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महिला यौन हिंसा, बुलडोजर राज...बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ ऐपवा का प्रदर्शन

20 जून को लखनऊ के इको गार्डन में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) का एक दिवसीय धरना आयोजित हुआ और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम 9 सूत्री माँग पत्र सौंपा गया।
AIPWA
धरना स्थल इको गार्डन लखनऊ

क्यों नहीं उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाओं पर रोक लग पा रही.... तमाम दावों के बावजूद क्यों आज भी हमारी मासूम बच्चियाँ, बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं.... मिशन शक्ति और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं और नारे क्यों खोखले साबित हो रहे हैं..... बलात्कार पीड़िताओं को आखिर इंसाफ कब मिलेगा... आज हमारा प्रदेश पुलिस स्टेट क्यों बनता जा रहा है...... बलात्कार और अपराध में लिप्त पुलिस वालों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती (चंदौली, सिद्धार्थ नगर, ललितपुर की घटनाओ को केन्द्र में रखते हुए) ... हमारे बच्चों को अग्निवीर बनाकर क्यों उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा... बुलडोजर राज आख़िर कब तक....... आदि इन सवालों के साथ 20 जून को लखनऊ के इको गार्डन में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) का एक दिवसीय धरना आयोजित हुआ और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम 9 सूत्री माँगपत्र सौंपा गया।

प्रदेश में धारा 144 लगने और ट्रेने रद्द होने के बावजूद चंदौली, गाजीपुर, बनारस,मऊ, भदोही, लखीमपुर, सीतापुर, रायबरेली, लखनऊ. .... आदि जिलों से करीब 200 महिलाएँ धरने में पहुँची थीं। इसी बीच खबर मिलती है कि सोनभद्र से धरने में शामिल होने आ रही कुछ महिलाओं को पुलिस ने उस वक्त रोक लिया जब वे ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुँची थीं। ऐपवा राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने बताया कि ऐपवा के आंदोलन में शिरकत करने आ रही सोनभद्र ऐपवा की  जिला सचिव लालती देवी एवं कमेटी की अन्य महिलाओं को वहां की पुलिस ने घेरेबंदी करके, अपशब्द कहकर ट्रेन में बैठने तक नहीं दिया, उन्हें तब छोड़ा गया जब ट्रेन स्टेशन से जा चुकी थी। घटना को लेकर  धरने में मौजूद हर महिला ने एक स्वर में सोनभद्र पुलिस द्वारा महिलाओं संग किये गए दुर्व्यवहार और गाली गलौच की कड़े शब्दों में निंदा की और दोषी पुकिसकर्मियो के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करने की मांग भी धरने में उठाते हुए माँगपत्र में शामिल किया गया। 

महिलाओं ने कहा कि वे मानती हैं कि आंदोलनों में शिरकत करना हर महिला का संवैधानिक अधिकार है और इसकी अवेहलना करने वाले पुकिसकर्मियो को निश्चित तौर पर दंडित करना चाहिए। धरने पर मुख्य वक्ता के बतौर बोलते हुए ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के शासन मे महिलाओं के ऊपर हिंसा, हत्या, बलात्कार की घटनाओं की शर्मनाक ढंग से इज़ाफ़ा हुआ है।अपराधियों और बलात्कारियों को सजा मिलने के बजाय सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। बहुमत से दुबारा सत्ता हासिल करने वाले और प्रदेश से अपराध कम करने और कानून का राज स्थापित करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को पुलिस स्टेट में तब्दील कर दिया है। यूपी पुलिस घरों में घुसकर बेटियों को मार रही है, हत्या और बलात्कार तक में शामिल हो रही है और उन पर किसी भी तरह की कोई क़ानूनी कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री तानाशाही ढंग से संविधान, कानून और न्यायालय को ध्वस्त कर रहे हैं। 

ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने प्रदेश में चल रही बुलडोजर संस्कृति पर सवाल उठाते हुए कहा की डबल इंजन की भाजपा सरकार बुलडोज़र राजनीति के तहत उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर नफ़रत और हिंसा का सांप्रदायिक ज़हर घोलने की कोशिश कर रही है। इसकी आड़ में आंदोलनकारियों को भी परेशान कर रही है, गैरकानूनी ढंग से उनके मकानों पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें ध्वस्त कर रही है। प्रयागराज में परवीन फातिमा और आफ़रीन, जावेद एक्टिविस्ट के साथ हुई शर्मनाक घटना इसका ताजा उदाहरण हमारे सामने है। तो वहीं ऐपवा प्रदेश उपाध्यक्ष आरती राय ने कहा कि यह साफ दिखाई देता है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी-2 के शासन में महिला हिंसा और बलात्कार की घटनाओं में तेजी आई हैं। लखनऊ, लखीमपुरखीरी, सीतापुर, कानपुर, प्रयागराज आदि जिलों में महिलाओं के साथ हिंसा, हत्या, गैंग रेप की जघन्य घटनाएं सामने आई हैं। ललितपुर, सिद्धार्थनगर, चन्दौली जिलों में आश्चर्यजनक रूप से खुद यूपी पुलिस अपराधी और बलात्कारी है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि योगी सरकार में प्रदेश की पुलिस निरंकुश हो चुकी है।

लखनऊ की ऐपवा सहसंयोजक कमला गौतम ने कहा कि एक तरफ महंगाई आसमान छू रही है, उज्जवला के तहत मिला सलेंडर महंगा होने के चलते खाली पड़े हैं, हालात यह है कि सरकारी अस्पतालों में लाखों की दवायें बेकार पड़ी सड़ रही हैं, लेकिन मरीजों को ऊँचे दामो पर बाहर से दवायें खरीदनी पड़ रही हैं। वे कहती हैं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर ढंग से लागू करने के बजाय और गरीबों को 5 किलो फ्री राशन पर चुनाव जीतने का दम्भ भरने वाली योगी सरकार आज गांव-गांव में मनरेगा में काम बंद कर रही है और राशन कार्डों को जबरन रद्द कर रही है।

समर्थन में आये विभिन्न संगठन

ऐपवा के इस एक दिवसीय धरने को समर्थन देने विभिन्न संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हुए जिसमें मुख्य रूप से, ट्रेड यूनियन एक्टू, छात्र संगठन आईसा, मजदूर किसान संगठन, इंकलाबी नौजवान संगठन ( RYA) भाकपा- माले शामिल था। अपनी बात रखते हुए ऐक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अग्निवीर योजना प्रचलित श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई नई श्रम संहिता के तहत फिक्स टर्म इमप्लाइमेंट का कानून है जो पहले ही यह सरकार बना चुकी है जिसे अग्निवीर योजना के तहत सेना में भी लागू किए जा रहा है। इसलिए पुराने श्रम कानूनों को पुनः लागू करने की लड़ाई को तेज करना होगा।

लखनऊ के भाकपा माले जिला सचिव रमेश सिंह सेंगर ने अपनी  कहा कि जनता के हर मोर्चे पर फेल साबित हो चुकी है, योगी सरकार की बुलडोजर राजनीति गरीबों, दलितों, आदिवासियों, मुस्लिमों को उनकी जमीनों से उजाड़ रही है, बड़े पैमाने पर उनका दमन कर रही है इसलिए आज जनता का बड़ा हिस्सा अपने अधिकारों के लिए सड़क पर आ चुका है। तो वहीं आइसा के प्रदेश अध्यक्ष आयुष ने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार राष्ट्रीय सम्पत्तियों को एक एक करके बड़े पूंजीपतियों के हित में बेच देना चाहती है इसी तरह से भाजपा की शिक्षा के निजीकरण की नीति के चलते आज लाखों करोड़ों छात्र छात्राएं उच्च शिक्षा से महरूम हो रहे हैं। आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने भाजपा की अग्निपथ योजना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह भारत के बेरोजगार नौजवानों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि आरवाईए सेना में स्थायी भर्ती को सुनिश्चित करने और संविदा पर भर्ती को बंद करने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि वह अग्निपथ के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ है और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे नौजवानों के पुलिसिया उत्पीड़न के ख़िलाफ़ है।

ऐपवा की माँगे

लखनऊ,लखीमपुरखीरी, सीतापुर, कानपुर, प्रयागराज, ललितपुर, सिद्धार्थनगर, चंदौली आदि जिलों में घटी महिला यौन हिंसा, गैंग रेप, हत्या, की घटनाओ को केन्द्र में रखकर ऐपवा की माँग है कि इन तमाम घटनाओ में महिलाओं, नाबालिग लड़कियों को न्याय मिले और अपराधियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की गारंटी की जाए। ललितपुर, सिद्धार्थनगर, चन्दौली, जिन जिलों में आश्चर्यजनक रूप से  खुद यूपी पुलिस हत्यारी और बलात्कारी है वहाँ दोषी पुलिस कर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और हत्या का मुकदमा(302) दर्ज हो। साथ ही चंदौली की निशा यादव के पिता पर से अभी अपराधी मुकदमे वापस लिए जाएं। निशा यादव केस की हाईकोर्ट के मातहत स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, परिवार को सुरक्षा और समुचित मुआवज़ा दिया जाए। साथ ही मई माह ने सिद्धार्थ नगर  की घटना पुलिस द्वारा की गई मुस्लिम समुदाय के प्रति नफरत और हिंसा की कार्रवाई है। ऐपवा मांग करती है कि  सिद्धार्थनगर में पुलिस दबिश के दौरान पुलिस की गोली लगने से रोशनी की मौत की न्यायिक जांच  की जाय। मई माह में ही लखनऊ के दुबग्गा की रहने वाली सामूहिक दुष्कर्म की शिकार नाबालिग छात्रा ( जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है) और उसके परिवार के लिए त्वरित न्याय की गारंटी की जाये।

ऐपवा की मांग है कि गैरकानूनी ढंग से परवीन के मकान को ध्वस्त करने वाले प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सभी जिम्मेदार अधिकारियों के ऊपर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। परवीन के मकान का तत्काल पुनर्निर्माण किया जाय और समुचित मुआवजा दिया जाय। एक्टिविस्ट जावेद के मामले की स्वतंत्र निष्पक्ष न्यायिक जांच हो।

साम्प्रदायिक बयान देकर सामजिक सौहार्द को खत्म कर देने वाली नेताओं को सिर्फ़ निलंबन और बर्खास्तगी के बजाय गिरफ्तार करके कानूनी कार्रवाई की जाय। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर ढंग से लागू कराया जाय। राशन कार्ड कटौती को बंद किया जाए। मनरेगा में महिला मजदूरी को सुनिश्चित किया जाय। गांव हो या शहर हर महिला के काम को और वाज़िब मजदूरी के साथ  महिला के सुरक्षा-सम्मान को सुनिश्चित किया जाय। ऐपवा सेना में स्थायी भर्ती को सुनिश्चित करने की मांग करती है और संविदा पर भर्ती को बंद करने की मांग करती है। इस मांग के  साथ शांतिपूर्ण  आंदोलन कर रहे नौजवानो का पुलिसिया उत्पीड़न बंद होना चाहिए। अपनी तमाम माँगों के साथ ऐपवा ने आगामी समय में भी चरणबद्ध तरीके से जिलावार आन्दोलन जारी रखने की बात कही।

(लेखिका स्वतन्त्र पत्रकार हैं)

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