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कटाक्ष: पीएम, पीएम, पीएम नंबर वन!

विरोधी जो इसका शोर मचा रहे हैं कि मोदी जी ने भारतीय नागरिकों के मारे जाने पर विरोध क्यों नहीं जताया, पीएम नंबर वन बनने पर ट्रंप की बधाई पर अपने जवाबी धन्यवाद में, यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया, उनकी नीयत क्या है, यह मोदी जी अच्छी तरह से पहचानते हैं!
MODI NO 1
कार्टून, कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के X हैंडल से साभार

अब बोलें, क्या कहते हैं बात-बात में और बहुत बार तो बिना बात के ही, नेहरू जी के देश का पहला प्रधानमंत्री होने की याद दिलाने वाले। मोदी जी ने इंदिरा जी तो इंदिरा जी, उनके बाप को भी आखिरकार पछाड़ ही दिया। 

नेहरू जी के प्रधानमंत्री के पद पर रहने के कुल 4398 दिन के सामने, मोदी ने 4399 दिन की उससे लंबी लकीर खींच दी और नेहरू जी को पीछे छोड़ दिया। और सच पूछिए तो मोदी जी, नेहरू जी को पीछे छोडऩे पर ही रुक नहीं गए। नेहरू जी को पीछे तो उन्होंने 10 जून को ही छोड़ दिया था। उसके बाद भी मोदी जी लगातार नेहरू जी को ज्यादा से ज्यादा पीछे छोड़ते जा रहे हैं और अपनी जीत का अंतर बढ़ाते ही जा रहे हैं। यह दूसरी बात है कि मोदी जी के पीएम नंबर वन बनने के जश्न अभी चल ही रहे हैं।

सच पूछिए तो अभी तो शुरुआत है। अभी तो मंत्री लोगों ने मंदिर-मंदिर जाकर, भगवान का जो थैंक यू किया है, मोदी जी को नंबर पीएम बनाने के लिए, उसकी तस्वीरें हर तरह के मीडिया पर आयी ही  हैं। अभी तो मोदी जी के मंत्रिमंडल ने, ईश्वर का धन्यवाद किया है कि उसने, मोदी जी को उनका प्रधान बनने के लिए भेजा। अभी तो एनडीए ने अपने भाग्य की सराहना की है कि मोदी है, तो ही दिल्ली की गद्दी पर उनका कब्जा मुमकिन है। अभी तो विदेश मंत्रालय के बाबुओं की सिफारिश पर विदेशी नेताओं के भेजे बधाई संदेश मोदी जी ने सोशल मीडिया पर पाए हैं और मोदी जी ने उनको जवाबी धन्यवाद ज्ञापन के संदेश पठाए हैं। पार्टी लंबी चलेगी। अभी तो पार्टी शुरू हुई है।

पब्लिक वाला जश्न तो अभी शुरू भी नहीं हुआ है। क्या कीजै, मोदी जी उधर नेहरू जी को पछाड़ने में बिजी थे और रोड शो, रैलियों वगैरह में कटौती कर के तेल के डालर बचा रहे थे और इधर पब्लिक कॉकरोचों के पीछे लग गयी। और तो और मोदी जी-शाह जी को ठीक से बंगाल फतेह करने को सेलिब्रेट करने का मौका तक नहीं दिया। माने बंगाल में थोड़ा-बहुत सेलिब्रेशन तो हुआ, जो राज में बैठकर कल तक सब को पीटते थे, वो तृणमूली थोड़े-बहुत पिटे, उससे ज्यादा कुछ डर से कुछ लालच से टूटे, पर बस इतना ही। 

और तो और राजधानी दिल्ली में तो उनके सांसदों को मोदी जी की पार्टी में ठीक से मिलाया तक नहीं जा सका, जैसे आम आदमी पार्टी वालों को मिलाया गया था। तब तक न जाने कहां से कॉकरोच निकल आए। और निकलते ही चले आ रहे हैं। हद्द तो ये है कि जिन्होंने पेपर का प तक नहीं देखा होगा, वो भी पेपर लीक, पेपर लीक का शोर मचा रहे हैं। और मोदी जी के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं, यह जानते हुए भी कि मोदी जी के राज में इस्तीफे नहीं होते। यह मोदी जी के राज का सिद्धांत है। और मोदी जी अपने सिद्धांत पर कभी समझौता नहीं करते। 

इसीलिए, मोदी जी हफ्ते भर का ब्रेक लेकर, यूरोप के दौरे पर निकल गए हैं। तब तक कॉकरोचों का जोश भी ठंडा पड़ जाएगा और बड़े-बड़े नेताओं से सीधे, पीएम नंबर वन बनने की बधाई लेने और उसके लिए धन्यवाद देने का मौका भी मिल जाएगा। किसी मैडल-वैडल का जुगाड़ भी हो गया, तो वह बोनस में। वैसे मोदी जी को मैडलों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। नेहरू जी-वेहरू जी को तो वह न जाने कब का पछाड़ चुके थे, अब तो वह दुनिया भर में सबसे ज्यादा विदेशी मैडल बटोरने वाले नेता बन चुके हैं। फिर भी अगर मैडल आते रहते हैं और बाकी विश्व नेताओं से मोदी जी के मैडल फासला बढ़ता रहता है, तो मोदी जी भी मान देने वाले का सम्मान करने में कोताही नहीं होने देते।

फिर भी, सिर्फ कॉकरोच ही नहीं मोदी जी के पुराने विरोधी भी, उनके पीएम नंबर वन बनने के जश्न में रंग में भंग डालने से बाज नहीं आए हैं। मोदी जी अच्छी तरह समझते हैं कि ये उनके नेहरू जी को पछाड़कर पीएम नंबर वन बनने पर, इन विरोधियों की खिसियाहट ही है, जो ये पार्टी का मजा किरकिरा करने पर तुले हैं। वर्ना बताइए, तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने का शोर मचाकर, मोदी जी के पीएम नंबर वन बनने की पार्टी खराब करने की क्या तुक हुई? लड़ाई अमेरिका-ईरान की। मिसाइल मारी अमेरिका ने। जहाज राम न जाने किस का, हमारा नहीं। जहाज न जाने किस के समंदर में, हमारे में नहीं। ये नाविक कमाई के चक्कर में दूसरों के जहाजों पर काम करने गए थे, हमारे यानी सरकार के कहने से नहीं। फिर लड़ाई के बीच में आकर मारे गए, तो इसमें मोदी क्या कर सकता है? अमेरिका ने मोदी से पूछकर हेलफायर मिसाइल थोड़े ही मारी थी। मरने वाले मोदी के लिए मरे हैं क्या? फिर भी, मोदी की सरकार ने विरोध जताया है कि नहीं? अमेरिका का नाम भले ही नहीं लिया हो, ऐसे हमले बंद करने के लिए कहा है कि नहीं? और क्या चाहिए! बच्चे की जान लोगे क्या?

विरोधी जो इसका शोर मचा रहे हैं कि मोदी जी ने भारतीय नागरिकों के मारे जाने पर विरोध क्यों नहीं जताया, पीएम नंबर वन बनने पर ट्रंप की बधाई पर अपने जवाबी धन्यवाद में, यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया, उनकी नीयत क्या है, यह मोदी जी अच्छी तरह से पहचानते हैं! अमरीका के साथ रिश्ते बढ़ाने में तो मोदी जी बहुत-बहुत पहले ही पीएम नंबर वन बन चुके थे। न नेहरू, न इंदिरा, न राजीव, न राव, न वाजपेयी, यहां तक कि देसाई तक ने, न कभी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अमेरिका जाकर चुनाव प्रचार किया था और न किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भारत में ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ कराया था! मोदी का यही नंबर वन होना, इनकी आंखों में खटकता है। ये चाहते हैं कि मोदी, ट्रंप से झगड़ा कर लें और वह भी सिर्फ तीन नाविकों के चक्कर में--मजबूरी में जयशंकर को जिस तरह विरोध जताना पड़ा, मोदी वैसे ही विरोध जताए और जो जवाब रूबियो ने जयशंकर को दिया, वैसा ही जवाब ट्रंप, मोदी को सुनाए! यानी अमेरिका-भारत का रिश्ता नीचे खिसक कर, नेहरू नहीं तो कम से कम इंदिरा गांधी के टैम वाले दर्जे पर आ जाए। पर पीएम नंबर वन के दर्जे के साथ मोदी कंप्रोमाइज कभी नहीं कर सकता। आखिर, पेरिस में ट्रंप से डीयर फ्रेंड मोदी भी तो कहलवाना है।

और ये जो व्हाट्सएप इतिहास के विरोध के नाम पर, मोदी जी के पीएम नंबर वन होने पर ही सवाल उठा रहे हैं, उनकी दलीलें सिर्फ तकनीकी हैं। माना कि नेहरू जी कुल 16 साल, 282 दिन देश के प्रधानमंत्री रहे थे और इंदिरा गांधी, 15 साल 356 दिन। इस हिसाब से मोदी जी को इंदिरा गांधी का रिकार्ड तोड़ने के लिए भी अभी चार साल इंतजार करना पड़ेगा और नेहरू का रिकार्ड तोड़ने के लिए, पांच साल। पर लोहिया जी ने कहा था--जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं। मोदी जी ने भी पांच साल इंतजार नहीं किया। इंदिरा गांधी का रिकार्ड यह कहकर छोटा किया और तोड़ दिया कि उनके करीब 16 साल में एक ब्रेक था। और नेहरू का रिकार्ड यह कहकर छोटा कर दिया कि उनके करीब सत्रह साल में, पहले पांच साल तो स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव से पहले के थे। और हो गए मोदी जी, पीएम नंबर वन!

अब प्लीज कोई ये मत कहना कि मोदी जी ज्यादा वक्त तक प्रधानमंत्री पद पर रह भी जाएं तब भी, भारत के पहले प्रधानमंत्री यानी पीएम नंबर वन तो नेहरू जी ही रहेंगे। ये सरासर चीटिंग है। पहले या आखिरी से क्या फर्क पड़ता है, अब पीएम नंबर वन तो मोदी जी ही माने जाएंगे। ट्रंप तक की बधाई आ चुकी है और क्या चाहिए?

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं)

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