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किसान-मज़दूर संगठनों का ऐलान; ‘संयुक्त रूप से करेंगे रेल रोको और जेल भरो आंदोलन’

किसान और मज़दूर संगठनों ने ऐलान किया कि वे भविष्य में साझा संघर्ष करते हुए फरवरी में रेल रोको और जेल भरो आंदोलन करेंगे और केंद्र सरकार के कार्यालयों के सामने धरना प्रदर्शन भी करेंगे।
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फाइल फ़ोटो। फ़ोटो साभार : Peoples Democracy

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच सीटीयू ने गुरुवार को दिल्ली में एक बैठक की। ये बैठक, नई दिल्ली में श्रमिकों और किसानों के पहले संयुक्त अखिल भारतीय सम्मेलन (24 अगस्त 2023) में चर्चा की गईं मांगों, भविष्य के अभियानों और कार्यों की समीक्षा के लिए हुई। सीटीयू और एसकेएम ने सरकार पर कॉरपोरेट-सांप्रदायिक गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की ओर से राष्ट्रीय संपत्ति और वित्त को मुट्ठी भर निजी कॉरपोरेट को सौंप दिया गया और भारतीय लोकतंत्र की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है।

मीटिंग के बाद किसान और मज़दूर संगठनों ने ऐलान किया कि वे भविष्य में साझा संघर्ष करते हुए फरवरी में रेल रोको आंदोलन करेंगे और केंद्र सरकार के कार्यालयों के सामने धरना प्रदर्शन भी करेंगे। उन्होंने सरकार पर मज़दूर-किसान विरोधी होने के आरोप लगाया।

सीटीयू ने अपने बयान में कहा कि "यह सरकार मेहनतकश लोगों के जीवन और आजीविका पर लगातार हमले कर रही है और विभिन्न कानूनों, कार्यकारी आदेशों और नीतिगत अभियानों के माध्यम से श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी कदम उठा रही है। सरकार लोगों के विभिन्न वर्गों के सभी लोकतांत्रिक दावों और असहमति की सभी आवाजों को दबा रही है। केंद्र सरकार मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला करती है और पीड़ितों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपी अपराधियों को बचाती है, जिससे कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम होता है।”

बयान में आगे कहा गया, "हमने देखा है कि श्रमिकों और किसानों के विभिन्न वर्ग और जनता के अन्य वर्ग पहले से ही केंद्र सरकार की ग़लत नीतियों के ख़िलाफ़ कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं और उस भावना में, सीटीयू और एसकेएम ने लोगों ने मांगें पूरी न होने तक संघर्ष को तेज़ करने और सांप्रदायिक-कॉरपोरेट गठजोड़ का मुकाबला करने का संकल्प दोहराया।”

मीटिंग के बाद केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, फेडरेशनों, एसोसिएशनों और एसकेएम के संयुक्त मंच ने संयुक्त रूप से 16 फरवरी को विभिन्न रूपों में पूरे भारत में श्रमिकों और किसानों की बड़े पैमाने पर लामबंदी का संयुक्त आह्वान किया। संगठनों ने जानकारी दी कि उनके साझे आंदोलन में रेल रोको, जेल भरो, ग्रामीण बंद, जुलूस और केंद्र सरकार के कार्यालयों के सामने धरना प्रदर्शन शामिल है।

एसकेएम और सीटीयू ने बताया कि 24 अगस्त, 2023 को नई दिल्ली में आयोजित श्रमिक-किसान संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में पहले ही श्रमिकों, किसानों और कृषि श्रमिकों की मांगों का व्यापक चार्टर तैयार कर लिया गया था और 26-28 नवंबर 2023 को विशाल देशव्यापी महापड़ाव के माध्यम से इसके लिए दबाव डाला गया था।

एसकेएम और सीटीयू के साझे मंच ने क्षेत्रीय स्तर पर आंदोलन कर रहे सभी मज़दूर-किसानों से अनुरोध किया है कि वे 16 फरवरी के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में शामिल हों। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों, युवाओं, शिक्षकों, महिलाओं, सामाजिक आंदोलनों, कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में सभी लोगों से समर्थन की अपील की है।

आपको बता दें, 26 जनवरी, 2024 को गणतंत्र दिवस के दिन एसकेएम का जिला मुख्यालयों पर ट्रैक्टर/वाहन परेड का भी कार्यक्रम है। एसकेएम ने अपने कार्यकर्ताओं से वाहनों के साथ इसमें शामिल होने की अपील भी जारी की है। एसकेएम ने बताया कि इसके कार्यकर्ता पत्रक वितरित करने, मांग पत्र वितरित करने और बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 10 से 20 जनवरी को सभी गांवों में घर-घर जाकर जन जागरण अभियान चलाएंगे।

किसान-मज़दूरों की प्रमुख मांगें:

* गारंटी खरीद के साथ सभी फसलों के लिए C2+50% फॉर्मूले से एमएसपी दी जाए।
* श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
* क़र्ज़ से मुक्ति के लिए छोटे और मध्यम किसान परिवारों की व्यापक ऋण माफी की जाए।
* 4 श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए, मौलिक अधिकार के रूप में रोज़गार की गारंटी दी जाए।
* रेलवे, रक्षा, बिजली सहित सार्वजनिक उपक्रमों का कोई निजीकरण न हो।
* नौकरियों का अनुबंधीकरण न हो और पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
* प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 200 दिन काम और 600 रुपये दैनिक वेतन के साथ मनरेगा को मजबूत किया जाए।
* एलएआरआर अधिनियम 2013 (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013) को लागू किया जाए।

मज़दूर और किसानों के साझे मंच ने सभी से धर्म, जाति के सवाल की जगह मज़दूर और किसानों के सवालों को मुद्दा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने श्रमिक, किसान और जन समर्थक नीतियां लागू करने का आह्वान करते हुए लोकतंत्र, संघवाद, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मूल सिद्धांतों को बचाने की अपील की।

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