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NCRB डेटा: महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में फिर बढ़ोतरी, क्या कभी बदलेंगे हालात?

बीते साल 2022 में महिला अपराध के सिलसिले में हर घंटे लगभग 51 मामले दर्ज किए गए। ये डेटा महिला सुरक्षा के तमाम वादों और इरादों से इतर एक अलग सच्चाई बयान करता है।
NCRB

अपराधों का लेखा जोखा रखने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB ने 'क्राइम इन इंडिया 2022' रिपोर्ट जारी कर दी है। हर साल की तरह इस साल भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध मामले में बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के कुल 4,45,256 मामले दर्ज किए गए। जबकि इससे पहले 2021 में 4,28,278 और 2020 में 3,71,503 मामले दर्ज किए गए थे। यानी बीते साल 2022 में महिला अपराध के सिलसिले में हर घंटे लगभग 51 मामले दर्ज किए गए। ये डेटा महिला सुरक्षा के तमाम वादों और इरादों से इतर एक अलग सच्चाई बयान करता है।

इस बार की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 2022 में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के सबसे ज़्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। यहां करीब 65 हज़ार 743 मामले दर्ज हुए। ये वही बीजेपी शासित राज्य है, जहां महिला सुरक्षा के कसीदे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक अपने भाषणों में उदाहरण के तौर पर पढ़ते हैं। यहां महिलाओं के लिए मिशन शक्ति से लेकर सेफ सिटी योजना तक चल रही है, लेकिन असुरक्षा की कहानी नहीं बदल पा रही है।

वहीं बात अगर राजधानी दिल्ली की करें, तो यहां महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की दर के मामले में सबसे खराब रिकॉर्ड है। दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ क्राइम रेट 144.4 है, जो क्राइम रेट के राष्ट्रीय औसत 66.4 से काफी ऊपर है। ये क्राइम रेट प्रति 1 लाख महिलाओं पर है। आसान भाषा में समझें तो ये आबादी के लिहाज़ से है यानी 1 लाख महिलाओं पर कितनी महिलाएं अपराध का शिकार हुईं, ये वो प्रतिशत है। महिलाओं के ख़िलाफ़ क्राइम रेट हरियाणा में 118.7, तेलंगाना में 117, राजस्थान में 115.1 है।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान सबसे आगे

महिला अपराध के मामलों में महाराष्ट्र और राजस्थान भी पीछे नहीं है। महाराष्ट्र में 45 हज़ार 331 मामले तो राजस्थान में 45 हज़ार 58 मामले रजिस्टर किए गए। महाराष्ट्र में बीजेपी सत्ता पर काबिज़ है, तो वहीं अब तक राजस्थान में गहलोत सरकार का राज था, जो रिवाज की राह पर इस बार विधानसभा चुनाव में बदल गया। महिलाओं के लिए असुरक्षित राज्यों में तृणमूल कांग्रेस का पश्चिम बंगाल भी पीछे नहीं है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से महिलाओं को खास उम्मीद थी, लेकिन यहां भी 34 हज़ार 738 मामले दर्ज हुए।

मध्य प्रदेश में हाल ही में चुनाव संपन्न हुए, जहां बीजेपी को महिलाओं की 'लाडली' सरकार बताया गया लेकिन शिवराज सिंह के राज में यहां भी 32 हज़ार 765 मामले महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के तौर पर दर्ज किए गए। ये कुछ टॉप राज्यों के आंकड़े हैं जहां महिलाओं के लिए बार-बार सुरक्षित होने के दावे करते नेताओं और मंत्रियों की ज़ुबान नहीं थकती। सुरक्षा के नाम पर योजनाएं चला दी जाती हैं, उनके पोस्टर्स के साथ फोटो अखबारों में छपवा दी जाती हैं, लेकिन वास्तविक सुरक्षा की किसी को नहीं पड़ी।

चुनावों में महिला सुरक्षा मुद्दा तो था, लेकिन बड़ा और ज़रूरी नहीं

महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में बलात्कार एक जघन्य अपराध माना जाता है। पूरे भारत में पिछले साल रेप के 31 हज़ार 516 मामले दर्ज किए गए। साल 2022 में दुष्कर्म के सबसे ज़्यादा 5 हज़ार 399 मामले राजस्थान में दर्ज हुए। यहां की कुछ वायरल वीडियो आपने सोशल मीडिया पर भी देखी होगी। चुनाव में ये मुद्दा भी बना, लेकिन बड़ा और ज़रूरी मसला नहीं बन पाया। रेप के मामले में योगी सरकार का उत्तर प्रदेश भी पीछे नहीं है। यहां 3 हज़ार 690 मामले, वहीं 'मामा' शिवराज के मध्य प्रदेश में 3 हज़ार 29 और महाराष्ट्र में 2 हज़ार 904 मामले दर्ज किए गए। वहीं देश की राजधानी दिल्ली में रेप के 1 हज़ार 212 मामले दर्ज किए गए।

NCRB एक सरकारी संस्था है, उसने अपने आंकड़ों को लेकर कहा है कि पुलिस डेटा (FIR) में बढ़ोतरी का मतलब अपराध में वृद्धि नहीं है। इसका मतलब है कि अधिक लोग अपराध दर्ज कराने के लिए आगे आ रहे हैं। हालांकि रोज़ अखबार के पन्ने महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल बखूबी खोलते ही हैं। और ये शायद महिला आंदोलन का ही हासिल है कि महिलाएं जागरूक होकर आगे बढ़ रही हैं और अपने ख़िलाफ़ होने वाले अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रही हैं।

अपने घरों में अपनों के बीच सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं महिलाएं

रिपोर्ट की मानें तो, भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के सबसे अधिक 31.4% मामले पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता के थे। यानी महिलाएं अपने घरों में ही अपनो के बीच सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं। इसके बाद महिलाओं का अपहरण और फुसलाकर या धमकाकर अपहरण के 19.2% मामले दर्ज हुए। वहीं महिलाओं पर उनकी गरिमा भंग करने के इरादे से हमला करने के 18.7% मामले और रेप के 7.1% मामले दर्ज हुए।

बता दें कि दिल्ली में केंद्र सरकार के हाथ में कानून व्यवस्था है और इस पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कब्जा है। बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 का लोकसभा चुनाव जिन मुद्दों पर लड़ा, उनमें महिला-सुरक्षा एक अहम मुद्दा था। पार्टी ने अपने मैनिफ़ेस्टो में और प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में कई वायदे किए। लेकिन अब सत्ता में लगभग पीएम मोदी का दूसरा कार्यकाल भी समाप्त होने को है लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वो वादे केवल नारों तक ही सिमट कर रह गए?

गौरतलब है कि NCRB की 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट इस बार 3 दिसंबर, यानी रविवार को जारी की गई। ये रिपोर्ट हर साल आती है और हर साल हम महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध पर विलाप की कहानी दोहराते हैं, जैसे - महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा में पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ोतरी हुई या हर दिन इतनी महिलाएं और नाबालिग लड़कियां दुष्कर्म का शिकार हुईं, हत्या, घरेलू हिंसा, दहेज हत्या का ग्राफ इन महानगरों में बड़ा, तो कभी ये राज्य महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित हैं इत्यादी। लेकिन इससे महिला सुरक्षा की समस्या का समाधान नहीं होता और न ही महिलाओं की स्थिति बदलती है।

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