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यूक्रेन युद्ध के अंत का कोई आसार नहीं

राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की सहित यूक्रेन के नेताओं के साथ हुई अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की बैठकों ने बहुत सारे भ्रम पैदा कर दिये हैं।
Ukraine
फ़ोटो साभार: पीटीआई

कीव में राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की सहित यूक्रेन के नेताओं के साथ हुई अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की बैठकों ने बहुत सारे भ्रम और ग़लत धारणायें पैदा कर दिए हैं। एक तरफ़,जहां व्हाइट हाउस का कहना है कि उनके इस दौरे का मक़सद "यूक्रेन और वहां के लोगों को संयुक्त राज्य अमेरिका के दृढ़ समर्थन को रेखांकित करना है",वहीं बयान में कहा गया है कि सुलिवन ने "आर्थिक और मानवीय सहायता के निरंतर किये जा रहे प्रावधान के साथ-साथ रूस को उसकी आक्रामकता के लिए ज़िम्मेदार ठहराने को लेकर भागीदारों के साथ चल रहे प्रयासों की भी पुष्टि की है।"

हालांकि, अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात का इशारा कर दिया है कि सुलिवन का असली मिशन मॉस्को के साथ बातचीत करने के लिए ज़ेलेंस्की को "ख़ामोशी के साथ इशारा करना" और आग्रह करना था कि "कीव को चल रहे युद्ध को मुनासिब और अमन के साथ ख़त्म करने की अपनी इच्छा का इज़हार करना चाहिए।" बाद के राजनीतिक परिदृश्य से पता चलता है कि ज़ेलेंस्की ने वास्तव में सुलिवन की उस "हल्के से इशारे" पर ध्यान दिया। अमेरिकी मीडिया ने यह भी बताया कि अमेरिकी अधिकारी कुछ समय से यूक्रेनियों को इस बात के लिए कुरेद रहे हैं।

वाशिंगटन पोस्ट ने पिछले हफ़्ते यह बताया था कि जो बाइडेन प्रशासन ने निजी तौर पर यूक्रेनी अधिकारियों को यह जताते हुए रूस के साथ बातचीत में शामिल होने की इच्छा दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया था कि युद्ध की क़ीमत और अवधि,दोनों को लेकर अमेरिका और उसके कुछ सहयोगियों में निराशा बढ़ रही है। लेकिन, ज़ाहिरा तौर पर यूक्रेन के ये अधिकारी पीछे हट गए थे।

सुलिवन ने सोमवार को यह दावा करते हुए मीडिया की अटकलबाज़ियों को और मसालेदार बना दिया है कि अमेरिका के पास वरिष्ठ स्तर पर रूस के साथ संवाद करने के लिए चैनल हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पहले अज्ञात अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारियों का हवाले से बताया था कि सुलिवन ने हाल ही में क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव और रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोले पेत्रुशेव के साथ यूक्रेन में संघर्ष पर कई गोपनीय बैठकें की थीं। (मास्को ने इन रिपोर्टों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।)

इस मामले का निचोड़ यह है कि सुलिवन डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच बढ़ती आलोचना का मुक़ाबला करने के मक़सद से एक ठोस रणनीति के तहत अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (8 नवंबर) से पहले एक पीआर अभ्यास कर रहा है कि बाइडेन प्रशासन यूक्रेन में युद्ध को ख़त्म करने की कोशिश को लेकर राजनयिक रास्ते से बच रहा है। इसके अलावा, सुलिवन की रची गयी नाटकीयत ने इस धारणा को विकृत करने का मक़सद भी हासिल कर लिया है कि बाइडेन नहीं,बल्कि ज़ेलेंस्की संवाद और शांति वार्ता को लेकर अड़ियल बने हुए हैं।

असल में सभी संकेत यही बाताते हैं कि बाइडेन प्रशासन यूक्रेन में लंबी दौड़ की तैयारी कर रहा है। स्टार्स एंड स्ट्राइप्स ने बुधवार को बताया कि एक थ्री-स्टार रैंक का जनरल जर्मनी में उस नये सेना मुख्यालय का कमान संभालेगा, जिसे सुरक्षा सहायता समूह यूक्रेन या एसएजीयू कहा जाता है, जिसमें यूक्रेन के लिए सुरक्षा सहायता के समन्वय के लिए ज़िम्मेदार तक़रीबन 300 अमेरिकी सेवा सदस्य शामिल होंगे।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले शुक्रवार को रिपोर्ट किया था कि रविवार को इलिनोइस में रॉक आइलैंड आर्सेनल में पहले अमेरिकी सेना मुख्यालय के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एंटोनियो एगुटो जूनियर इस नई नौकरी के लिए एक प्रमुख उम्मीदवार थे।  

एसएजीयू अमेरिकी सेना यूरोप और अफ़्रीका मुख्यालय विज़बाइडेन में स्थित होगा। पेंटागन की उप प्रेस सचिव सबरीना सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि यह नई कमान "यह सुनिश्चित करेगी कि हम लंबे समय तक यूक्रेन का समर्थन जारी रखने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने कहा कि अमेरिका "यूक्रेन के लिए तब तक प्रतिबद्ध है, जब तक वह सहायता चाहता है।"

इस बात की संभावना नहीं है कि मास्को सुलिवन की कुटिलता में फंस गया है। यह विश्वास करने का कारण है कि क्लिंटन घराने का नवरूढ़िवादी विचारों वाला एक ऐसे व्यक्ति हैं,जिन्होंने ज़ेलेंस्की से उस खेरसॉन पर नियोजित यूक्रेनी आक्रमण में तेज़ी लाने का आग्रह किया होगा, जो काफ़ी समय से क्रीमिया के लिए निर्णायक लड़ाई और काला सागर/आज़ोव समुद्री बंदरगाहों पर नियंत्रण के रूप में बना हुआ है और एक कामयाब राष्ट्र के रूप में यूक्रेन की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और रूस को घेरने वाला अमेरिका और नाटो के लिए अहम हित के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।

इन सब बातों से बढ़कर बाइडेन प्रशासन को यूक्रेन से सफलता की कहानी की बुरी तरह से इसलिए ज़रूरत है, क्योंकि नव-निर्वाचित कांग्रेस जनवरी में प्रतिनिधि सभा में संभावित रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत के साथ आयोजित होगी।

बेशक,रूस खेरसॉन में यूक्रेनी आक्रमण को गंभीरता से ले रहा है। बुधवार को मास्को में एक अचानक किये गये ऐलान में रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने खेरसॉन क्षेत्र में नीपर नदी के पश्चिमी किनारे से एक सैन्य टुकड़ी को वापस बुलाने का आदेश दे दिया।

हक़ीक़त यह है कि क्रेमलिन इस तरह के पीछे हटने का आदेश देने को लेकर रूसी जनता की आलोचना की जोखिम उठा रहा है (यह एक ऐसा इलाक़ा है,जिसे पुतिन ने रूस का एक अभिन्न अंग घोषित किया हुआ है) और जो यूक्रेनी सैन्य ख़तरे की गंभीरता को रेखांकित करता है और जो रक्षा रेखा को मज़बूत करने की अनिवार्य ज़रूरत भी है।

ज़ेलेंस्की मास्को को यूक्रेन के "विसैन्यीकरण" को लेकर किये जाने वाले अपने वादों से मुकरने के लिए मजबूर कर रहा है ! वह अभी भी जुझारू मूड में है। सोमवार को ज़ेलेंस्की ने शांति की पेशकश की थी, लेकिन इसके लिए समझौते की पांच शर्तों रख दी थीं।ये शर्तें हैं:

  • यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करना;
  • रूस संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करे;
  • रूस सभी युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करे;
  • प्रत्येक युद्ध अपराधी को दंडित करे; और
  • गारंटी दे कि ऐसा हमला और नृशंसता दोबारा नहीं हो।

ज़ेलेंस्की ने जो एकमात्र "रियायत" दी, वह यह है कि उन्होंने अपनी उस पूर्व शर्त का उल्लेख नहीं किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को किसी भी बातचीत से पहले अपना पद छोड़ देना चाहिए। यह एक कामयाब नहीं होने वाली शर्त है।

यूक्रेन में युद्ध का अंत होता नहीं दिखता है। वैसे, हालांकि मध्यावधि चुनाव आम तौर पर एक अमेरिकी राष्ट्रपति चक्र में वह बिंदु होते हैं, जहां यह उम्मीद की जाती है कि शीर्ष कैबिनेट सदस्यों का बदलना शुरू हो जायेगा, लेकिन रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के साथ ऐसा होने का कोई संकेत नहीं दिखता है।

69 साल के ऑस्टिन यूक्रेन संघर्ष में एक ऐसी अहम आवाज़ हैं,जिन्होंने कीव के लिए दुनिया भर से अरबों डॉलर की सैन्य सहायता जुटाई है, बाइडेन का अनुमान है कि युद्ध के प्रयास और ज़्यादा मज़बूत और गहरे हो सकते हैं और यह पेंटागन के शीर्ष रैंक को बदलने का वक़्त नहीं है।

असल में ज़मीनी हालात से यही पता चलता है कि डोनेतस्क में उगलेदार और बखमुट के इलाक़ों में चल रहे रूसी अभियानों को यूक्रेनी बलों की तरफ़ से ज़बरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।यह उसस रूसी विचार के विपरीत है कि कीव की सेना जर्जर है और उसका मनोबल टूटा हुआ है।

ख़ासकर उगलेदार के आसपास रूसियों की बढ़त अहम चौराहे पर स्थित पावलोवका गांव के कीचड़ में जाकर फंस गयी है और तीन दिन पहले एक भीषण लड़ाई में कथित तौर पर दोनों ही पक्षों के सैनिक भारी संख्या में हताहत हुए हैं। खेरसॉन में पीछे हटने का पुतिन का फ़ैसला शायद इसी तरह की स्थिति से बचने की उम्मीद में किया गया फ़ैसला था, क्योंकि रूसियों को नीपर नदी के पश्चिमी किनारे पर अपनी सेना की आपूर्ति करने के लिए सैन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बेशक,यह गंदी तस्वीर मुकम्मल तस्वीर इसलिए नहीं है, क्योंकि रूसी लामबंदी के बाद फिर से संगठित होने और फिर से आपूर्ति करने का चरण अभी भी जारी है और डोनबास और खेरसॉन में चल रही लड़ाई सामरिक स्तर पर है और इसमें सैनिकों की बड़ी आवाजाही शामिल नहीं है।

इसी तरह यूक्रेनी डिपो, कमांड सेंटर और तोपखाने और वायु-रक्षा प्रणालियों पर गहन रूसी हमलों के साथ-साथ यूक्रेन की सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं और ऊर्जा प्रणाली की तबाही ने अभी तक युद्ध छेड़ने की कीव की क्षमता को प्रभावित नहीं किया है।

इस बीच खेरसॉन इलाक़े में अग्रिम मोर्चे पर स्थिति रूसियों के लिए बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। यूक्रेनी सेना रूसी रक्षा पंक्ति को लगातार तोड़ने के लिए खेरसॉन शहर की ओर आगे बढ़ रही है। पश्चिमी सलाहकारों और भाड़े के सैनिकों द्वारा समर्थित बड़े पैमाने पर यूक्रेनी हमले की उम्मीद कभी भी की जा सकती है। अब तक रूसी अपने मोर्चे पर बने हुए हैं, चल रहे यूक्रेनी हमलों को पीछे ढकेल रहे हैं और अपने बचाव को मज़बूत कर रहे हैं।

खेरसॉन शहर से चल रहीं यूक्रेन की तोपें क्रीमिया के लिए ख़तरा पैदा कर सकती हैं। मॉस्को के क़रीबी सहयोगी, सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूसिक के पूर्वानुमान के मुताबिक़, "चुनौतीपूर्ण समय हमारे सामने है। अगली सर्दी इससे भी अधिक मुश्किल होगी, क्योंकि हम स्टेलिनग्राद की लड़ाई का सामना कर रहे हैं, यूक्रेन में संघर्ष में निर्णायक लड़ाई, खेरसॉन की लड़ाई है। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि दोनों पक्षों के प्रमुख शहर को लेकर होने वाले संघर्षों में हज़ारों टैंक, विमान और तोपखानों की टुकड़ियां तैनात किये जाने की संभावना है।

वूसिक का कहना है, "पश्चिम सोचता है कि वह रूस को इस तरह बर्बाद करने में सक्षम होगा, जबकि रूस का मानना है कि वह युद्ध की शुरुआत में जो हासिल किया था, उसका बचाव करने और इसे ख़त्म करने में सक्षम होगा।"

एम.के.भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वह उज़्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। इनके विचार निजी हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

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