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विश्व बैंक के गरीबी के आंकड़ों पर ज्यादा भरोसा क्यों नहीं?

दुनिया भर के अधिकतर देशों में वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की आर्थिक नीतियां लागू होती हैं। बहुत सारे जानकार बताते हैं दुनिया भर में गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही नीतियां हैं।

दुनिया भर के अधिकतर देशों में वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की आर्थिक नीतियां लागू होती हैं। बहुत सारे जानकार बताते हैं दुनिया भर में गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही नीतियां हैं। इसी वर्ल्ड बैंक की तरफ से दुनिया भर की गरीबी पर रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है। जिसके मुताबिक साल 2020 में कोविड की वजह से भारत में 5 करोड़ 60 लाख गरीबी रेखा से नीचे चले गए। लेकिन क्या यह संख्या इतनी ही होनी चाहिए? वर्ल्ड बैंक ने गरीबी रेखा तय करने के लिए केवल 44 रुपये प्रतिदिन प्रति व्यक्ति की सीमा बनाई है। मतलब इससे ज्यादा कोई कमाता तो वह गरीब नहीं है। क्या गरीबी रेखा तय करने के लिए इस सीमा को उचित माना जाए? इन सब कारणों से यह सवाल बनता है कि क्या वर्ल्ड बैंक जितना बता रहा है, भारत सहित पूरी दुनिया में क्या  केवल उतने ही गरीब है ? इन्हीं सब मुद्दों पर इस विडियो में वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार आनिंदो चक्रवती से बात की गयी है।  

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