाफ अपराध

भारत में दलितों के खिलाफ अपराध के मामलों में कड़ी सजा वाले कानून के मौजूद होने के बावजूद देश में इस तरह के अपराध बढ़ते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में अनुसूचित जातियों के लोगों के खिलाफ 45,935 अपराध हुए, जो 2018 में हुए अपराधों के मुकाबले 7.3 प्रतिशत ज्यादा थे। इस संख्या का मतलब है दलितों के खिलाफ हर 12 मिनट में एक अपराध होता है। इनमें 11,829 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश टॉप पर है। यानी एक चौथाई मामले अकेले यूपी के है। इसके बाद राजस्थान में 6,794 व बिहार में 6,544 मामले हुए है। जबकि, राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जाति के लोगों की आबादी के अनुपात के लिहाज से देंखे तो, अपराध की सबसे ऊंची दर राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में पाई गई है।  अनुसूचित जन जातियों के लोगों के खिलाफ हुए अपराधों में सबसे ज्यादा मामले (358) मध्य प्रदेश से थे।

त्रासदी यह है कि दलितों के खिलाफ अपराध के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में सुनवाई भी लंबित रह जाती है। 2019 में अनुसूचित जातियों के लोगों के खिलाफ हुए 2,04,191 मामलों में सुनवाई होनी थी, लेकिन इनमें से सिर्फ छह प्रतिशत मामलों में सुनवाई पूरी हुई। इनमें से सिर्फ 32 प्रतिशत मामलों में दोषी का अपराध साबित हुआ और 59 प्रतिशत मामलों में आरोपी बरी हो गए।

साभार : सबरंग 

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