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झारखंड: JMM का केंद्र पर राज्य सरकार को अस्थिर करने का आरोप

JMM ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि उनकी राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है और जानबूझकर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
JMM

26 जनवरी के दिन तिरंगा लहाराकर हम अपने गणतंत्र का अभिनंदन करेंगे। केंद्र की सत्ता पर काबिज़ सत्ताधारी दल और उसके आला नेतागण भी इस दिन तिरंगा लहराकर 'गणतंत्र की रक्षा' की कसम खाएंगे। हालांकि इन दिनों लगातार गणतंत्र और संविधान को 'कमज़ोर' करने के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष समेत देश के कई नागरिक समाज-सामाजिक संगठनों और वरिष्ठ कानूनविदों-विधि विशेषज्ञों का आरोप है कि मौजूदा शासन में देश में स्थापित ‘गणतंत्र आधारित संघीय ढांचा प्रणाली’ को कमज़ोर करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

झारखंड में यही आरोप लग रहा है। राज्य में 21 जनवरी को राजधानी रांची स्थित गोंदा थाना में सीआरपीएफ़ के आईजी, कमान्डेंट समेत 500 अज्ञात जवानों के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती प्राथमिकी दर्ज़ की गई है। आरोप है कि "सशत्र बल के इन जवानों ने बिना स्थानीय पुलिस-प्रशासन की अनुमति के सीधे 'प्रतिबंधित इलाके' में घुसकर वहां लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया है।"

ख़बरों के अनुसार सदर रांची सीओ की शिकायत पर 21 जनवरी को यह प्राथमिकी हुई है। सीओ ने आरोप लगाया गया है कि "राज्य के मुख्यमंत्री आवास और आसपास के क्षेत्र में सदर अनुमंडलाधिकारी के आदेश से धारा 144 लगाई गई थी जिसके तहत वहां 500 मीटर क्षेत्र में किसी भी तरह का हथियार लेकर जाने की मनाही थी।"

आरोप है कि “20 जनवरी को उक्त प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना किसी पूर्व सूचना और प्रशासनिक अनुमति के कई गाड़ियों में सवार सीआरपीएफ़ के 500 हथियारबंद जवान मुख्यमंत्री आवास क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे। सीएम आवास के बाहर प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड को हटाकर घुसने की उनकी कोशिश को रोका गया और सीआरपीएफ़ कमान्डेंट को डीसी-एसएसपी के संयुक्त आदेश का हवाला भी दिया गया। वहां तैनात प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारियों और सीआरपीएफ़ के बीच काफ़ी कहासुनी भी हुई। काफी प्रयासों के बाद स्थिति संभाली गई।" इस घटना का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने सीआरपीएफ़ के अधिकारियों व जवानों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज़ की।

ख़बर यह भी है कि इस दौरान स्थानीय पुलिस के सामने ही सीएम आवास के पास इकठ्ठा हुए झामुमो कार्यकर्ताओं और सीआरपीएफ़ के जवानों के बीच भी गहमागहमी की स्थिति बन गई थी। बहरहाल उस दिन मामला किसी तरह से टल गया और 'राज्य पुलिस-सीआरपीएफ़ टकराव' होते होते बचा।

अब यह प्रकरण काफी तूल पकड़ता दिख रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने राज्य के गृह विभाग से पूछा है कि "प्रतिबंधित क्षेत्र में सीआरपीएफ़ के जवान कैसे आए और इनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की गई है?”

गौरतलब है कि यह सब उसी दिन घटित हुआ जिस दिन मुख्यमंत्री आवास पर ईडी की टीम हेमंत सोरेन से पूछताछ करने पहुंची थी।

इस घटना को लेकर सत्ताधारी गठबंधन सरकार के सभी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की। झामुमो प्रवक्ता ने मीडिया संबोधन में इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि "पहले ईडी-सीबीआई और अब केंद्र संचालित अर्ध सैन्यबलों को उतार कर वह राज्य सरकार को अस्थिर कर रही है। जिस दिन ईडी हेमंत सोरेन से पूछताछ कर रही थी, उसी दिन रांची एयरपोर्ट पर एक विशेष विमान को खड़ा किया गया था। प्लान था कि सीआरपीएफ़ सीएम के आवास में घुसकर हेमंत सोरेन को पकड़ कर ले जाए और वहीं से गिरफ्तारी दिखा दी जाए।"

वहीं इसके विपरीत प्रदेश भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि सीआरपीएफ़ के जवान ईडी की सुरक्षा के लिए गए थे। हालांकि इसके ख़िलाफ़ राज्य सरकार के समर्थकों का कहना है कि ईडी ने अपनी सुरक्षा के लिए राज्य के पुलिस आईजी से व्यवस्था मांगी थी। जिसपर पुलिस मुख्यालय से जारी सूचना के आधार पर ये बताया गया कि पुलिस-प्रशासन के कई विशेष अधिकारियों समेत 2000 पुलिस के जवान तैनात किये गए थे।

ख़बर है कि 20 जनवरी को 7 घंटों की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने हेमंत सोरेन को फिर से पूछताछ के लिए समन जारी किया है। इसे लेकर फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होने के आसार हैं। ये चर्चा तेज़ होने लगी है कि क्या जैसे-जैसे 2024 के संसदीय चुनाव की घड़ी नज़दीक आती जाएगी, विपक्ष के साथ-साथ राज्यों की गैर भाजपा सरकारों पर कार्रवाइयां तेज़ होंगी?

उधर, हेमंत सोरेन भी ईडी-पूछताछ के बाद से अपने बयानों में केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि "न डरेंगे और न झुकेंगे...यह सरकार कोई गाजर मूली नहीं है, जिसे कोई उखाड़कर फेंक दे। जनता की चुनी हुई सरकार है। जो इसे उखाड़ने की कोशिश करेगा वो खुद उखड़ जाएगा।"

इस क्रम में झामुमो भी राज्य में जगह-जगह राजनीतिक होर्डिंग्स लगा कर भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मुद्दे उठा रहा है। फ़िलहाल सियासी हालात यही हैं कि एक ओर, ईडी समेत कई जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इन कार्रवाईयों को अपने ऊपर हमला बताते हुए केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए है।

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