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मध्य प्रदेश में बिजली संकट से परेशान किसानों का प्रदर्शन

कम बारिश और बिजली की कमी के कारण अपनी फ़सलों को पानी नहीं दे पाने की वजह से किसान सड़कों पर उतर आए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।

भोपाल: सरप्लस बिजली का उत्पादन करने वाले भाजपा शासित मध्य प्रदेश को भी बिजली की कमी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि इस साल के अंत तक राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं।

अनियमित मानसून के कारण पनबिजली उत्पादन प्रभावित होने और किसानों के रबी फसलों की तैयारी करने के बाद, बिजली कटौती ने कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों की रातों की नींद हराम कर दी है। इस महीने के पहले चार दिनों में कमी के कारण, दैनिक बिजली आपूर्ति को घटाकर 7 घंटे कर दिया गया था।

राज्य 22,730 मेगावाट का उत्पादन करता है और औद्योगिक और वाणिज्यिक सहित सभी गैर-कृषि उपभोक्ताओं को बिजली देता है। कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे बिजली मिलती है। 30 दिसंबर, 2022 को बिजली की मांग अधिकतम 17,065 मेगावाट थी, जो अब तक की सबसे अधिक मांग है।

कम बारिश और बिजली की कमी के कारण अपनी फसलों को पानी नहीं दे पाने की वजह से किसान सड़कों पर उतर आए और राज्य भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

खंडवा में, सुखराम नाम के एक 30 वर्षीय किसान ने पिछले महीने बाढ़ प्रभावित दैत गांव (मुंडी तहसील) में दो बैलों को खोने और सूखे जैसी स्थिति के बाद 4.5 लाख रुपये की फसल के अनुमानित नुकसान के बाद 4 सितंबर को आत्महत्या कर ली।

सुखराम के भाई चंदू ने कहा, “वह (सुखराम) पिछले कुछ महीनों से परेशान था। सबसे पहले उसके बैल बाढ़ में बह गये। उसने अपनी तीन एकड़ जमीन पर कपास और सोयाबीन बोया था, लेकिन अत्यधिक गर्मी और कम बारिश के कारण दोनों फसलें खराब हो गईं।”

उन्होंने एक वीडियो क्लिप में कहा, “उनकी एक 12 महीने की बेटी है। सरकार को उस परिवार को मुआवजा देना चाहिए, जिसका अब कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है।”

कृषि की दृष्टि से समृद्ध मालवा-निमाड़ क्षेत्र के आगर-मालवा और बड़वानी सहित कई जिलों में, आरएसएस के किसान संगठन भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने अनियमित बिजली कटौती की शिकायत करते हुए कई विरोध प्रदर्शन किए और 24 घंटे के भीतर खराब ट्रांसफॉर्मर को बदलने की मांग की।

आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा ब्लॉक में बीकेएस से जुड़े किसानों ने बिजली विभाग के दफ्तर में ताला जड़ दिया और बिजली बंद कर दी।

बीकेएस सदस्य उमेश पाटीदार ने मीडिया को बताया, "अनियमित बिजली आपूर्ति, खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने में देरी और बिजली लाइन की खराबी ने खराब मानसून के बाद संघर्ष कर रहे किसानों की समस्याओं को बढ़ा दिया है।"

खंडवा में, सैकड़ों किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग करते हुए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से उस समय कई सवाल किए जब वह शनिवार को जन आशीर्वाद यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए मांधाता विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे। बुरहानपुर में केले और अन्य फसल उगाने वाले किसानों ने फसल नुकसान के मुआवजे और 14 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग उठाने के लिए एक रैली निकालने की योजना बनाई है।

सोयाबीन की बुआई करने वाले किसानों ने दावा किया कि गर्मी और लंबे समय तक सूखे के साथ-साथ छिटपुट बिजली आपूर्ति के कारण उनकी 50% से अधिक फसल खराब हो गई है।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद भी अपनी दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने में विफल रहने पर अधिकांश जिलों में किसानों ने अब कलेक्टरेट और तहसील कार्यालयों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 सितंबर को बिजली संकट और फसल नुकसान पर बैठक के दौरान इस संकट को स्वीकार किया और महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना की।

“शुष्क मौसम के कारण बिजली संकट पैदा हो गया। मानसून में, फसलों की बुआई या पानी देने के लिए पानी की उपलब्धता के कारण बिजली की आपूर्ति 8,000 मेगावाट सामान्य है। लेकिन अनियमित मानसून के कारण बिजली की मांग बढ़कर 15,000 मेगावाट तक पहुंच गई है।''

“हमने बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को दिल्ली भेजा। मैं उपभोक्ताओं से अनुरोध करता हूं कि वे बिजली का उपयोग समझदारी से करें।''

भारतीय किसान मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव ने कहा, “खरीफ की फसलें बारिश पर निर्भर करती हैं। लेकिन बारिश की कमी के कारण जल निकाय भरे नहीं हैं जिससे रबी फसलों पर भी असर पड़ने की संभावना है।”

मंगलवार को कई जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई, जिससे बाद में मांग कम हो गई। फिर भी, बिजली विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अक्टूबर के चरम सीज़न के लिए ऊर्जा बचाने का आग्रह किया है।

एमपीपीकेवीवीसीएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) अमित तोमर ने न्यूज़क्लिक को बताया, ''मांग को पूरा करने के लिए बिजली आपूर्ति को घटाकर सात घंटे कर दिया गया है। हम किसानों के लिए 10 घंटे की बिजली आपूर्ति फिर से शुरू करने और बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'’

उन्‍होंने आगे कहा, ''राज्य के मध्य और पूर्वी हिस्सों में पिछले 24 घंटों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे बिजली की मांग कम हो गई। पश्चिमी क्षेत्र (इंदौर-उज्जैन संभाग) में एक और बारिश का अनुमान है। आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।'’

मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के एमडी एमआर रघुराज ने कहा, ''हम पीक सीजन की तैयारी कर रहे हैं, जो अक्टूबर में शुरू होता है। अब संरक्षित प्रत्येक इकाई उपयोगी होगी। इसलिए हम उपयोगकर्ताओं से बिजली बचाने और उसका कुशलतापूर्वक उपयोग करने की अपील करते हैं।''

अंग्रेजी में प्रकाशित इस मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

Madhya Pradesh Power Crisis Sparks Farmer Protests 

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