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जीटीए चुनाव : दार्जिलिंग में आएगी स्थिरता?

9 महीने पुरानी पार्टी, भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा ने दार्जिलिंग के गोरखा क्षेत्रीय प्रशासनिक सभा के लिए हुए चुनाव में, 45 सदस्यीय संस्था की 27 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है।
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कोलकाता: दार्जिलिंग हिल्स के क्षेत्रीय स्वायत्त निकाय, गोरखा प्रादेशिक प्रशासन (GTA) के चुनावों का परिणाम, पहाड़ी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो लंबे समय से संघर्ष और हिंसा के लिए शापित रही है। अनित थापा के नौ महीने पुरानी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के पक्ष में आए स्पष्ट फैसले और आए चुनाव परिणाम, जो लगभग पांच साल की देरी से हुए हैं, "पहाड़ियों में शांति और स्थिरता के अग्रदूत साबित होंगे।"  "मेरे शब्दों को याद रखना", बीजीपीएम के अध्यक्ष थापा ने दार्जिलिंग से न्यूज़क्लिक से बात करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए।

थापा की बीजीपीएम ने 45-सदस्यीय जीटीए सभा में 27 सीटें जीत कर एक आरामदायक बहुमत दर्ज किया है, इस जीत ने सबको चौंका दिया है, विश्वास से भरे थापा ने समझाया कि: “मैं सभी सदस्यों से सहयोग लूँगा, जिसमें आठ ‘हमरो पार्टी’ के सदस्य और उनके नेता अजय एडवर्ड्स भी शामिल हैं। हां, राजनीतिक रूप से, वे विपक्षी दल होंगे; लेकिन मैं उनके सहयोग की तलाश में रहूँगा और उन्हें साथ लूँगा। मेरा रूख 5 इंडिपेंडेंट जीते सदस्यों, और निश्चित रूप से, तृणमूल कांग्रेस, जोकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी है और जिसने अप्रत्याशित रूप से 10 में से पांच सीटों पर जीत दर्ज़ की है, के प्रति भी सहयोगी होगा। राजनीतिक रूप से, बीजीपीएम और टीएमसी पिछले कुछ महीनों से एक साथ काम कर रहे हैं। बहुत लंबे समय तक पहाड़ियों को नुकसान उठाना पड़ा है, विकास के मुद्दे पीछे चले गए थे, यह जरूरी नहीं कि यह पैसे की कमी से हुआ बल्कि अस्थिरता के कारण ऐसा हुआ है। थापा ने कहा कि, हमें विकास के मोर्चे को पकड़ना होगा। लोगों ने मेरी पार्टी को एक जिम्मेदारी दी है; हमें काम करना होगा।”

जीतने वाले पांच निर्दलीय लोगों में से दो को गोरखा जनमुकती मोर्चा (जीजेएम) के बिमल गुरुंग  का समर्थन हासिल था, यदपि गुरुंग खुद चुनावों से दूर रहे थे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वे बोर्ड में टीएमसी की भागीदारी चाहते हैं, थापा ने कहा, “मैं बुधवार को नाबन्ना (राज्य सचिवालय) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने वाला हूं। हम इस मामले पर चर्चा करेंगे; लेकिन मेरे लिए यह कोई मुद्दा नहीं है।”

आगे पूछे जाने पर कि क्या वे अपने गोरखालैंड के अभियान के संकल्प के तौर पर वादा पुरा करने के लिए बीजीपीएम बोर्ड के गठन के बाद गोरखालैंड बनाने के पक्ष में प्रस्ताव पास करा सकते हैं; क्योंकि मुख्यमंत्री राज्य के किसी भी किस्म के विभाजन के खिलाफ है, तो थापा ने टिप्पणी की कि वे अपना वादा निभाएंगे। “हम राज्य सरकार और केंद्र को प्रस्ताव की प्रतियां भेजेंगे। मैं इसमें किसी भी किस्म की झिझक की परिकल्पना नहीं करता हूँ।”

बीजीपीएम के महासचिव अमर लामा ने न्यूज़क्लिक को बताया कि बोर्ड के गठन के बाद औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, पार्टी लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूरा प्रयास करेगी। “समस्याएं काफी बढ़ गई हैं और लोगों ने हमें उन्हे सुलझाने के लिए जनादेश दिया है। लामा कहते हैं, उनकी समस्याओं को हल करना हमारे सामने एकमात्र विकल्प है।”

थापा को जीटीए चलाने का कुछ अनुभव है, जब उन्होने और बिनय तमांग ने गुरुंग से नाता तोड़ा लिया था, लेकिन जीजेएम के एक गुट का नेतृत्व किया था। तमांग ने भी जीटीए में एक पारी खेली थी – वह भी नामांकन के जरिये प्रशासन का हिस्सा बने थे, और नौकरशाही के भीतर उनकी चलती थी। 

साथ ही, थापा ने कोलकाता पार्टी मुख्यालय में टीएमसी ध्वज को स्वीकार करने के बाद तमांग के सात मिलकर बीजीपीएम की स्थापना की थी। थापा के बीजीपीएम बनाने के लगभग तीन महीने बाद, एडवर्ड्स- जो मूल रूप से गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के साथ हैं – उसने  अपने को बीजीपीएम से दूर कर लिया और अपनी खुद की पार्टी का हमरो पार्टी का गठन किया, जिसने कुछ महीने पहले दार्जिलिंग म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (DMC) का चुनाव जीता था। लेकिन एडवर्ड्स खुद उस चुनाव में कम मतों से हार गए थे। हालांकि, इस बार, वे खुद आठ विजयी हमरो पार्टी के उम्मीदवारों में से एक हैं। उन्होंने पहाड़ के लोगों को आश्वासन दिया है कि  उनकी पार्टी एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में कार्य करेगी।

मुद्दा यह है कि पहाड़ी मतदाताओं ने नए राजनीतिक दलों को प्राथमिकता दी है - डीएमसी के लिए हमरो पार्टी और जीटीए में बीजीपीएम। यह स्पष्ट है कि गुरुंग, जो 2007 से 2017 तक पहाड़ी राजनीति पर हावी थे, जब उनकी जीजेएम, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी थी, ने हाल ही में जीटीए चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा पाई है।

गोरखालैंड के समर्थन में 2017 में गुरुंग ने जो 100-दिवसीय हिंसक आंदोलन चलाया था, वह उनके राजनीतिक करियर के लिए बहुत महंगा साबित हुआ है। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज़ हैं। वे बैंक खातों का संचालन नहीं कर सकते हैं और परिस्थितियों ने उन्हे छिपने पर मजबूर कर दिया है। वे गर्मियों में हुए 2021 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले फिर से दिखाई दिए, और भाजपा से जीजेएम को दूर किया और धीरे-धीरे टीएमसी के करीब आ गए थे। 

एक समय पर,  जीजेएम के नेताओं के रूप में गुरुंग, थापा और तमांग के तीन गुट थे और वे सभी टीएमसी समर्थक बन गए थे। संसाधन उनकी पहुंच से बाहर हो गए थे, अब यह देखा जाना बाकी है कि थापा को सत्तारूढ़ दल से कितनी मदद मिल सकती है।

जीजेएम के परिणामों और आगे की कार्यवाई के बारे में पुछे जाने पर, पार्टी के महासचिव रोशन गिरी ने न्यूज़क्लिक को बताया, “लोगों ने बीजीपीएम को चुना है, इसलिए हमें इसे स्वीकार करना होगा। हमारी पार्टी पहले राजनीतिक स्थिति का जायजा लेगी।” यह पूछे जाने पर कि क्या वे उम्मीद करते हैं कि बीजीपीएम के जीटीए बोर्ड के गठन के बाद, थापा गोरखालैंड के समर्थन में प्रस्ताव पारित करवा पाएंगे, तो गिरी ने कहा कि जीजेएम चाहता है कि थापा अपना वचन निभाए। "और मैंने यह सार्वजनिक रूप से भी कहा है"।

वयोवृद्ध हिल के राजनेता और जन आंदोलन पार्टी के प्रमुख हरका बहादुर छेत्री, जो धन की कमी के कारण चुनावों से दूर रहे, उनका विचार है कि लंबे समय के बाद जीटीए चुनाव के माध्यम से पहाड़ियों में एक स्वस्थ राजनीतिक स्थिति विकसित हुई है। उन्होंने कहा, "लोगों ने स्थिरता के लिए मतदान किया है, हालांकि 56 प्रतिशत मतदान काफी कम था और कुछ अप्रत्याशित था।”

ऐसे कई मुद्दे हैं जिनपर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया है। चाय एस्टेट्स और सिनकोना प्लांटेशन में श्रमिकों के लिए भूमि के पट्टे देने की एक बड़ी मांग है। छेत्री के मुताबिक, पीने के पानी की कमी ने 'पीने का पानी के माफिया' को जन्म दिया है जो होटल, रेस्तरां और पर्यटकों का शोषण कर रहे हैं।

राज्य का सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग इस मामले में बुरी तरह से विफल रहा है और सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों की स्थिति बहुत खराब है। मौजूदा बुनियादी ढांचे को छात्रों को आकर्षित करने और ड्रॉप-आउट को रोकने के लिए काम करना होगा। आधुनिक कार पार्किंग सुविधाओं के लिए लंबे समय से लंबित प्रस्ताव, जिसके लिए धन उपलब्ध था, लेकिन उपयोग नहीं किया गया था, को सक्रिय करना होगा। एक कार्यात्मक अधीनस्थ सिविल सेवा बोर्ड के सेटअप में देरी नहीं होनी चाहिए।

छेत्री ने कलिम्पोंग से न्यूज़क्लिक को बताया, "तेज गति काम करने की जरूरत है ताकि बड़ी संख्या में उन रिक्तियों को भरा जा सके जो विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से मौजूद हैं।" 

छेत्री ने, गुरुंग के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा, जो लंबे समय से उनकी पार्टी के प्रवक्ता थे, “उनका समर्थन आधार मिट गया है। फिर से प्रासंगिक बनना आसान नहीं होगा।”

सिलिगुरी महाकुमा परिषद (एसएमपी) के लिए चुनाव आयोजित किए गए थे जिनके अधिकार क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। टीएमसी ने पहली बार उन चुनावों में तीनों स्तरों में एक मजबूत जीत दर्ज की है। एक तरह से यह फरवरी में, सिलिगुरी नगर निगम चुनाव जीतने के बाद टीएमसी के लिए एक बैक-टू-बैक जीत है, जो कि सिलिगुरी उप-विभाजन के शहरी हिस्से से बना है।

बीजेपी, जिसने पिछले साल विधानसभा चुनावों और 2019 लोक सभा चुनावों में अपनी उपस्थिति महसूस कराई थी, उसने इस बार खराब प्रदर्शन किया है। वामपंथी, जो कई वर्षों से एसएमपी में एक प्रमुख ताक़त थी, इसे अभी अपने खोए आधार को फिर से हासिल करना है। 1988 में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल के संविधान और दार्जिलिंग जिला परिषद को भंग करने के बाद एसएमपी का गठन 1989 में किया गया था। 

लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार है। व्यक्त विचार निजी हैं।

 

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