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कश्मीरी गुर्जर-बकरवाल: न्याय के लिए संघर्ष!

अपर-कास्ट पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति कैटेगरी में शामिल करने के भाजपा सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गुर्जर और बकरवाल समुदायों ने श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन किया।

अपर-कास्ट पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति कैटेगरी में शामिल करने के भाजपा सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गुर्जर और बकरवाल समुदायों ने श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन किया। केंद्र ने संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023 का प्रस्ताव रखा। संविधान के प्रारूपकारों द्वारा अनुच्छेद 341 के तहत गुर्जरों और बकरवालों को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गई थी। अनुसूचित जनजातियां ऐतिहासिक दृष्टि से वंचित समूह हैं। पहाड़ी जो एक जातीय समूह है उसे जम्मू और कश्मीर में तीन अन्य जातीय समूहों के साथ अनुसूचित जनजाति के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा: पद्दारी, गद्दा ब्राह्मण और कोली। इन वंचित समूहों के ऐतिहासिक नुक़सानों को दूर करने और समाज में उनके समावेश को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को मान्यता देते हुए, 'अनुसूचित जाति' का वर्गीकरण इन वंचित समुदायों के लिए अद्वितीय सुरक्षा उपाय, अवसर और सामाजिक आर्थिक विकास प्रदान करता है।

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