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‘समझौते का उल्लंघन’: केंद्र के ख़िलाफ़ SKM का देशव्यापी प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा पत्र

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर लिखित समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और इसे रोकने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।
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नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांग की है कि आज से दो साल पहले क़रीब 13 महीने चले किसान आंदोलन के दौरान किसान नेताओं पर दर्ज सभी मामलों को केंद्र सरकार वापस ले। इसके अलावा किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर, 9 दिसंबर 2021 को SKM के साथ हुए लिखित समझौते का 'उल्लंघन' करने का आरोप लगाया है और इसे रोकने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। इस संबंध में आज 11 दिसंबर, 2023 को पूरे देश में SKM के जिला नेतृत्व ने संबंधित जिला कलेक्टरों से मुलाकात की और उनके माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजे।
 
SKM ने 29 नवंबर, 2023 को सुबह 2 बजे इंदिरा गांधी हवाई अड्डा, नई दिल्ली में SKM के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के महासचिव युद्धवीर सिंह की गिरफ्तारी के संदर्भ में पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि "किसान नेताओं को आपराधिक मामलों में फंसाने के किसी भी कदम को लिखित समझौते का घोर उल्लंघन माना जाएगा और यह केंद्र सरकार और आम जनता के बीच विश्वास का उल्लंघन होगा।"

गौरतलब है की बीते दिनों दिल्ली हवाई अड्डे से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव और संयुक्त किसान मोर्चा के नेता युद्धवीर सिंह को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया जिसकी वजह से वे कोलंबिया जाने के लिए हवाई जहाज नहीं पकड़ सके। आपको बता दें विश्व व्यापार संगठन के विरुद्ध बने किसान संगठनों के अंतरराष्ट्रीय मोर्चे - ला कंपेसिना की बैठक में भाग लेने के लिए युद्धवीर सिंह को कोलंबिया जाना था। इस घटना पर SKM का कहना है कि “13 महीने चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान चलाए गए मुकदमे के तहत यह गिरफ्तारी की गई। सरकार और संसद द्वारा लाए गए 3 कानूनों को वापस लेते वक्त सरकार ने लिखित आश्वासन दिया था कि आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।"

SKM ने कहा है कि "किसानों का संघर्ष घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट पूंजी के तहत कृषि के कॉरपोरेटीकरण को लागू करने के ख़िलाफ़ आम जनता का विद्रोह था और एक देशभक्तिपूर्ण आंदोलन था। देश के मजदूरों के सक्रिय समर्थन से किसान आंदोलन नरेंद्र मोदी सरकार को तीन कॉरपोरेट समर्थक कृषि अधिनियमों को वापस लेने के लिए मजबूर करने में सफल रहा।"

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, "हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा 'न्यूज़क्लिक एफआईआर' में किसानों के संघर्ष को 'राष्ट्र-विरोधी, विदेशी और आतंकवादी ताकतों द्वारा वित्त पोषित' के रूप में चित्रित करने के आरोप बेबुनियाद हैं। SKM इन आरोपों का खंडन करता है।"

इसके अलावा SKM ने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से मांग की कि "उन नौकरशाहों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए जिन्होंने प्रतिशोध की भावना से काम किया है और किसान कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामलों में हेरफेर करने की साज़िश रची है।"

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