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सैन्य अभियान पूरा करने को लेकर रूसी सेना पहले से कहीं ज़्यादा प्रतिबद्ध

यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को काफ़ी हद तक कमज़ोर करने के बाद मास्को उस विशेष अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिससे कि जीत हासिल की जा सके।

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यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को काफ़ी हद तक कमज़ोर करने के बाद मास्को उस विशेष अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिससे कि जीत हासिल की जा सके। मास्को ने इस लिहाज़ से संकेत भी दे दिये हैं।

सबसे अहम संकेत क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव की तरफ़ से आया हैजिन्होंने सोमवार को कहा था, "रूस के पास यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान चलाने की पर्याप्त क्षमता है। सैन्य अभियान मूल योजना के मुताबिक़ ही आगे बढ़ रहा है और यह अभियान अपने समय पर और पूर्णता के साथ पूरा होगा।

जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि रूस की सैन्य रणनीति निश्चित रूप से उस दुष्प्रचार के उलट हैजो कि पश्चिम की तरफ़ से प्रचारित किया जा रहा है और वह यह कि विशेष अभियान "नाकाम" है। पेसकोव ने संकेत दिया कि सैन्य अभियान को समय से पहले रोके जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने पश्चिमी देशों के "युद्धविराम" के आह्वान के बीच में यह बात कही।

पेसकोव ने ख़ुलासा किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विशेष रूप से सशस्त्र बलों को कीव सहित बाक़ी शहरों पर तत्काल हमले से परहेज़ करने का आदेश दिया थाताकि भारी संख्या में नागरिकों के हताहत को रोका जा सके। यही वजह है कि इस सैन्य अभियान ने इस ज़मीनी हक़ीक़त को ध्यान में रखा कि अतिवादी नव-नाज़ी समूह ने घनी आबादी वाले रिहायशी इलाक़ों में अपने हथियार तैनात किये हुए हैं।  

इसका मतलब यह था कि रणनीति की सीमा " एकदम सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक हथियारों के साथ काम करने और सिर्फ़ सैन्य और सूचना से सम्बन्धित बुनियादी सुविधाओं को तबाह करने" तक सीमित हो गयी थी। साफ़ तौर पर इसका तमलब यह भी था कि सैन्य अभियान की गति को धीमा करना था और लड़ाई की तीव्रता को भी कम रखना था, ताकि खामोशी के साथ इस लड़ाई को केंद्रित नहीं होने दिया जाये और बड़ी बस्तियों पर सामने से हमला करने के बजाय उन्हें घेर लेने की युक्ति का इस्तेमाल किया जाये।

हालांकिपेसकोव ने कहा कि अब जबकि बड़ी बस्तियों को घेरा जा चुका हैऐसे में सैन्य बलों ने यूक्रेन के इन शहरों को अपने "पूर्ण नियंत्रण" मे लेने की रणनीति से "बाहर नहीं" किया है। बहरहालरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा, "कुल मिलाकरयूक्रेनी सेना के 3,736 सुविधा समृद्ध बुनियादी ढांचे को बेकार कर दिया गया है, 100 विमान और 139 यूएवी तबाह कर दिये गये हैंसाथ ही साथ 1,234 टैंक और अन्य बख़्तरबंद वाहन, 122 मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम फ़ील्ड आर्टिलरी और मोर्टार के 452 हथियार और विशेष सैन्य हार्डवेयर की 1,013 इकाइयां को भी तबाह कर दिया गया है।  

पेसकोव ने उस पश्चिमी दुष्प्रचार रिपोर्टों का पूरी तरह खंडन किया है और बीजिंग ने भी उससे इनकार किया है कि मास्को ने चीनी सैन्य सहायता का अनुरोध किया था। रूसियों ने यह देखते हुए एक शानदार रणनीति तैयार की है कि 2003 में इराक़ पर कब्ज़ा करने के सिलसिले में भारी वायुशक्ति से लैस 177,194 सैनिकों के अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने चालीस दिनों का समय लिया था।

पश्चिम के सबसे बड़े रूस विरोधी आचोलकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि यूक्रेन में रूसी सेना ने अपनी ताक़त का बहुत कम इस्तेमाल किया है और यह भी कि सद्दाम हुसैन की सेना को 2003 में इराक़ पर हमला होने से पहले एक दशक की अवधि के दौरान अमेरिका की ओर से व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया गया था। 

यूक्रेन के लिहाज़ से वास्तव में मुश्किल दौर तो अब शुरू होने वाला है। मारियुपोल का दक्षिणी बंदरगाह शहर अब और नहीं टिक सकता। व्यावहारिक रूप से मारियुपोल के उपनगरों में नव-नाज़ियों के कब्ज़ा वाले तमाम स्थानों को तबाह कर दिया गया है। रूसी विशेष बलों ने शहर की परिधि के रिहायशी इलाकों में फंसे नव-नाज़ियों की बड़ी ताक़तों को ख़त्म कर दिया है।

मारियुपोल का पतन एक अहम मोड़ होगा। इससे रूसी सेना ज़ापोरिज़िया सिटी और नीप्रो पर आगे बढ़ने के लिए आज़ाद होगीनीपर नदी पर स्थित लिंचपिन कीव की ओर जाने वाले दक्षिणी मोर्चे को नियंत्रित करता है। इसी तरह ख़ेरसॉन से मायकोलायिव की ओर रूसी हमले दक्षिण में ओडेसा को घेरने के लिए फिर से शुरू हो सकते हैं।ओडेसा काला सागर तट पर स्थित एक बेहद अहम मोर्चा है। 

इस बीचपोलैंड की सीमा से 20 किमी से कम दूरी पर स्थित यूक्रेनी सैन्य अड्डे पर रविवार को अलसुबह किये गये क्रूज़ मिसाइल हमले के दौरान पश्चिमी भाड़े के सैनिकों को कड़वे स्वाद का सामना करना पड़ा था। (रूसी विवरण के मुताबिक़ 180 विदेशी भाड़े के सैनिक मारे गये)।

रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर-जनरल कोनाशेनकोव ने बाद में कहा, "हम यूक्रेन में रह रहे विदेशी भाड़े के सैनिकों वाले सभी जगहों को जानते हैं। उनके ख़िलाफ़ आगे भी सर्जिकल स्ट्राइक की जाती रहेंगी।" इसके पीछे का दूसरा विचार यह हो सकता है कि पश्चिमी देशों,ख़ासकर अमेरिका ने भाड़े के सैनिकों को भेजने के लिए यह दुस्साहस किया हो।

यह कहना पर्याप्त होगा कि इन सब घटनाक्रमों से वाशिंगटन सहित पश्चिमी देशों में यह अहसास बढ़ता जा रहा है कि इस रूसी सैन्य अभियान को अब नाकाम नहीं किया जा सकता और इस सिलसिले का आगे भी चलना तय है। यह बात सोमवार को फ़्रांसीसी टीवी पर फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ की हालिया टिप्पणी से भी स्पष्ट है,उन्होंने कहा था:

यूरोप अगर रूस के साथ बातचीत में शामिल नहीं होता है,तो वह सुरक्षित नहीं रह सकता । यह हमारा इतिहास हैयह हमारा भूगोल है। इसलिएमैं आने वाले समय में राष्ट्रपति पुतिन के साथ बात करने का इरादा रखता हूं...पहले से ही शांति के लिए हालात तैयार करना ज़रूरी हैक्योंकि युद्ध तभी ख़त्म हो पायेगा, जब हर कोई मेज पर बैठेगा और यह तय करने का वक़्त आ जायेगा कि कौन क्या वादा करने के लिए तैयार है। इसलिएतैयारी के लिए हमें पहले से ही तैयार हो जाना चाहिए।

अगर थोड़े में कहा जाये, तो मैक्रॉ रूसी सैन्य अभियान के ख़त्म होने के बाद के उन हालात को देख रहे हैं "जब हर कोई मेज पर बैठे...यह तय करने के लिए कि कौन क्या वादा करने के लिए तैयार है।" ग़ौरतलब है कि मैक्रॉं यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के एक फ़ोन कॉल के कुछ घंटे बाद ही कह रहे थे।

इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने क्रेमलिन में पुतिन के सबसे क़रीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक और अपने रूसी समकक्ष निकोलाई पेत्रुशेव के साथ एक टेलीफ़ोनिक बातचीत की इच्छा जतायी है। 24 फ़रवरी को रूसी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से वाशिंगटन का यह पहला ऐसा उच्च स्तरीय संपर्क है। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/russian-forces-double-down-complete-operation

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