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‘विपक्षी राज्य सरकारों से भेदभाव’: केरल के सीएम विजयन की अगुवाई में केंद्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन!

दिल्ली के जंतर-मंतर पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए और केंद्र पर विपक्षी राज्य सरकारों का हक़ मारने का आरोप लगाया।
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गुरूवार, 8 फरवरी को राजधानी दिल्ली में संसद से कुछ सौ मीटर की दूरी स्थित जंतर-मंतर पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में उनके सभी मंत्री और वाम मोर्चा के दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री विजयन ने केंद्र पर विपक्षी राज्य सरकारों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्र पर संघीय ढांचे को कमज़ोर करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि केंद्र की ओर से उन्हें उनके हिस्से का बजट नहीं दिया जा रहा।

मुख्यमंत्री विजयन समेत एलडीएफ के सांसद और विधायक, सीपीआई महासचिव डी राजा, सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता फारुख अब्दुल्ला, वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता इस धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके अलावा कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री ने या तो अपने किसी प्रतिनिधि को भेजा या वीडियो संदेश भेजे।

इससे पहले 7 फरवरी को कांग्रेस शासित कर्नाटक की सरकार ने भी अपने सभी मंत्री, विधायक और सांसदों के साथ यही आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। आपको बता दें बंगाल, झारखंड, पंजाब और तमिलनाडु सरकार भी कई बार केंद्र पर इस तरह के आरोप लगा चुकी है।

हालांकि कांग्रेस के 7 फरवरी के प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपनी सरकार का बचाव करते हुए इसे कांग्रेस पार्टी की देश बांटने की कोशिश करार दिया और कहा कि ये लोग देश में दक्षिण भारत बनाम उत्तर भारत कर रहें है। इसका जवाब देते हुए आज के प्रदर्शन में शामिल केरल के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने न्यूज़क्लिक से खास बातचीत में कहा "पहले प्रधानमंत्री को अपना भौगोलिक ज्ञान बढ़ाना चाहिए। आज यहां पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री भी आए हैं, क्या ये दक्षिण के राज्य हैं? ये दक्षिण और उत्तर का सवाल नहीं है। ये देश के संविधान और संघीय ढांचे को बचाने का सवाल है।”

केरल से सीपीआई के सांसद संतोष ने कहा, "प्रधानमंत्री का कल का भाषण हमारे लिए शर्मनाक था कि हमारे पीएम कितना तथ्यहीन और झूठा बयान देते हैं। हम यहां कोई भीख नहीं अपना हक मांग रहे हैं।”

प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि 8 फरवरी 2024 का दिन भारत गणराज्य के इतिहास में रेड लेटर डे (लाल फीताशाही) के रूप में जाना जाएगा। विजयन ने कहा कि "केरल के प्रति केंद्र के भेदभाव से राज्य में आर्थिक तंगी आ गई है और यही कारण है कि वे प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए हैं। केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली के कारण राज्यों और केंद्र सरकार के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। यह देशभर में खासकर विपक्ष शासित राज्यों में देखा जा रहा है।”

विजयन ने कहा, "सभी लोग अब इसके ख़िलाफ़ कड़ा विरोध दर्ज कराने और भारत के संघीय ढांचे को बचाने के लिए एक साथ आए हैं। हम नए सिरे से अपनी लड़ाई की शुरुआत कर रहे हैं जो राज्यों के साथ न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित करने की शुरुआत करेगी। यह लड़ाई केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखने का भी प्रयास करेगी।”

केरल सरकार के कैबिनेट मंत्री एमबी राजेश ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "ये सरकार राज्य के अधिकारों पर हमला कर रही है और गरीबों के कामों को रोक रही है। हम यहां अपने लिए नहीं बल्कि अपनी जनता के लिए फंड मांगने आए हैं जो हमारा हक है।"

मंत्री एमबी राजेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अलग-अलग बहाने बनाकर उनके हिस्से का फंड रोक रही है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने प्रवासी कामगारों के लिए घर बनाए लेकिन केंद्र ने सहयोग देने से मना कर दिया। केंद्र इन घरों में प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाने पर ज़ोर देता रहा। हमने केंद्र के इस निर्देश को मानने से इनकार कर दिया था क्योंकि ये संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है। ये अनुच्छेद नागरिकों को मानवीय गरिमा के साथ रहने की गारंटी देता है।”

राजेश कहते हैं, "असल बात ये है कि केंद्र सरकार, शहरी और ग्रामीण इलाकों में मकान बनाने के पूरे पैसे नहीं दे रही है। पिछले सात साल में राज्य ने इसके लिए 17,103 करोड़ रुपये दिए हैं जबकि केंद्र ने सिर्फ 2083 करोड़ रुपये दिए हैं। साफ है कि केंद्र का योगदान काफी कम है।”

वहीं दूसरी ओर केंद्र में बैठी सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के नेताओं ने इस धरने को लेकर कहा कि ये लोग अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए इस तरह के प्रदर्शन कर रहे हैं।

सीपीआई(एम) की पोलिट ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने न्यूज़क्लिक से खास बातचीत मे कहा, "ये शर्मनाक है क्योंकि केरल देश में विकास के हर पैमाने पर नंबर वन है। इस पर देश के पीएम को खुश होना चाहिए क्योंकि वो पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं लेकिन पता नहीं उन्हें क्या चिढ़ है जो वो लगातार राज्य का विरोध करते हैं। बीजेपी का कोई राज्य विकास के पैमाने पर केरल का मुकाबला नहीं कर पा रहा है इसलिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।”

इस प्रदर्शन में शामिल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "आज केरल के मुख्यमंत्री को यहां कामकाज छोड़कर धरना-प्रदर्शन करने आना पड़ा। देश को यह दिन भी देखना पड़ा। आधे राज्यों में विपक्ष की सरकार है और आधे में उनकी लेकिन लग रहा है कि केंद्र सरकार ने विपक्ष को लेकर हिंदुस्तान-पाकिस्तान बना रखा है।”

केजरीवाल आगे कहते हैं, "क्या आप विपक्षी राज्यों के सत्तर करोड़ लोगों को अपना नहीं मानते? विपक्ष की सरकारों को तंग करने के लिए सभी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। पहला तरीका - फंड जारी नहीं कर रहे, दूसरा तरीका - एलजी और राज्यपाल काम नहीं करने दे रहे, तीसरा तरीका - एजेंसी के ज़रिए किसी को भी जेल में डाल रहे हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "पंजाब के तो विधानसभा सत्र को ही इल-लीगल बता दिया था। इसके बाद हम कोर्ट गए तब कहते हैं कि लीगल है। इस तरह से रोज़ाना हमारी फाइलों पर राज्यपाल बैठ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि राज्यपाल सेलेक्टेड है और सरकार एलेक्टेड, इसलिए राज्यपाल कानूनों पर नहीं बैठ सकते हैं। हमने मंडी को गांवों से जोड़ने के लिए सड़के बनाई लेकिन केंद्र सरकार ने उसके लिए भी 55 हज़ार करोड़ रूपये रोके जो कि उनका हक है।" मान ने हालिया चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के दौरान कथित धांधली पर बीजेपी को घेरा और कहा कि "ये एक छोटा-से मेयर चुनाव में इतनी धांधली कर रहे हैं, मई में देश के चुनाव में क्या करेंगे?”

वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, "ये सरकार देश के संविधान पर हमला कर रही है। दुनिया में ऐसा कहीं उदाहरण नहीं जहां कोई पार्टी चुनी हुई सरकार को धनबल और जोड़-तोड़ कर गिराए, अपनी सरकार बनाए और जनता की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करे। क्या यही लोकतंत्र है?”

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