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मणिपुर में महिलाओं पर हिंसा, देश में गुस्सा, दिल्ली, यूपी, हरियाणा, बिहार सभी जगह प्रदर्शन

सभी जगह प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस हिंसा के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों दोषी हैं। इसलिए सीएम के साथ केंद्रीय गृहमंत्री को भी इस्तीफ़ा देना चाहिए।
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मणिपुर हिंसा ख़ासकर महिलाओं पर हुए बलात्कार-अत्याचार को लेकर देशभर में गुस्सा है। दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार और हरियाणा में जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। दिल्ली में आज शुक्रवार को संसद के पास जंतर मंतर पर दिल्ली के नागरिक समाज ने प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन किसी एक संगठन या दल का नहीं था बल्कि दिल्ली की जनता ने खुले प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसमें बड़ी संख्या मे इंसाफ़ पसंद जनता जुटी और कई सामाजिक संगठन भी इसमें शामिल हुए। ख़ासतौर पर इस प्रदर्शन में छात्र नौजवान और महिला संगठन, जैसे स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसियशन (AISA), क्रांतिकारी युवा संगठन, भारत की जनवादी नौजवान सभा, CSW और दिल्ली में रहने वाले पूर्वोत्तर राज्यों के युवा-छात्र शामिल हुए।

आप सबको मालूम है कि मणिपुर में बीते कई महीनों से हिंसा जारी है। इस बीच वहां से महिलाओं के साथ शोषण और हिंसा की खबरे आ रही हैं। इसी दौरान वहां कुछ महिलाओं को निर्वस्त्र करके परेड कराने और गैंगरेप का एक वीडियो वायरल हुआ जिसने सभी को हिलाकर रख दिया। इंसानियत को शर्मसार करने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसके बाद से देशभर मे प्रगतिशील नागरिक समाज मे भारी रोष दिख रहा है। इसको लेकर देश के कई इलाकों मे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

जंतर-मंतर पर मणिपुर के छात्र किशन जो दिल्ली में पढ़ाई करते हैं, उन्होंने कहा कि वो यहां किसी एक समुदाय के लिए नहीं बल्कि पूरे मणिपुर के लिए आए हैं। पूरा मणिपुर पिछले ढाई महीने से एक वॉर फील्ड (युद्ध क्षेत्र) बना हुआ है। किशन ने इसे सरकार समर्थित हिंसा बताया। किशन कहते हैं कि अगर सरकार हिंसा का हिस्सा न होती तो कैसे हथियार लूटे गए और उससे निर्दोष मणिपुरी लोगों को मारा जा रहा है। 

मणिपुर की रहने वाली डेफिलेंबी भी आज के प्रदर्शन में शामिल हुईं। वे कहती हैं उनका इस सरकार से विश्वास उठ गया है। वे भी कहती हैं कि मणिपुर में राज्य के समर्थन से हिंसा हो रही है। वे केंद्र की मोदी सरकार पर भी हमला करती हैं। कहती हैं कि देश के प्रधानमंत्री 70 दिनों तक मणिपुर हिंसा पर चुप रहते हैं। एक वीडियो वायरल होने पर सब बोल रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ़ एक घटना है। मणिपुर में ऐसी कितनी ही घटना घटा रही हैं। 

स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव मयूख विश्वास ने कहा कि हम यहां मणिपुर में जारी हिंसा के खिलाफ़ अपना विरोध जताने आए हैं। सरकार हिंसा रोकने में पूरी तरह से फेल है। इसलिए हम मांग करते है वहां की सरकार बर्खास्त किया जाए। 

मणिपुर के छात्र पॉल ने कहा— हमें शर्म आती है। लोग मणिपुर हिंसा के 70 दिनों तक चुप रहते हैं और फिर जब एक वीडियो वायरल होता है तब बोलते हैं। उन्होंने बताया आज भी वहां हिंसा हो रही है। सैकड़ों लोग मारे गए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री चुप है।

बीते दिनों वायरल हुए वीडियो को पुराना बताया जा रहा है। लेकिन इस हिंसा में महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस बात को ये पुख्ता ज़रूर कर रहा है।

सोशल मीडिया पर जो दो महिलाओ को निर्वस्त्र घुमाने वाला वीडियो है उसे 4 मई का बताया जा रहा है लेकिन राज्य में इंटरनेट बंद होने की वजह से देश के अन्य हिस्सों तक ये बात पहुंचने में ढाई महीने लगे। अब इस पर सवाल उठ रहा कि क्या इंटरनेट बंद करने से हिंसा रोकने में मदद मिली? या बस इंटरनेट बंद कर देश के अन्य हिस्सों और मणिपुर को इस तरह की घटनाओं से अनिभिज्ञ रखा गया।

इस दौरान देश के प्रधानमंत्री भी पूरी तरह चुप्पी साधे रहे, लेकिन अब महिलाओं से बर्बरता की इस घटना ने उन्हें चुप्पी तोड़ने पर मजबूर किया और उन्होंने देश को एक आश्वासन देने की कोशिश कि अपराधियों को माफ नहीं किया जाएगा। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने वहां की सरकार को कोई ठोस हिदायत देने की बजाए देश के सभी मुख्यमंत्रियों को सलाह दे डाली। इसलिए उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

किसान सभा के नेता मनोज भी इस प्रदर्शन में शामिल थे। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को लेकर सवाल किया, पूछा— कब तक एक राज्य जलता रहेगा । 

हरियाणा: "मणिपुर जल रहा है और प्रधानमंत्री चैन की बांसुरी बजा रहे हैं"

इसी तरह का प्रदर्शन हरियाणा में हुआ। जनवादी महिला समिति और अन्य संगठनों द्वारा रोहतक में प्रदर्शन किया गया और यहां भी मणिपुर सरकार की बर्खास्तगी व प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की गई।

प्रदर्शन का नेतृत्व जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल ने किया। प्रदर्शनकारियों ने जुलूस जसबीर कालोनी में स्थित जनवादी महिला समिति के कार्यालय से शुरू करके शीला बाईपास तक निकाला। प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए सुभाषिनी अली सहगल ने कहा कि मणिपुर में हिंसा का तांडव खेला जा रहा है जिसमें महिलाएं बहुत भयानक रूप से हिंसा का शिकार हो रही हैं। पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें बहुत सारे पुरुष कुकी महिलाओं को नंगा कर उनके के साथ बदसुलूकी कर रहे हैं। बेबस औरतें रो रही हैं और भीड़ आनंद ले रही हैं। यह सब देखना हरेक संवेदनशील नागरिक को झकझोर देता है और हमारा सर शर्म से झुक जाता है। हमें सोचना होगा कि इस भीड़ को किस तरह की राजनीति ने बनाया है। यह राजनीति लोगों को हैवान बना रही है। 

सुभाषिनी अली ने कहा कि पूरा मणिपुर जल रहा है और प्रधानमंत्री चैन की बांसुरी बजा रहे हैं। कल कुछ शब्द उनके मुंह से निकले हैं परंतु हिंसा को रोकने के लिए भाजपा सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं किए जा रहे। भाजपा सरकार चाहती है लोगों का ध्रुवीकरण कर राजनीतिक फायदा उठाया जाए। इस हिंसा के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। संगठन मांग करता है कि वे तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। मणिपुर में हो रही हिंसा को तुरंत रोका जाए और हिंसा पीड़ित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

महिला समिति नेताओं ने कहा 25 जुलाई को देश भर में मणिपुर हिंसा के विरोध में प्रदर्शन होगा।

बिहार: साम्प्रदायिक हिंसा, सामूहिक बलात्कार और हत्याएं भाजपा शासन का चरित्र 

देश विशेषकर मणिपुर की महिलाओं के लिए, जो हिंसा का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगत रही हैं, के न्याय की मांग पर आज भाकपा- माले और उससे जुड़े जनसंगठनों ने बिहार में भी सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज किया। राजधानी पटना में भाकपा - माले के साथ-साथ आइसा, ऐपवा और आरवाइए ने संयुक्त रूप से बुद्ध स्मृति पार्क पर प्रतिरोध सभा का आयोजन किया। अरवल, मोतिहारी, नवादा, मसौढ़ी, जहानाबाद, दरभंगा, आरा, बक्सर आदि जिला केंद्रों पर भी प्रतिरोध सभाएं आयोजित की गईं।

नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि 4 मई के वीडियो ने पूरे देश को हिला दिया है। उपद्रवियों की भीड़ ने महिलाओं के कपड़े उतारकर उन्हें जिस प्रकार से नंगा घुमाया और उनका यौन उत्पीड़न किया, वह मानवता को शर्मसार कर रहा है। नफरती भीड़ ने ’बदले’ की कार्रवाई के तहत महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया। बलात्कार पीड़िताओं के परिवार के पुरुष सदस्यों की भीड़ ने हत्या कर दी।

यह सब मणिपुर में जारी था और हमारे देश के प्रधानमंत्री चुपचाप तमाशा देखते रहे। मणिपुर साम्प्रदायिक हिंसा के 79 दिनों बाद उनकी जुबान खुली है। देश को न्याय चाहिए, प्रधानमन्त्री के घड़ियाली आंसू नहीं। जब पूरे दुनिया में थू-थू होने लगी तब मोदी जी महज राजनीतिक बयान दे रहे हैं। वहां भाजपा की सरकार है और भाजपा ही सत्ता का इस्तेमाल कर नफरत-साम्प्रदायिक हिंसा और बलात्कार को बढावा देने मे लगी है। 

सभी वक्ताओं ने कहा कि हमारी मांग है कि सभी अपराधियों की तुरंत पहचान कर उनकी गिरफ्तारी हो। 'अज्ञात’ भीड़ के नाम पर उन्हें बचाने की कोशिश नहीं चलेगी। साथ ही, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा दें। हमारी यह भी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नारीवादियों और वकीलों की एक टीम तत्काल मणिपुर भेजी जाए। यह टीम मामले की संपूर्णता में जांच करे। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाइयों पर भी गौर करे। 

लखनऊ में भी प्रदर्शन

यूपी की राजधानी लखनऊ में भी महिलाएं, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता व नागरिक समाज के अन्य लोग मणिपुर की घटना को लेकर सड़क पर उतरे।

यहां भी सभी ने एक स्वर में मणिपुर हिंसा ख़ासतौर पर महिलाओं पर हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार ने मणिपुर को गृहयुद्ध जैसे हालात में धकेल दिया है। इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और गृहमंत्री अमित शाह को तत्काल इस्तीफ़ा देना चाहिए।

आपको बता दें कि मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने के मामले में दो और आरोपी अरेस्ट किए गए हैं। गुरुवार रात तक चार आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा- सरकार अपराधियों के लिए मौत की सजा पर विचार कर रही है।

यह घटना 4 मई को राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले में हुई। इसका वीडियो बुधवार, 19 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—वीडियो देखकर हम बहुत परेशान हुए हैं। हम सरकार को वक्त देते हैं कि वो कदम उठाए। अगर वहां कुछ नहीं हुआ तो हम कदम उठाएंगे।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार से पूछा है कि अपराधियों पर कार्रवाई के लिए आपने क्या कदम उठाए हैं। CJI ने कहा कि सांप्रदायिक संघर्ष के दौरान महिलाओं का एक औजार की तरह इस्तेमाल कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता है। यह संविधान का सबसे घृणित अपमान है।  

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