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बिहार के कटिहार में बिजली की समस्या को लेकर उग्र प्रदर्शन, पुलिस फायरिंग में दो की मौत

पटना में पुलिस मुख्यालय के अनुसार बारसोई थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई इस घटना में एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी एवं विद्युतकर्मी घायल हो गये।
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फ़ोटो साभार : ट्विटर

बिहार के कटिहार जिले में बुधवार को बेहतर बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पथराव के बाद पुलिस की गोलीबारी में दो व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि कई सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पटना में पुलिस मुख्यालय के अनुसार बारसोई थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई इस घटना में एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी एवं विद्युतकर्मी घायल हो गये।

कटिहार के जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने बताया कि इस घटना में दो लोगों के मरने की सूचना है ।

बिहार पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार लगभग साढ़े 12 बजे कटिहार जिले के बारसोई थानाक्षेत्र में बिजली की कथित समस्या को लेकर थाने से लगभग 100 मीटर पूरब बारसोई अनुमंडलीय कार्यालय परिसर स्थित बिजली विभाग के कार्यालय पर लगभग एक हजार की संख्या में स्थानीय नागरिकों के द्वारा उग्र प्रदर्शन किया गया।

उग्र प्रदर्शन के क्रम में भीड़ में सम्मिलित असमाजिक तत्वों ने बिजली कर्मियों पर हमला कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही बिजली विभाग के कार्यालय पर पहुंची पुलिस टीम पर भी उग्र असमाजिक तत्वों द्वारा लाठी-डंडो, ईंट तथा पत्थर से जानलेवा हमला किया गया।

पुलिस के द्वारा उपद्रवियों को पहले चेतावनी दी गयी। चेतावनी नहीं मानने पर सीमित बल प्रयोग कर उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास किया गया लेकिन भीड़ नियंत्रित नहीं हुई तथा हमला करती रही।

विज्ञप्ति के अनुसार अनियंत्रित भीड़ के हमलावर होने तथा नियंत्रित नहीं होने की स्थिति में पुलिस बल के द्वारा बिजली कर्मियों के प्राण रक्षा के लिए एवं आत्मरक्षार्थ नियंत्रित एवं सीमित फायरिंग की गयी।

कटिहार में स्थानीय पुलिस ने मृतक की पहचान खुर्शीद आलम (34) और सोनू कुमार (20) के रूप में की है और वे क्रमशः बासल गांव और बारसोई बाजार के निवासी थे जबकि एक अन्य घायल व्यक्ति नासिर को बेहतर इलाज के लिए सिलीगुडी भेजा गया है ।

कटिहार के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने पत्रकारों से कहा कि आप स्थिति का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि बिजली कार्यालय का शायद ही कोई हिस्सा ऐसा बचा हो जहां तोड़फोड़ और पथराव के संकेत न मिले हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अचानक हिंसक हो गए और परिसर में धावा बोल दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसा कुछ लोगों द्वारा माहौल को खराब करने के लिए किया गया, पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ऐसा लग रहा है क्योंकि यहां... बारसोई का जो इतिहास रहा है, यहां प्रदर्शन तो होते हैं पर अचानक उग्र होने की बात है, उसकी पुलिस गहनतापूर्वक जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

इस बीच इस घटना की विपक्षी भाजपा और भाकपा माले ने तीखी आलोचना की । भाकपा माले बाहर से नीतीश कुमार सरकार का समर्थन करती है।

बिहार विधानसभा में भाकपा माले विधायक दल के नेता मेहबूब आलम ने भी मृतकों के परिजनों के लिए 20 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को अनुग्रह राशि देने की मांग की।

उन्होंने भाजपा पर कटिहार में भीड़ को उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘ भीड़ अचानक हिंसक हो गई और हमें यकीन है कि भाजपा ने उन्हें उकसाया ।’’

आलम ने यह भी कहा कि पुलिस को संयम बरतना चाहिए था और गोली नहीं चलानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

(न्यूज़ एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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