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मध्‍य प्रदेश पुलिस का आरोप, ''BSP, SP और कांग्रेस नेताओं ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया''

ग्वालियर पुलिस ने बिजनौर से बीएसपी सांसद मलूक नागर और यूपी के सरधना से एसपी विधायक अतुल प्रधान और मुरैना से मौजूदा कांग्रेस नेता के ख़ि‍लाफ़ FIR दर्ज की है।
MP Police
प्रतीकात्मक तस्वीर।

भोपाल: गुर्जर समुदाय के सदस्यों द्वारा ग्वालियर में उग्र प्रदर्शन करने, जिला कलेक्टर कार्यालय पर हमला करने, वाहनों को आग लगाने और पथराव करने के एक दिन बाद, मध्य प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के दो नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। साथ ही एक मौजूदा कांग्रेस विधायक पर हिंसा भड़काने और उसे अंजाम देने का आरोप है।

ग्वालियर पुलिस ने बिजनौर (उ.प्र.) से बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) सांसद मलूक नागर और सरधना (उ.प्र.) से समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक अतुल प्रधान और मुरैना से मौजूदा कांग्रेस नेता राकेश मवई के खिलाफ पड़ाव थाने में FIR दर्ज की है। IPCकी धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसावे देना), 505-बी (सार्वजनिक उत्पात मचाने वाला बयान) और 506 (आपराधिक धमकी) की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।

सोमवार को, गुर्जर समुदाय के सदस्यों ने ग्वालियर के चिरवई नाका पर स्थापित राजा मिहिर भोज की प्रतिमा से टिन कवर हटाने की मांग को लेकर 40 दिवसीय गुज्जर जनजागरण यात्रा के समापन पर फूलबाग मैदान में एक रैली आयोजित की। इस में उन्‍हें समुदाय के लिए उनकी जनसंख्या और अन्य के अनुसार चुनाव टिकटों की मांग की।

ग्वालियर पुलिस की FIR में कहा गया है कि रैली में भड़काऊ भाषण और सरकार विरोधी बयान दिए गए जिससे भीड़ भड़क गई. "जब 1000 से अधिक लोगों की भीड़ ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए कलेक्टर कार्यालय की ओर मार्च किया तो उन्होंने कलेक्टरेट पर हमला किया और वाहनों में आग लगा दी, पथराव किया और इलाके में तबाही मचाई। पड़ाव पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी में कहा गया है कि हालांकि उन्हें उनकी मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी।

कलक्ट्रेट में यह तोड़फोड़ जिला कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह और एसपी राजेश चंदेल की मौजूदगी में हुई। शुरुआत में पुलिस की संख्या कम थी जिससे भीड़ कलक्ट्रेट पर धावा बोलने लगी। बाद में, अधिक बल बुलाया गया और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े लेकिन भीड़ राजमार्ग की ओर बढ़ गई और वहां हिंसा जारी रही।

उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, 200 से ज्यादा आंसू गैस के गोले छोड़े और 50 राउंड फायरिंग की। पुलिस का कहना है कि भीड़ राजमार्ग पर पहुंच गई और सार्वजनिक वाहनों की तोड़-फोड़ की।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीना ने कहा, "पुलिस ने घटना के संबंध में चार पुलिस स्टेशनों में 40 नामित आरोपियों के साथ पांच प्राथमिकी दर्ज की हैं। हमने अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।"

उन्होंने कहा, ''दंगाइयों ने 162 वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया है और 12 पुलिस कर्मियों को चोटें आई हैं।'' उन्होंने कहा कि हम उन व्यक्तियों की शिकायतों पर FIR दर्ज कर रहे हैं जिनके वाहनों को अनियंत्रित भीड़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया है।

राजा मिहिर भोज की वंशावली ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में राजपूत और गुर्जर समुदायों के बीच विवाद की जड़ है और ग्वालियर के चिरवाई नाका पर स्थापित राजा मिहिर भोज की मूर्ति पर 'गुर्जर' शब्द का उल्लेख एक मुद्दा बन गया है। यह कानूनी विवाद है। कोर्ट के आदेश पर प्रतिमा को ढक दिया गया था लेकिन गुर्जर समुदाय की मांग है कि गुर्जर राजा के सम्मान में इसे खोला जाए। उनके अनुसार समुदाय गुर्जर प्रतिहार राजवंश के इतिहास के विरूपण को रोकने की भी मांग कर रहा है जिससे मिहिर भोज संबंधित थे।

इससे पहले, गुर्जर समाज के पदाधिकारी और कार्यक्रम के आयोजकों में से एक, जसवंत सिंह ने दावा किया कि उनके समुदाय पर लंबे समय से अत्याचार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “गुर्जर राजा मिहिर भोज की मूर्ति टिन शेड से ढकी हुई है, जिसे हटाया जाना चाहिए। राजनीतिक दलों को जनसंख्या के अनुसार समुदाय से उम्मीदवार खड़े करने चाहिए।”

उन्होंने सेना में गुर्जर रेजिमेंट के गठन और मुरैना में समुदाय के युवाओं की कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच की भी मांग की।

ग्वालियर के राजनीतिक टिप्पणीकार और पत्रकार राकेश पाठक ने वर्तमान स्थिति के बारे में कहा, "जब राज्य सरकार घरों पर बुलडोजर चला रही है और धार्मिक रैलियों पर थूकने या पथराव के मामलों में कठोर NSA (रासुका) लागू कर रही है ऐसे में पुलिस ने हल्के आरोपों के तहत FIR दर्ज की है।"

(PTI इनपुट के साथ)

अंग्रेजी में प्रकाशित मूल लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

"BSP, SP and Congress Leaders Provoked Crowd for Violence," says MP Police, Booked

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