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छत्तीसगढ़: जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, सरकार पर वादा भूलने का आरोप!

स्टाइपेंड बढ़ाए जाने समेत अन्य मांगों को लेकर इन जूनियर डॉक्टरों की इस साल में ये दूसरी हड़ताल है।
Doctors

छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के सभी जूनियर डॉक्टर्स मंगलवार 1 अगस्त से अनिश्चितकालिन हड़ताल पर चले गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी रायपुर सहित सरगुजा, कांकेर, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव के सरकारी मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला। आज, बुधवार 2 अगस्त से इन डॉक्टरों ने ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार कर दिया है। स्टाइपेंड बढ़ाए जाने समेत अन्य मांगों को लेकर इन जूनियर डॉक्टरों की ये इस साल में दूसरी हड़ताल है। इसमें जूनियर डॉक्टरों के साथ ही बांडेड सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न छात्र भी शामिल हैं।

बता दें कि इससे पहले इन डॉक्टर्स ने जनवरी में हड़ताल की थी, और तब स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद ये वापस काम पर लौटे थे। हालांकि अब 6 महीने बाद भी सरकारी आश्वासनों पर कोई कार्रवाई न होता देख, इन डॉक्टर्स ने अब एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के जुड़े डॉक्टर प्रेम चौधरी ने न्यूज़क्लिक को इस हड़ताल की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में बीते सप्ताह सभी जूनियर डॉक्टर्स विरोध स्वरूप हाथों में काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। इस संबंध में शासन-प्रशासन को भी ज्ञापन के माध्यम से अवगत करा दिया गया था। बावजूद इसके जब सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो मजबूरन इन डॉक्टर्स को हड़ताल पर जाना पड़ा।

स्टाइपेंड बढ़ाने और स्ट्रिक्ट रूरल बांड कम करने की मांग

प्रेम चौधरी के मुताबिक प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर्स ने अपने प्रदर्शन स्थल पर ही टेंट लगाकर मरीज़ो का इलाज भी किया। आगे स्वास्थ्य व्यवस्था में जो भी दिक्कतें होंगी, उसकी जिम्मेदार सरकार खुद होगी। क्योंकि यहां जूनियर डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड से भी कम स्टाइपेंड मिल रहा है। बीते चार-पांच सालों से मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ एक मात्र राज्य है जहां टोटल 4 साल का स्ट्रिक्ट रूरल बांड करवाया जाता है, ये डॉक्टरों के साथ अन्याय है।

ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और एमडी-एमएस करने के बाद दो साल तक गांवों में जाकर प्रैक्टिस करने का नियम है। इसके लिए सीट अलॉटमेंट के समय ही मेडिकल छात्रों से बांड भरवाया जाता है। इस बांड (एग्रीमेंट) के अनुसार गांवों में नहीं जाने वाले डॉक्टरों से 25 से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लिया जाता है। यही नहीं इस दौरान उन्हें मिलने वाला वेतन भी बहुत कम होता है।

रूरल बांड को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें MBBS के बाद 2 साल मात्र 45, 000 प्रति माह पर काम करना होता है जबकि पीजी MD/MS के बाद 55,000 में। ये राशि उनके कोर्स के समय मिलने वाली स्टापेंड से भी कम है। ऐसे में MD/MS कम्पलीट कर चुके सीनियर रेजिडेंट होने के बाद भी उन्हें पेमेंट अपने जूनियर से भी कम मिलती है, जो एक तरह से उनका शोषण है। डॉक्टरों की मांग है कि इस बांड अवधि को कम किया जाए और उन्हें काम के अनुसार मेहनताना भी मिले।


हड़ताली डॉक्टरों की मांगें क्या हैं?

1- इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टर के स्टाइपेंड में वृद्धि की जाए।

2- पोस्ट यूजी एवं पोस्ट पीजी बांडेड डॉक्टर के वेतन में वृद्धि की जाए।

3- पोस्ट यूजी एवं पोस्ट पीजी बांड की अवधि को दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष किया जाए।

4- सभी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट के पोस्ट निर्मित कर सभी पोस्ट पीजी बांडेड डॉक्टरों को बांड की अवधि में एक वर्ष की सीनियर रेजीडेंसी का अवसर दिया जाए ताकि बांड की अवधि के बाद वे असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए योग्य हो।

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मनु प्रताप सिंह का कहना है कि प्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स की संख्या 3 हजार से ज्यादा है। ये सभी प्रदेश के अलग-अलग जिलों के मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं। इसके साथ ये लोगों का इलाज भी करते हैं। लेकिन यहां मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। दूसरे प्रदेशों में जहां 95 हजार रुपये तक दिया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में 50-55 हजार रुपये ही मिलते हैं। इंटर्न्स को तो मात्र 12,600 रुपए दिए जाते हैं। इसे लेकर सरकार ने जल्द कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया था, लेकिन अभी तक कहीं कुछ नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में चुनावी गहमागहमी के बीच भूपेश बघेल सरकार बीते कई महीनों से युवाओं, कर्मचारियों और महिलाओं के विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का सामना कर रही है। बीते दिनों सरकार की ओर से एस्मा भी लगाया गया था, जिसके बाद भी प्रदर्शन और हड़तालों पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला। हाल ही में राज्य के शिक्षकों ने भी काम बंदी का ऐलान किया था, ऐसे में अब जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल सरकार के लिए नई चुनौती जरूर होगी।

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