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JNU CHS लाइब्रेरी मामला: “हिस्ट्री डिपार्टमेंट को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है”

JNU में नया तमिल अध्ययन सेंटर बनाया गया है। इस केंद्र के लिए सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़ (CHS) की लाइब्रेरी को रिलोकेट किया गया है, जिसके विरोध में छात्र उतर आए हैं और तमिल अध्ययन केंद्र के लिए तमिलनाडु सरकार से मिले फंड के बारे में सवाल पूछ रहे हैं।
JNU

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ट्विटर हैंडल से 31 जुलाई को एक ट्वीट कर जानकारी दी गई थी कि तमिल अध्ययन के लिए स्पेशल सेंटर, SCTS ( Special Centre for Tamil Studies) की शुरुआत की जा रही है। इसके साथ ही इस सेंटर की कुछ तस्वीरों को भी साझा किया गया।

लेकिन नए सेंटर की जिस तस्वीर को साझा किया गया वो दरअसल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज (CHS) की लाइब्रेरी है। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और आरोप लगाया जाने लगा कि लाइब्रेरी को बंद कर वहां SCTS की शुरुआत की जा रही है। सोशल मीडिया पर कुछ हैशटैग #RightToRead #SaveCHSLi के साथ कैंपेन शुरू हो गया। 

CHS की स्टूडेंट कम्युनिटी की तरफ से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की गई जिसमें कहा गया कि CHS लाइब्रेरी होने के साथ ही एक डॉक्युमेंटेशन सेंटर भी रहा है, जिसे UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से अनुदान भी मिलता रहा है। यहां करीब 18 हज़ार किताबें हैं, Ph.D थिसिस, जर्नल हैं जो सिर्फ रेफरेंस के लिए हैं। साथ ही इस लाइब्रेरी में 150 साल पुरानी किताबों का अनोखा संग्रह है। 

दरअसल लाइब्रेरी को बंद नहीं किया जा रहा बल्कि उसे क़रीब ही दूसरी जगह EXIM Bank Library में शिफ्ट किया जा रहा था। लेकिन छात्रों को इस पर भी ऐतराज है जिसकी कई वजह बताई जा रही हैं जिसमें सबसे अहम है कि EXIM Library में पहले से ही जगह की कमी है, दूसरा इतिहास की कुछ बेहद अहम पांडुलिपियों और दस्तावेज को शिफ्ट करने के दौरान नुकसान का अंदेशा है। 

छात्रों ने प्रशासन के इस फैसले का विरोध करते हुए एक प्रदर्शन भी किया और इस फैसले को रद्द करने की मांग की। वहीं दूसरी तरफ जेएनयू प्रशासन की तरफ से एक सर्कुलर जारी कर कहा गया कि "ये गलत ख़बर फैलाई जा रही है कि नए बने तमिल अध्ययन (SCTS)  के लिए CHS लाइब्रेरी को बंद किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के सभी संबंधित सदस्यों/छात्रों को ये सूचित किया जाता है कि CHS की लाइब्रेरी को क़रीब के ही भवन में रिलोकेट (Relocate) किया जा रहा है।"

सर्कुलर में ये भी कहा गया कि रिलोकेशन जेएनयू में होता रहा है। लेकिन छात्र इस रिलोकेशन पर भी सवाल उठा रहे हैं। JNUSU (Jawaharlal Nehru University Students' Union) ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस क़दम की निंदा की और प्रशासन पर सवाल खड़े किए, JNUSU ने आरोप लगाया कि "तमिल अध्ययन के लिए तमिलनाडु सरकार की तरफ से 10 करोड़ रुपये का फंड दिया गया लेकिन उसका इस्तेमाल करने की बजाए CHS लाइब्रेरी को तमिल अध्ययन केंद्र बनाकर उसे EXIM Bank Library में शिफ्ट किया जा रहा है वो भी बिना संबंधित सदस्यों/छात्रों से बात किए।"

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साथ ही JNUSU ने मांग की कि "जेएनयू प्रशासन तमिलनाडु सरकार की तरफ से तमिल अध्ययन (Special Centre for Tamil Studies) के लिए दिए गए फंड का इस्तेमाल कर नए सेंटर का निर्माण करे। 

इस मामले पर हमने सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज (CHS) के कई छात्रों से बात की। एक छात्र ने कहा कि "सबसे बड़ी बात है कि इस पूरे मामले में छात्र जो सबसे बड़े स्टेकहोल्डर (Stakeholder) हैं उनकी बिना जानकारी के एक दिन प्रशासन आता है और बस फैकल्टी को बता कर चला जाता है जबकि हमारे छात्र प्रतिनिधियों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती। दूसरा वे जिस जगह पर लाइब्रेरी को रिलोकेट कर रहे हैं वो जगह हमारे लिए पर्याप्त नहीं है वहां मुश्किल से आठ लोग ही बैठ सकते हैं, जबकि CHS की लाइब्रेरी में एक साथ 20 से 25 छात्र बैठ कर पढ़ सकते हैं। बीते कुछ दिनों में हमसे हमारे रीडिंग रूम भी छीन लिए गए, हमें दिक्कत किसी बात से नहीं है लेकिन हिस्ट्री डिपार्टमेंट को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।"

बातचीत के दौरान छात्र ने कहा कि "हम किसी भी सेंटर के खिलाफ नहीं हैं, आप कोई भी सेंटर खोलिए, लेकिन जो फंड आपको दिया गया है स्टेट गवर्नमेंट से उसे इस्तेमाल किया जाए, जेएनयू में जगह की कमी नहीं है फंड भी कम नहीं है।"

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वे आगे कहते हैं कि "आखिरकार जो नए स्टूडेंट आने वाले हैं, उनके लिए भी नया सेंटर होना चाहिए, 10 करोड़ के फंड में से 5 करोड़ का आवंटन भी हो गया लेकिन उस पैसे के बारे में कोई जानकारी नहीं है आख़िर वो गया तो गया कहां उसके बाद आप हमारे संसाधन को लेकर उसी की मरम्मत करवा कर बात देंगे कि यहां पैसा लगा दिया।"

हमने CHS के एक और छात्र से बात की, उन्होंने कहा कि "सबसे पहले तो हम किसी गलतफहमी में नहीं हैं कि लाइब्रेरी बंद हो रही है। ये हमें पहले दिन से ही पता था कि लाइब्रेरी रिलोकेट हो रही है, प्रशासन ने ही ये गलतफहमी फैलाई है, हमें ये बात शुरू से ही पता थी, इश्यू ये आ रहें हैं कि जहां रिलोकेट किया जा रहा है वहां जगह बहुत कम है, हमारी लाइब्रेरी  EXIM Bank Library में शिफ्ट की जा रही है जहां पहले से ही इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की लाइब्रेरी है।"

ये छात्र आगे कहते हैं कि "किताबों के भविष्य की भी बात है क्योंकि अगर नई लाइब्रेरी में हमारी सारी किताबें नहीं आ पाई तो बची हुई किताबों को डिस्कार्ड करने के लिए कहा जा रहा है। इन किताबों को इतने सालों से सहेज कर रखा गया है।"

छात्र बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में VC (वाइस चांसलर) को एक ज्ञापन भी सौंपा था जिसमें CHS की लाइब्रेरी को रिलोकेट न करने और लाइब्रेरी को दूसरी तरह से इस्तेमाल न करने की मांग की गई थी।  

छात्रों का मानना है कि “CHS की लाइब्रेरी को तमिल सेंटर बनाना ग़लत होगा क्योंकि अगर तमिलनाडु सरकार ने फंड दिया है तो उन्होंने ये सोच कर दिया होगा कि छात्रों को एक नया सेंटर मिलेगा उन्होंने भी ये नहीं सोचा होगा कि उनका पैसा यूं बर्बाद कर दिया जाएगा।"

एक छात्र ने कहा कि "कैंपस में छात्रों के संगठन इसमें राजनीति देख रहे हैं लेकिन CHS के छात्र के तौर पर हमें सिर्फ इससे मतलब है कि हमारी अकैडमिक स्पेस को ऐसे ख़त्म ना किया जाए।"

सोशल मीडिया पर किताबों को शिफ्ट करने की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी दिखे जिसके बारे में हमने छात्रों से जानने की कोशिश की कि आख़िर इतनी जल्दी में लाइब्रेरी को क्यों शिफ्ट किया जा रहा है जिसके बारे में छात्रों ने बताया कि फिलहाल यूनिवर्सिटी में सेमेस्टर ब्रेक चल रहा है, क्लास 16 अगस्त से शुरू होगी, अभी कैंपस में फैकल्टी और छात्रों की संख्या कम है तो हो सकता है इसलिए काम को जल्दी निपटाया जा रहा है। 

एक छात्र ने प्रशासन से अपील की "एक छात्र के तौर पर मैं बस यही अपील करना चाहता हूं कि CHS के छात्रों और स्कॉलर्स की ये जो अकैडमिक स्पेस है, ये काफी सालों से है और यहां की जानकारी का इस्तेमाल करके हम अपने रिसर्च करते हैं, आर्टिकल लिखते हैं, हम आगे और रिसर्च करना चाहते हैं इसलिए हमारी स्पेस को यूं कम न किया जाए। हम चाहते हैं कि जेएनयू में हर इंडियन लैंग्वेज का सेंटर बने लेकिन उसके लिए इंडिपेंडेंट स्पेस बनाई जाए, उसके लिए जो फंड और रिसोर्स मिल रहे हैं उनको अच्छी तरह से इस्तेमाल किया जाए, न कि जो मौजूदा स्पेस है उसपर नियंत्रण किया जाए, या उन्हें रिलोकेट कर दिया जाए। नए सेंटर का बनना बहुत अच्छी बात है, जेएनयू लैंग्वेज सेंटर के लिए जाना जाता है लेकिन उनके लिए नई जगह तलाश की जाए जेएनयू के पास बहुत ज़मीन है, फंड का इस्तेमाल किया जाए, न की आपके जो बहुत अच्छे सेंटर हैं, जिन्होंने बहुत क्वालिटी स्कॉलरशिप प्रोड्यूज़  की हैं उनको तबाह करें।"

ये एक इत्तेफाक ही था जिस वक़्त हम जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज (CHS) के छात्रों के साथ एक लाइब्रेरी को बचाने पर बात कर रहे थे उसी वक़्त देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति प्रगति मैदान में दो दिन के 'फेस्टिवल ऑफ लाइब्रेरीज़ 2023' नाम के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रही थीं।

पिछले कुछ सालों से जेएनयू की शक्ल जिस तरह से बदली है वो किसी से छिपी नहीं है, देश की सम्मानित यूनिवर्सिटी के बहुत से डिपार्टमेंट में बुनियादी ज़रूरतों और फंड के छात्र लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं। बात हॉस्टल के कमरों की कमी की हो या फिर जो हॉस्टल हैं उनकी ख़स्ता हालत, पानी और वॉशरूम समेत सेंट्रल लाइब्रेरी में बैठने की जगह के लिए मारामारी, छात्रों का आरोप है कि जो संसाधन छात्रों को मिलने चाहिए नहीं मिल पा रहे। हालांकि इन तमाम कथित कमियों के बावजूद यूनिवर्सिटी हर साल बेहतरीन प्रदर्शन का रिकॉर्ड कायम रखने में कामयाब रहती है।
 

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