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पंजाब: लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र आंदोलनरत किसानों पर नेताओं की नज़र 

पंजाब के मालवा, माझा और दोआबा के कई विधानसभा व संसदीय निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां किसानों के वोट निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। 
Farmers
फोटो साभार : इंडिया टूडे फ्लैश 'एक्स'

पंजाब में भी तमाम राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र गतिविधियां और तैयारियां तेज़ कर दी हैं। सियासतदानों की निगाहें सूबे के आंदोलनरत और आंदोलन से बाहर खेतों में मसरूफ़ किसानों पर टिकी हैं। पंजाब के मालवा, माझा और दोआबा के कई विधानसभा व संसदीय निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां किसानों के वोट निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। तेरह फ़रवरी से किसान आंदोलन की राह अख्तियार किए हुए हैं। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर दो प्रमुख किसान संगठनों संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और मज़दूर किसान मोर्चा की अगुवाई में हज़ारों किसानों ने केंद्र सरकार से मांगे मनवाने के लिए 'पक्के मोर्चे' बनाकर पड़ाव डाला हुआ है। किसान संगठन कह चुके हैं कि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा। यह चुनाव आचार संहिता से बेअसर रहेगा और किसान मतदान के दिन वोट ज़रुर डालेंगे।   

पंजाब में भगवंत मान की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पहले दिन से ही आंदोलन कर रहे किसानों की खुली हिमायत कर रही है। हर तरह से किसानों को रिझाया जा रहा है। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों को विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। 23 फरवरी को हरियाणा पुलिस की गोली से मारे गए युवा किसान शुभकरण सिंह के परिजनों को राज्य सरकार ने एक करोड़ रुपए की नगद आर्थिक सहायता दी और शुभकरण की बहन को सरकारी नौकरी की घोषणा की। किसानों की मांग मानते हुए सरकार ने शुभकरण मामले में एफ़आईआर दर्ज़ की। सरकारी खर्चे पर ज़ख्मी किसानों का मुफ़्त इलाज़ कराया जा रहा है। 

आप सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी अपनी हर यात्रा में आंदोलनरत किसानों के पक्ष में बोल चुके हैं। जाहिर है कि आप लोकसभा चुनाव में किसानों के वोट हासिल करना चाहती है। विधानसभा चुनाव में उसे किसानों का अच्छा समर्थन मिला था। बेशक अब किसानों का एक बड़ा तबका पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से भी खासा नाराज़ है। आप सरकार के ख़िलाफ़ किसान कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। गन्ना किसानों ने भी मान सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन किया था और आख़िरकार उनकी ज़्यादातर मांगे मान ली गईं। किसान नेता सरदूल सिंह कहते हैं कि राज्य सरकार ने शुभकरण प्रकरण पर राजनीति की और कई दिन तक एफ़आईआर दर्ज़ नहीं की। इसके लिए किसानों को संघर्ष करना पड़ा तो सरकार ने कार्रवाई की लेकिन आधी- अधूरी। वह कहते हैं कि किसानों की मांग थी कि हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज को नामजद किया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जालंधर जिले के गांव मंड के किसान उजागर सिंह ढिल्लों के अनुसार, "सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने किसानों से कई वायदे किए थे लेकिन इनमें से कुछ ही पूरे हुए। कई बार लगता है कि यह पार्टी भी अन्य पार्टियों की तरह है।" उजागर सिंह ढिल्लों की तरह कई किसान ऐसा मानते हैं। ऐसे में लगता है कि लोकसभा चुनाव तक आप को पूरा ज़ोर लगाकर किसानों के हित में ठोस कुछ करना होगा। तभी किसान वोट हासिल होंगे। 

आप के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विधायक बुधराम के मुताबिक़, "किसान हमारे साथ हैं। आम आदमी पार्टी उनकी हितैषी है। लगातार किसानों के लिए फ़ायदेमंद सरकारी नीतियां बनाई जा रही हैं और उन्हें तत्काल प्रभाव से लागू भी किया जा रहा है। अतीत की सब सरकारों ने किसानों को धोखा दिया। किसान आम आदमी पार्टी को अपना मानते हैं। हमें बड़ी संख्या में उनके वोट मिलेंगे। राज्य सरकार पहल के आधार पर किसानों की समस्याएं हल करती है। मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा दिया जा रहा है।"

पिछली बार किसान आंदोलन से दूर रहने वाली कांग्रेस इस बार खुलेआम आंदोलनरत किसानों के समर्थन में है। प्रदेश कांग्रेस ने तमाम जिला मुख्यालयों में किसान आंदोलन की हिमायत में एकदिवसीय ट्रैक्टर-ट्रॉली मार्च निकाला। इसकी अगुवाई प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग अमरिंदर सिंह ने की। शुभकरण सिंह की मौत का मामला पार्टी ने ज़ोर-शोर से उठाया। किसानों के मुद्दे पर विधानसभा से वॉकआउट भी किया। वड़िग कहते हैं, "कांग्रेस पूरी तरह किसानों के साथ है। हम किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हैं। केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों का दमन किया। पार्टी हर लिहाज़ से किसानों के साथ खड़ी है। आम आदमी पार्टी सरकार किसान हिमायती होने का सिर्फ नाटक कर रही है। मैंने मांग की थी कि विधानसभा के बजट सत्र का एक दिन किसानों के नाम किया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं और हमारी पार्टी के कई शीर्ष नेता किसान परिवारों की पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए किसानों की पीड़ा अच्छी तरह समझते हैं। हम किसानों के बीच कम कर रहे हैं।" 

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने भी सूबे में जारी किसान आंदोलन का खुला समर्थन किया है। शिअद अपने आपको किसान हितों का प्रवक्ता और अभिभावक मानता है। हालांकि ज़्यादातर किसान संगठन; पिछले किसान आंदोलन में दल की भूमिका को लेकर आज भी नाराज़ हैं। कृषि अध्यादेशों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल ने मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था लेकिन किसानों का कहना है कि यह फ़ैसला बहुत देर से लिया गया। शिरोमणि अकाली दल अब तक 'डैमेज कंट्रोल' की कवायद कर रहा है। भाजपा से उसका प्रतिक्षित गठबंधन किसान आंदोलन की वज़ह से भी अटका हुआ है। शिअद चाहता है कि केंद्र की भाजपा सरकार तत्काल किसानों की मांगें माने ताकि चुनाव में इसका सीधा फ़ायदा अकाली-भाजपा गठबंधन को हो। अगर किसान आंदोलन जारी रहता है तो इसका नुक़सान शिरोमणि अकाली दल को भी भाजपा से गठबंधन होने की सूरत में होगा। दल के सरपरस्त सुखदेव सिंह ढींडसा कोशिशों में हैं कि मध्यस्थता करके किसान आंदोलन को फ़ौरी तौर पर ख़त्म करवाया जा सके। शिरोमणि अकाली दल मध्यस्थता के जरिए किसान वोट हासिल करने की फ़िराक में है। एक वरिष्ठ अकाली नेता ने बताया कि प्रधान सुखबीर सिंह बादल भाजपा के साथ गठजोड़ चाहते हैं और इसीलिए अंदरुनी शर्त रखी गई है कि पहले किसानों की मांगे मानीं जाएं; नहीं तो भाजपा के साथ-साथ अकालियों को भी किसानों के रोष का शिकार होना पड़ेगा। 

ग़ौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल, भाजपा से समझौता न होने की सूरत में इसे मुद्दा बनाएगा कि गठबंधन इसलिए नहीं हो सका क्योंकि शिअद शिद्दत से चाहता था कि पहले किसान मसले हल किए जाएं। सुखबीर सिंह बादल सहित शिरोमणि अकाली दल की पूरी लीडरशिप रोज़ किसानों के पक्ष में बयान जारी करती है।

भाजपा से किसान कोसों दूर हैं। किसान संगठन इसे अपना सबसे बड़ा खलनायक मानते हैं। आलम यह है कि किसानों के गुस्से और ज़बरदस्त विरोध के चलते भाजपा नेता पंजाब के गांवों में नहीं जा पा रहे। दो महीनों के भीतर विभिन्न किसान संगठन कई बार वरिष्ठ भाजपा नेताओं के घरों का घेराव कर चुके हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार जाखड़ ज़ोर देते हैं कि पार्टी और केंद्र सरकार किसान-विरोधी नहीं है। वह कहते हैं कि कुछ ग़लतफहमियां हैं जिन्हें जल्दी दूर कर लिया जाएगा।

खैर जो भी हो, ज़्यादातर प्रत्याशियों की लोकसभा की राह इस बार किसानों का रुख अथवा मूड तय करेगा। यानी 2024 के लोकसभा चुनाव में किसान आंदोलन पंजाब में अपना पूरा जलवा दिखाएगा।

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