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BHU: धरने पर बैठी छात्राओं और विवि प्रशासन में नोकझोंक, ABVP पर हमले का आरोप

आंदोलनकारी छात्राएं छेड़खानी मामले में धरने पर बैठी थीं। रविवार को उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के पुतला दहन की योजना बनाई थी।
BHU
आंदोलनकारी छात्राओं को घेरे महिला पुलिस। 

वाराणसी में पिछले तीन दिनों से काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सिंह द्वार पर धरने पर बैठी छात्राओं और प्रॉक्टोरियल टीम में जमकर नोकझोंक हुई। आंदोलनकारी छात्राएं आईआईटी-बीएचयू की द्वितीय वर्ष की छात्रा से हुई छेड़खानी मामले को लेकर आंदोलन कर रही थीं। रविवार को उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षा मंत्री और बीएचयू प्रशासन का पुतला दहन करने की योजना बनाई थी।


बीएचयू गेट पर दोपहर में जनवादी छात्र संगठनों के बैनर तले आंदोलन-प्रदर्शन चलाया जा रहा था। छात्रा के साथ छेड़खानी मामले को लेकर रविवार को विरोध के दौरान बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते उन्होंने पुतला दहन करने की योजना बनाई थी। पुतला दहन की सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। तभी बीएचयू के प्रॉक्टोरियल बोर्ड की महिला टीम ने छात्राओं से पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला छीन लिया और उसे जलने से रोक दिया। पुतले की छीना-झपटी के दौरान दौरान छात्राओं और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच जमकर नोक-झोंक हुई। तीखी झड़प होने से विश्वविद्यालय के सिंहद्वार पर अफरा-तफरी मच गई। लंका चौराहे पर गाड़ियों की कतार लग गई।

बीएचयू में छात्रों ने निकाला प्रतिरोध मार्च

आंदोलनकारी छात्राओं के समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन व सरकार विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। काफी देर तक हंगामे कि स्थिति रही। बाद में नारेबाजी करने वाले आइसा के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

आंदोलन में शामिल इप्शिता ने न्यूज़क्लिक से  कहा, "शासन-प्रशासन के संवेदनहीन रवैये से तंग आकर हमने दोपहर में मार्च निकलाने का निर्णय लिया था। छात्राएं पुतला दहन की तैयारी कर रही थीं, तभी पुलिस ने हमारे साथ मारपीट और पुतलों  की छीना-झपटी शुरू कर दी। इसी बीच हमारे एक साथी रोशन को पुलिस ने अगवा कर लिया और उसे अज्ञात स्थान पर ले गए। "

नारेबाज़ी करते ABVP के कथित कार्यकर्ता। ABVP पर आंदोलनकारी छात्राओं पर हमले का आरोप है। 

छात्रा इप्शिता ने आरोप लगाया कि "आंदोलनकारी छात्राएं जिस समय पुलिस से अपने गिरफ्तार साथी के बारे में बात कर रही थीं, तभी नारेबाजी करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग पहुंचे और पुलिस की शह पर हमला बोल दिया। आंदोलनकारी छात्राएं अपना बचाव करने लगी और ABVP वाले खुलेआम मारपीट और गुंडई करते रहे। पुलिस प्रशासन ABVP के लोगों को रोकने की जगह आंदोलनकारियों को ही खदेड़ने में जुट गया। लंका थाना पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय आंदोलन का  दमन करने में जुट गई है। "

बीएचयू के सिंहद्वार पर जनवादी छात्र संगठन के प्रतिनिधि एक नवंबर को आईआईटी की छात्रा के साथ हुई यौन हिंसा के विरोध में धरने पर बैठे थे। इस घटना ने देश को अंदर से झकझोर दिया था। इस मुद्दे को लेकर बीएचयू समेत देश भर में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। छात्राएं अपराधियों की  गिरफ्तारी शीघ्र करने के साथ ही आईआईटी में दीवार खड़ा करने का विरोध कर रही थीं।

आंदोलनकारी छात्रा सिद्धि ने कहा, " महिलाओं के साथ हिंसा, रेप, छेड़खानी का विरोध करने पर अभाविप, लंका थाना पुलिस और बीएचयू प्रशासन मिलकर अमन पसंद लोगों का दमन कर रहे हैं। लगता है कि ये सभी अपराधियों के साथ खड़े हैं? हम बनारस के अमनपसंद लोगों से अपील कर रहे हैं कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आगे आएं। यौन हिंसा के मामले को दबाने में जुटे लोगों के खिलाफ प्रतिरोध दर्ज कराएं।"

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