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मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच जल पर्यटन पर क्‍यों गहराया संकट?

नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने एक आदेश दिया है जिसमें कहा है कि डीजल—पेट्रोल से चलने वाले क्रूज व मोटर बोट का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दें।
MP Tourism
Photo Courtesy : MP Tourism

भोपाल: मध्यप्रदेश से गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू आफ यूनिटी के बीच प्रस्तावित जल पर्यटन पर संकट गहरा गया है। इन दोनों ही राज्यों के बीच नर्मदा नदी पर 100 सीटर वाले क्रूज का संचालन किया जाना था। इसकी शुरूआत बड़वानी जिले के राजघाट से होनी थी। मध्यप्रदेश सरकार ने इसकी घोषणा भी कर दी थी। सरकार का दावा था कि इससे जल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह पीपीपी मोड पर अमल में लाया जाना था।

इसी बीच मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित बड़ा तालाब जो कि रामसर साइट है और अन्य वाटर बाडीज को लेकर एक आदेश दिया है। जिसमें कहा है कि डीजल—पेट्रोल से चलने वाले क्रूज व मोटर बोट का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दें। एनजीटी ने राज्य सरकार को 3 महीने के भीतर इस आदेश का पालन करने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ अफरोज अहमद की जूरी ने यह आदेश सुनाया है।

बात यह है कि मध्यप्रदेश की सबसे पहली रामसर साइट बड़े तालाब और नर्मदा नदी, उस पर बनाए गए बांध के अलावा कई वाटर बॉडीज से लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। इन्हीं वाटर बॉडीज का पानी खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग करते हैं, ग्रामीणों के निस्तार का आधार भी यही पानी है यह जल प्रदूषित हो रहा था, जिसकी वजह अन्य स्त्रोतों से मिलने वाला प्लास्टिक, रसायनिक कचरा तो है ही साथ ही पेट्रोल, डीजल आधारित क्रूज और मोटर बोट भी है। इनसे उत्सर्जित सल्फर, नाईट्रोजन ऑक्साइड पानी को प्रदूषित करते हैं जो कि इंसानों व जलीय जीवों के लिए नुकसानदायक है।

इस नुकसान को देखते हुए पर्यावरणविदृ और बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल के पूर्व प्रोफेसर डॉ सुभाष सी पांडेय ने एनजीटी में एक याचिका लगाई थी।

वाटर बॉडीज के किनारे से पक्‍के निर्माण हटाने के आदेश 

एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि तालाबों व जलाशयों के किनारे जितने भी बड़े और पक्के निर्माण होंगे, उन्हें भी तोड़ना होगा।

असल बात यह है कि राजधानी भोपाल में स्थिति बड़े तालाब के किनारे थोड़ी बहुत निर्माण नहीं किए हैं, बल्कि हजारों पक्के निर्माण हो चुके हैं, जो अतिक्रमण के दायरे में है। बीते कई वर्षों से  इन पक्के निर्माणों को हटाने की मुहिम चलती रही है लेकिन प्रशासन अब तक शत—प्रतिशत इसका पालन नहीं करवा पाया है।

यही हाल प्रदेश की अन्य वाटर बॉडीज का है। जैसे— नर्मदापुरम जिले में स्थित प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के किनारे तवा बांध के मढ़ई बैक वाटर क्षेत्र में दर्जनों होटले बनाई जा चुकी है। इनमें से कुछ को हटाने को लेकर आदेश भी होते रहे हैं। चर्चा रही है कि यहां रसूखदारों का कब्जा है।

कमोवेश यही हाल प्रदेश के बड़े जलाशयों में शामिल बरगी बांध, तवा बांध, हनुमंतिया टापू के आसपास भी है।

याचिकाकर्ता का दावा— पर्यावरणीय संबंधी नियमों का हो रहा उल्लंघन

याचिकाकर्ता का दावा है कि पर्यावरणीय संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है। वर्तमान में बड़े तालाब में जो क्रूज चल रहा है, वो एयर एक्ट 1981, वाटर एक्ट 1974, अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2000, एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 और वेटलैंड रुल्स 2016 का उल्लंघन है। प्रतिवदियों द्वारा इसमें पर्यावरणीय नियमों पालन संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, इसीलिए इनके द्वारा भोज वेटलैंड सहित मप्र राज्य की सभी वाटर बाडीज में मोटर बोट और क्रूज चलाना अवैध है। ऐसे में इन नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

एनजीटी ने यह भी कहा

यदि क्रूज एक बड़ी संख्या के मनोरंजन के लिए चलाए जा रहे हैं तो माना जाएगा कि उद्याेग चल रहा है। यह व्यावसाय के दायरे में आएगा। जल स्त्रोतों में प्रदूषण नियमों की निगरानी और सहमति के बिना इनका संचालन संभव नहीं है।

• यह सुनिश्चत करें कि बोट संचालन के समय उसकी फिटनेस, मेंटेनेंस, इससे निकलने वाली आवाज और लीकेज समेत अन्य बारीकियों का परीक्षण प्राथमिकता से करें। साथ ही इनमें चलने वाली बोट में ग्रीन फ्यूल का इस्तेमाल अनिवार्य हो।

• सभी मोटर वोट का संचालन तुरंत बंद कर दें। भोज वेटलैंड रामसर साइट है, लेकिन मोटर बोट या क्रूज का संचालन सभी वेटलैंड में प्रतिबंधित होगा। इसके लिए पीसीबी और वन विभाग मौके का परीक्षण कर तीन माह में अपनी रिपोर्ट एनजीटी के रजिस्ट्रार को सौंपेंगे।

एमओईएफ व सीपीसीबी को कोट किया

एनजीटी ने आदेश में कहा है कि वेटलैंड नियमों का पालन कराने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (एमओईएफ) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) गाइडलाइन बनाएं। मध्यप्रदेश वन विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड :एमपीपीसीबी से कहा है कि रिजर्व फारेस्ट, नेशनल पार्क व ईकोसेंसटिव जोन के अंदर ऐसी गतिविधियों का संचालन हो रहा हो तो पूरी तरह और सख्ती से बंद कराए। यदि संचालन हो रहा है तो सुनिश्चित किया जाए कि उससे नुकसान न हो। वहीं वेटलैंड नियमों का पालन कराने के लिए एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर एसओपी तैयार करें।

एनजीटी ने दिखाया रास्ता: फोर स्ट्रोक इंजन वाली बोट चलाना संभव

एनजीटी ने आदेश में कहा है कि प्रदेश के वो जलाशय जो वेटलैंड नहीं हैं, ऐसी समस्त वाटर बाडी में फोर स्ट्रोक इंजन की बोट चलाई जा सकती है, जो कि पूर्व से कुछ देश में चल भी रही है लेकिन यह पर्यावरणीय नियमों के अनुकूल होना चाहिए।

चप्पू वाली नावों पर रोक नहीं

असल में बीते कुछ वर्षों से मप्र के तालाबों व जलाशयों में जल पर्यटन को काफी तवज्जों दी जा रही है लेकिन इसके लिए क्रूज व मोटर बोट चलाने का जो तरीका अपनाया जा रहा था उसकी वजह से पानी प्रदूषित हो रहा था। मछलियों एवं दूसरे जीवों के जीवन पर विपरीत असर पड़ रहा था। हाल ही में एक रिपोर्ट भी आई थी कि जल प्रदूषण के कारण मछलियों का आकार छोटा होता जा रहा है। 

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