Skip to main content
xआप एक स्वतंत्र और सवाल पूछने वाले मीडिया के हक़दार हैं। हमें आप जैसे पाठक चाहिए। स्वतंत्र और बेबाक मीडिया का समर्थन करें।

ख़बरों के आगे-पीछे: शरद पवार को एनटीआर बनाने की कोशिश?

एनटी रामाराव की आंखों के सामने उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने उनकी बनाई पार्टी पर क़ब्ज़ा कर लिया था। क्या महाराष्ट्र में एनटी रामाराव की कहानी दोहराई जाएगी या पवार अपनी पार्टी बचा लेंगे?
Sharad Pawar
फ़ोटो साभार: PTI

प्रादेशिक पार्टियों में हुई बगावत में एकाध अपवाद को छोड़ दें तो अब तक संस्थापक नेता पार्टी बचाने में कामयाब होते रहे हैं। संस्थापक नेताओं के जीते जी उनकी इच्छा के विरूद्ध पार्टी पर कब्जे की कामयाबी की एकमात्र कहानी तेलुगू देशम पार्टी की है। एनटी रामाराव की आंखों के सामने उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने उनकी बनाई पार्टी पर कब्जा कर लिया। एनटीआर ने अपनी दूसरी पत्नी को पार्टी की कमान देने की कोशिश की थी, लेकिन नायडू ने बाकी परिजनों के साथ मिल कर पार्टी पर कब्जा कर लिया। क्या महाराष्ट्र में एनटी रामाराव की कहानी दोहराई जाएगी या पवार अपनी पार्टी बचा लेंगे? अजित पवार ने अपने चाचा की पार्टी पर कब्जे का पूरी योजना बनाई हुई है, जिसमें भाजपा उनकी मदद कर रही है। जिस तरह से एकनाथ शिंदे शिव सेना तोड़ कर अलग हुए और चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी को असली शिव सेना मान लिया उसी तरह से एनसीपी के साथ भी हो सकता है। लेकिन सवाल है कि क्या शरद पवार हार मान कर घर बैठ जाएंगे? ऐसा होने की संभावना कम है। शरद पवार लड़ेंगे। ज़रूरत पड़ी तो नई पार्टी बनाएंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि उनकी विरासत अजित पवार के पास न जाए। इस लिहाज़ से महाराष्ट्र का अगला चुनाव देश के किसी भी राज्य के मुकाबले ज़्यादा दिलचस्प होगा। वहां इस पर नज़र रहेगी कि शरद पवार और अजित पवार की पार्टी में से कौन बाजी मारती है। अगर पार्टी तोड़ने का पूरा खेल शरद पवार का हुआ तो बात अलग है।

सरकारी चावल का कोई खरीदार नहीं!

केंद्र सरकार ने राजनीतिक कारणों से अचानक राज्यों को चावल बेचने पर रोक तो लगा दी लेकिन अब उसको चावल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई को निर्देश दिया था कि वह घरेलू बाजार के लिए लागू ओपन मार्केट स्कीम के तहत राज्यों को चावल बेचना बंद करे। इसके बदले सरकार ने ई-ऑक्शन के ज़रिए चावल बेचने का निर्देश दिया। सरकार ने जब यह आदेश जारी किया तो कहा गया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की मुफ्त चावल बांटने की योजना को फ़ेल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। कर्नाटक सरकार ने बाजार की कीमत पर चावल खरीदने की इच्छा जताई थी फिर भी उसे चावल नहीं मिला। अब खबर है कि एफसीआई ने चावल की नीलामी शुरू की तो उसे खरीदार नहीं मिल रहा है। सरकारी आदेश के मुताबिक नीलामी की प्रक्रिया में सिर्फ निजी खरीदार ही हिस्सा ले सकते हैं। राज्य सरकारों को इसमें हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है। एफसीआई ने 3.86 लाख मीट्रिक टन चावल की नीलामी का टेंडर किया था लेकिन उसको सिर्फ 170 मीट्रिक टन की बोली मिली। एफसीआई ने नीलामी की कीमत प्रति क्विंटल 3,173 रखी है और जिस 170 मीट्रिक टन की बोली लगी है उसकी औसत कीमत 3,175.35 रुपए रही, जबकि कर्नाटक सरकार 3400 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत पर खरीदने को तैयार थी।

शिंदे होंगे अजित पवार के पांचवे शिकार!

अजित पवार को लेकर पिछले कुछ दिन से कई संयोगों की चर्चा हो रही है, जिसमें एक संयोग यह है कि वे जिस मुख्यमंत्री की सरकार में उप मुख्यमंत्री बनते हैं वह मुख्यमंत्री समय से पहले हट जाता है या उसका कद कम हो जाता है। अब तक वे चार मुख्यमंत्रियों के साथ उप मुख्यमंत्री बने हैं और किसी ने कार्यकाल पूरा नहीं किया। उलटे सबका कद कम हुआ या वह किसी न किसी मुश्किल में फंसा। अजित पवार सबसे पहले अशोक चव्हाण की सरकार में उप मुख्यमंत्री बने थे। अशोक चव्हाण के ऊपर आदर्श सोसायटी घोटाले का आरोप लगा और उनको मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनकी जगह पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री बने, जिसमें फिर अजित पवार उप मुख्यमंत्री बने। उनकी कमान में कांग्रेस बुरी तरह से हारी, जिसके बाद देवेंद्र फड़णवीस मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अजित पवार 2019 के नवंबर में फड़णवीस की सरकार में उप मुख्यमंत्री बने। लेकिन इस बार फड़नवीस चार दिन ही मुख्यमंत्री रह पाए। फिर फड़णवीस की जगह उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने तो अजित पवार उनकी सरकार में उप मुख्यमंत्री बन गए। ढाई साल बाद ठाकरे की न सिर्फ सरकार गिरी, बल्कि पार्टी भी टूट गई। अब एकनाथ शिंदे की सरकार में अजित पवार उप मुख्यमंत्री हैं और उनके बनने के एक हफ्ते के भीतर ही स्पीकर ने शिंदे को अयोग्य ठहराने की मांग वाली उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है। यह भी कहा जा रहा है कि उन पर इस्तीफा देने का दबाव है। इसीलिए कहा जा रहा है कि अजित पवार का पांचवां शिकार शिंदे हो सकते हैं।

सिर्फ केजरीवाल ही कर रहे हैं व्यापारियों की चिंता!

ऐसा लग रहा है कि देश के व्यापारियों की चिंता अकेले अरविंद केजरीवाल को है, क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के दायरे में लाने और ईडी को इस मामले में शामिल करने के फैसले का विरोध सिर्फ आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने किया है। उन्होंने इसे बड़ा मुद्दा बनाया है। हालांकि हैरानी की बात है कि मंगलवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में यह मुद्दा नही बना। केजरीवाल ने सभी राज्यो से अपील की थी कि वे इसका विरोध करे और बदलने की मांग करे। उनकी पार्टी लगातार ट्वीट कर रही है कि 1.38 करोड़ व्यापारियों को इस बदलाव से बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। केजरीवाल का दावा है कि जीएसटी भरना बहुत तकनीकी काम है और ज़रा सी भी गड़बड़ी पर पीएमएलए की धाराएं लग जाएंगी और ईडी गिरफ्तार कर लेगी। यह सचमुच देश के व्यापारियों के लिए बहुत मुश्किल पैदा करने वाला होगा। उनपर हमेशा तलवार लटकी होगी और कारोबार करना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि केजरीवाल जब पहली बार सत्ता में आए थे तो उन्होंने वैट के छापे बंद कराने का ऐलान किया था और बंद करा भी दिए थे। उसकी वजह से कारोबारी उनके साथ जुड़े थे। अब जीएसटी को पीएमएलए के दायरे में लाना और ईडी को अधिकार देना ऐसा ही मुद्दा है, जिस पर केजरीवाल देश भर के व्यापारियों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

अखिलेश का इरादा अलग खिचड़ी पकाने का?

पिछले दिनों तेलंगाना के खम्मम में राहुल गांधी की रैली के दो दिन बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हैदराबाद पहुंच कर मुख्यमंत्री केसीआर यानी के. चंद्रशेखर राव से मुलाकात की। राहुल ने अपनी रैली मे केसीआर पर बड़ा हमला किया था और कहा था कि उन्होंने सभी विपक्षी पार्टियों से कह दिया है कि कांग्रेस किसी ऐसे मंच पर नहीं जाएगी, जहां केसीआर की पार्टी भारत राष्ट्र समिति मौजूद होगी। उन्होंने दो टूक अंदाज में केसीआर की पार्टी के साथ तालमेल से इनकार किया। इसके बाद अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर राव से मुलाकात की। दोनों के बीच क्या बात हुई यह ज़्यादा अहम नहीं है। ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अखिलेश ने कांग्रेस को क्या मैसेज देना चाहा? गौरतलब है कि कांग्रेस ने पटना में विपक्षी पार्टियों की बैठक में समाजवादी पार्टी के साथ मंच साझा किया था और दोनों के बीच तालमेल की संभावना भी जताई जा रही है। अखिलेश को पता है कि कांग्रेस ने केसीआर की पार्टी से दूरी बनाई है और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी केसीआर से दूरी बना रही है। इसके बावजूद उन्होंने केसीआर से मिल कर क्या कांग्रेस से अलग किसी तीसरे मोर्चे की संभावना को हवा दी है?

उधर उत्तर प्रदेश में सपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने कांग्रेस के साथ तालमेल करने की ज़रूरत बताई है। रालोद के नेता जयंत चौधरी दबाव बना रहे हैं कि अगला लोकसभा चुनाव सपा, कांग्रेस और रालोद मिल कर लड़ें। क्या इस दबाव की वजह से अखिलेश यादव ने कांग्रेस को कोई मैसेज दिया है? गौरतलब है कि अब भी कुछ पार्टियां ऐसी हैं, जो कांग्रेस के साथ विपक्षी गठबंधन में शामिल नहीं होगी। आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का भी कांग्रेस और लेफ्ट के साथ तालमेल होने की कोई संभावना नहीं है। अखिलेश यादव जिस तरह के तेवर दिखा रहे हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस वाले विपक्षी मोर्चे से अलग अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, के. चंद्रशेखर राव और अखिलेश यादव कोई तीसरा मोर्चा बना सकते हैं। पहली नज़र में ऐसा लग रहा है कि इससे भाजपा को फायदा होगा लेकिन इससे भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण की संभावना कम होगी।

कई केंद्रीय मंत्री राज्यों में भेजे जाएंगे!

पिछले कुछ दिनों के दौरान भाजपा के शीर्ष नेताओं की एक के बाद एक चार बैठकें हुईं। पहली दो बैठकें पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ गृह मंत्री अमित शाह की हुई। उसके बाद की दो बैठकें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई है। बताया जा रहा है कि इन बैठकों में संगठन और सरकार में बदलाव की रूप-रेखा पर चर्चा हुई और सब कुछ तय हो गया है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो कम से कम आधा दर्जन केंद्रीय मंत्री राज्यों में भेजे जा सकते हैं। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को तेलंगाना का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। कुछ केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव प्रभारी बनाया गया है। जिन मंत्रियों को चुनाव प्रभारी बनाया गया है वे पद पर बने रहेंगे पर प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने वाले मंत्रियों को इस्तीफा देना होगा। उनकी जगह नए मंत्री बनेंगे। जानकार सूत्रों के मुताबिक गुजरात मे अगर सीआर पाटिल को हटाया जाता है तो अध्यक्ष पद के लिए दो मंत्रियों- मनसुख मंडाविया और पुरुषोत्तम रूपाला के नाम की चर्चा है। इसी तरह कर्नाटक में नलिन कुमार कतिल की जगह लेने के लिए केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे का नाम चर्चा में है। उनके अलावा दूसरा नाम अश्वथ नारायण का है। हरियाणा में ओपी धनखड़ का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उनकी जगह लेने के लिए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का नाम तय हुआ बताया जा रहा है। केरल में केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। जम्मू कश्मीर में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। मध्य प्रदेश में अगर बदलाव होता है तो नरेंद्र सिंह तोमर या प्रहलाद पटेल में से कोई एक अध्यक्ष बन सकता है। दोनों केंद्रीय मंत्री हैं।

हर सहयोगी को एक मंत्री पद मिलेगा!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सिद्धांत पर कायम हैं कि सहयोगी पार्टी कितनी भी बड़ी हो उसे केंद्र में सिर्फ एक मंत्री पद मिलेगा। इसी सिद्धांत की वजह से 2019 के चुनाव के बाद जब सरकार बन रही थी तब उस समय की सहयोगी जनता दल (यू) के साथ बदमजगी हुई थी। हालांकि बाद में आरसीपी सिंह अकेले मंत्री बने, लेकिन उससे पहले नीतीश कुमार ने तीन मंत्री पद मांगे थे। जनता दल (यू) की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि एक-एक, दो-दो सांसदों वाली पार्टी का भी एक मंत्री बनेगा और 16 सांसदों वाली पार्टी का भी एक मंत्री बनेगा तो यह 'टके सेर भाजी, टके सेर खाजा’ वाली बात हो जाएगी। लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। बताया जा रहा है कि अब भी अगर केंद्र सरकार में फ़ेरबदल होता है तो हर सहयोगी पार्टी को एक ही मंत्री पद मिलेगा। शिव सेना के एकनाथ शिंदे गुट के पास 13 सांसद हैं, लेकिन उनकी पार्टी से सिर्फ राहुल शेवाले के मंत्री बनने की चर्चा है। इसी तरह एनसीपी के अजित पवार गुट से भी एक मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल मंत्री बन सकते हैं। वे पिछले दिनों अजित पवार के साथ दिल्ली में थे और गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात हुई थी। उधर, अगर अकाली दल की एनडीए में वापसी होती है तो हरसिमरत कौर बादल फिर से मंत्री बन सकती हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान का मंत्री बनना तय बताया जा रहा है। फिलहाल वे अपनी पार्टी के इकलौते सांसद हैं। तेलुगू देशम पार्टी अगर एनडीए से जुड़ती है तो उसका भी एक मंत्री बनेगा।

अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।

टेलीग्राम पर न्यूज़क्लिक को सब्सक्राइब करें

Latest