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झारखंड: सांसदों के निलंबन के विरोध में झारखंड में भी हुआ आक्रोश प्रदर्शन

“विपक्ष विहीन संसद, विरोध विहीन सड़क और लोकतंत्र विहीन देश बना देने की साज़िश नहीं चलेगी” जैसे नारों के साथ INDIA गठबंधन के राष्ट्रव्यापी विरोध आह्वान के तहत झारखंड में भी राज्यव्यापी कार्यक्रम हुआ।
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 “विपक्ष विहीन संसद, विरोध विहीन सड़क और लोकतंत्र विहीन देश बना देने की साजिश नहीं चलेगी” जैसे नारों के साथ INDIA गठबंधन के राष्ट्रव्यापी विरोध आह्वान के तहत झारखंड में भी राज्यव्यापी कार्यक्रम हुआ। जिसमें गठबंधन के सभी घटक दलों के नेता-कार्यकर्त्ताओं ने राज्य सभा- लोकसभा से विपक्षी सांसदों के निलंबन का कड़ा विरोध प्रदर्शित किया।

इस अभियान के तहत झामुमो-राजद-कांग्रेस के अलावा राज्य के सभी वाम दल- सीपीएम, सीपीआई, भाकपा माले व मासस के साथ साथ टीएमसी-आप पार्टी के कार्यकर्त्ताओं ने प्रदेश भर में जगह जगह ‘आक्रोश मार्च निकाले। साथ ही कई स्थानों पर प्रतिवाद धरना एवं सभायें भी की गयीं। 

“लोकतंत्र पर हमला नहीं सहेंगे, सभी विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस लो व मोदी सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी” इत्यादि नारे लिखे पोस्टर-बैनरों के साथ रांची स्थित जिला स्कूल परिसर से आक्रोश-मार्च निकाला गया। जो सीधे राजभवन पहुंचकर प्रतिवाद सभा में तब्दील हो गया।

मार्च का नेतृत्व करते हुए सभा को संबोधित करते हुए INDIA गठबंधन के सभी दलों ने आरोप लगाया कि मोदी के हाथों इस देश का संविधान और लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से यह भी कहा कि- मोदी सरकार देश में फ़ासीवादी शासन चलाना चाहती है। इसी की ताज़ा मिसाल है कि देश के लोकतान्त्रिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब सवाल उठा रहे विपक्षी सांसदों को राज्य सभा और संसद से निलंबित कर दिया गया।                               

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सरकार के खिलाफ कोई आवाज़ नहीं उठाये इसलिए विपक्षी सांसदों को सदन से ही बाहर कर दिया जा रहा है। जो कि हमारे लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है।

इसके पहले भी अडानी के पास 20 हज़ार करोड़ रुपये कहाँ से आये और किसका है, पूछे जाने पर राहुल गाँधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गयी थी।

सरकार की जनविरोधी नीतियों पर सवाल उठाने वाले स्वतंत्र मिडिया संस्थान न्यूज़क्लिक पर आज भी लगातार सत्ता-दमन जारी है। वरिष्ठ मीडियाकर्मियों व एक्टीविस्ट को दमन का निशाना बनाना, बदस्तूर जारी है। वहीँ मोदी सरकार की आलोचना करने वाले दर्जनों मीडियाकर्मी, लेखक-बुद्धिजीवी, प्रोफ़ेसर, वकील और नागरिक-मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं को आज भी जेलों में बंद करके रखा हुआ है।    

जिसके जरिये मोदी सरकार ने ये खुलकर दिखला दिया है कि वह जनता की आवाज़ दबाने के साथ साथ विरोध की हर आवाज़ को वह कुचलने पर किस तरह आमादा है।

वाम दलों के नेताओं ने कहा कि- मोदी सरकार की असली मंशा अब देश की जनता के सामने पूरी तरह से उजागर हो गयी है कि किस तरह से वह- विपक्ष विहीन संसद, विरोध विहीन सड़क और लोकतंत्रविहीन देश बनाने पर तुली हुई है। जो किसी भी क़ीमत पर नहीं चलने दिया जा सकता है। देश की जनता इस तानाशाही को कत्तई नहीं बर्दाश्त करेगी।

INDIA गठबंधन के नेताओं ने यह भी आगाह किया कि- मोदी सरकार के तानशाह रवैये के ख़िलाफ़ देश की जनता के सभी बुनियादी-ज़रूरी मुद्दों- महंगाई, बेरोज़गारी, जल जंगल ज़मीन की लूट, और वास-आवास जैसे सवालों को लेकर गाँव गाँव में ज़मीनी आन्दोलन तेज़ किया जाएगा। साथ ही देश के संविधान और लोकतंत्र पर जो सुनियोजित हमला बोला जा रहा है, इसके ख़िलाफ़ भी व्यापक जनप्रतिवाद खड़ा किया जाएगा। संविधान से मिले अधिकारों और बोलने की आज़ादी की रक्षा के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। मोदी के हिटलरी शासन को अब यह देश किसी भी क़ीमत पर सहन नहीं करेगा।

अभियान को हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री रामेश्वर उराँव, कृषि मंत्री बदल पत्रलेख, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की के अलावे झामुमो के महासचिव विनोद पाण्डेय व केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य इत्यादि ने भी संबोधित किया।

वाम दलों की ओर से भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य शुभेंदु सेन, सीपीएम राज्य सचिव व सीपीई राज्य सचिव ने संबोधित किया।         

सभा के अंत में राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम स्मार-पत्र दिया गया। जिसमें उनसे देश के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्काल अपेक्षित क़दम उठाने की मांग की गयी।

प्रदेश की कोयला नगरी धनबाद, हजारीबाग, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़, लातेहार, जामताड़ा, गढ़वा व पलामू समेत प्रदेश के कई जिला मुख्यालयों पर प्रतिवाद कार्यक्रम हुए। जिसमें विरोध पोस्टरों-बैनरों के माध्यम से मोदी सरकार द्वारा- देश की लोकतान्त्रिक मर्यादा को रौंदे जाने, सदन को विपक्ष मुक्त बनाने, चुनाव आयोग को कठपुतली बनाने की जारी कवायद और सभी विपक्षी नेताओं को टारगेट किये जाने जैसे सवालों को प्रमुखता के साथ उठाया गया। लेकिन सर्व केन्द्रीय आह्वान यही किया गया कि- “विपक्ष विहीन संसद, विरोध विहीन सड़क और लोकतंत्र विहीन देश” बनाने की मोदी सरकार की साज़िश को विफल करें!

जगह जगह आयोजित हुए प्रतिवाद सभा में बोलते हुए वक्ताओं ने यह भी कहा कि- सदन में सवाल मात्र उठाने पर विपक्ष के 146 सांसदों को सदन से बाहर निकालकर देश के लोकतंत्र को जो कलंकित किया गया है, उसका जवाब देश की जनता 2024 के लोकसभा चुनाव में देकर रहेगी।

यह सरकार विपक्ष को देखना ही नहीं चाहती है। जिसे इसने विपक्षी सांसदों को सदन से निलंबित करके दिखला दिया है कि उसे प्रजातांत्रिक मूल्यों से कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार पूरी तरह से गरीब विरोधी है, जो सिर्फ कॉर्पोरेट घरानों के हितों को ही राष्ट्रधर्म मानती है। जिसमें देश का लोकतंत्र अब आड़े आ रहा है तो इसे भी हमेशा के लिए ख़त्म कर देने पर आमादा है।                                                    

कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि- मोदी सरकार INDIA गठबंधन से डर गयी है इसीलिए इसके सांसदों को संसद से बाहर निकाल रही है। लेकिन विपक्षी सांसदों के निलंबन से देश की जनता में मोदी सरकार के खिलाफ काफी आक्रोश है।   

INDIA गठबंधन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस अभियान के माध्यम से जनता से एकजुट आह्वान किया गया कि- आनेवाले 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को सत्ता से बाहर किये बगैर इस देश के संविधान और लोकतंत्र को नहीं बचाया जा सकता है।

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