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होली पर पुरुषों ने कमीज़ उतारकर महिला छात्रावास के इर्द-गिर्द की परेड: छात्राओं का आरोप
‘जेएनयू की महिलाओं’ द्वारा जारी एक वक्तव्य के मुताबिक, इन हॉस्टल में तैनात किसी सिक्योरिटी गार्ड ने इन अर्धनग्न पुरुषों को ऐसा करने से रोकने की कोशिश नहीं की और न ही इसकी शिकायत किए जाने पर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की।
दित्सा भट्टाचार्य
07 Apr 2021
jnu
चित्र सौजन्य : विकिमीडिया कॉमन्स

ऐसा बताया जा रहा है कि 29 मार्च को होली के दिन नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  के महिला छात्रावासों के पर्सियार में कुछ पुरुषों ने अपनी कमीजें उतारकर परेड की। जब यह हो रहा था तब इन हॉस्टलों के गेट पर तैनात किसी भी सिक्योरिटी गार्ड ने उन युवकों को रोकने की कोशिश नहीं की। 

 जेएनयू की महिलाओं’ द्वारा जारी एक वक्तव्य के अनुसार, “जब छात्राओं ने इस घटना पर अपना तीव्र रोष जाहिर किया तो अनेक पुरुष छात्रों ने, जो शायद उस परेड में शामिल थे, यह दावा किया कि “परेड का आयोजन इन छात्रावासों में रहने वाली लड़कियों के “दिल-बहलाव” के लिए किया गया था और अगर यह परेड छात्राओं को इतना ही नागवार गुजरा था तो उन्हें इसकी तुरंत शिकायत उन युवकों से करनी चाहिए थी।”

वक्तव्य में कहा गया है, “यह विश्वास करना मुश्किल है कि देश में सर्वाधिक राजनीतिक रूप से “प्रगतिशील” परिसर होने के बावजूद, यहां रहने वाले युवकों को यह समझाने की जरूरत है कि होली पर उनका यह प्रदर्शन किसी भी लिहाज से ‘दिल बहलाव’ नहीं था, बल्कि अपनी ताकत का एक आक्रामक और दहशत पैदा करने वाला प्रदर्शन था। उनका यह कृत्य किसी भी मायने में इस संस्थान में रहने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण होने का संकेत नहीं देता है।”

यह विश्वविद्यालय के इतिहास में  पहले कभी नहीं हुआ था कि इतने सारे  युवा पुरुषों के एक समूह ने अर्धनग्न हो कर  महिला छात्रावासों के परिसर में परेड की हो। इन हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने बताया कि इस घटना से वे खुद को काफी असहज महसूस करने लगीं हैं और अपनी निजता में हुई इस खुली घुसपैठ से खौफजदा हैं। 

इस घटना के एक दिन बाद,  यानी 30 मार्च को ‘जेएनयू की महिलाओं’ ने  इस परेड के वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल कर लिखा, “ कल होली के नाम पर जो कुछ हुआ, वह बेहद शर्मनाक,  घृणास्पद और असभ्य था। हम जेएनयू की महिलाएं, इन कृतियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती हैं और जेएनयू प्रशासन से अश्लीलता के सार्वजनिक प्रदर्शन और आपराधिक डर पैदा करने के ऐसे  कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती हैं।” छात्राओं ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस घटना के बाद इसकी शिकायत हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्डस से की थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जेएनयू की छात्राओं ने यह सवाल उठाया कि कैसे कोई आदमी या समूह नतीजों की परवाह किए बगैर अश्लीलता के ऐसे प्रदर्शनों में कैसे हिस्सा ले सकता है?  इन छात्राओं ने इसके लिए जीएससीएएसएच के विघटन को जिम्मेदार ठहराया। वक्तव्य में कहा गया है कि जेएनयू प्रशासन द्वारा जीएससीएएसएच को विघटित किए जाने के बाद से यह परिसर नैतिक वातावरण में छीजन का सामना कर रहा है। इस वजह से ही महिलाओं और दमित जेंडर के व्यक्तियों के सुरक्षित स्थानों में रोजाना ही अतिक्रमण होता है।”

वक्तव्य में कहा गया है, “अब समय आ गया है कि इस कैंपस में लैंगिक संवेदनशीलता में आ रही गिरावट को रोकने के लिए जेएनयू समुदाय द्वारा सचेत प्रयास किया जाए और ऐसे पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से दी जा रही धमकियों, उनकी तुच्छता और महिलाओं की गतिविधियों का लगातार मजाक उड़ाने तथा इस तरह के कृत्यों के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर अपनी विषाक्त मर्दानगी के प्रदर्शन के जरिये अपना प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयासों को विफल करने के लिए काम करना चाहिए। 

 अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

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