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साल 2023: देश-विदेश में पितृसत्ता को चुनौती देतीं और इतिहास बनाती महिलाएं!

इस साल कई महिलाओं ने अपनी प्रतिभा से कमाल दिखाने के साथ ही, समाज में उनके लिए पहले से निर्धारित पैमानों को भी तोड़ा है।
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साल 2023 कई मामलों में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस साल में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने इतिहास में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, तो वहीं कई महिलाओं ने भी इस साल अपनी उपलब्धियों से देश-दुनिया में अमिट छाप छोड़ी है। अब क्योंकि ये साल गुज़रने को है, इसलिए एक नज़र ऐसी ही महिलाओं और उनके उपलब्धियों पर...

गुनीत मोंगा और कार्तिकी गोंजाल्वेस

शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' की निर्माता और निर्देशक गुनीत मोंगा और कार्तिकी गोंजाल्वेस ने इस साल ऑस्कर में कमाल कर दिखाया। उनकी डॉक्यूमेंट्री को न सिर्फ पुरस्कार मिला बल्कि उनके ज़रिए भारत की महिलाओं के हुनर को किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा भी गया। ये एक ऐतिहासिक क्षण भी था क्योंकि क्योंकि पहली बार किसी भारतीय प्रोडक्शन को ऑस्कर मिला था। इन दो महिलाओं ने वाकई अपनी मेहनत से बहुत कुछ कर दिखाया था।

मिशेल यो

इस साल बेस्ट एक्ट्रेस का ऑस्कर जीतने वाली पहली एशियाई महिला मिशेल यो, ने भी इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया है। उन्हें 'एवरीथिंग एवरीव्हेयर ऑल एट वंस' फिल्म के लिए ये अवार्ड मिला, जिसमें वो लीड भूमिका में थीं। मिशेल यो एक्टिंग करियर में आने से पहले एक मॉडल थीं। वो 1990 के दशक में हॉन्ग कॉन्ग की कई एक्शन फिल्मों में नज़र आईं, जिसमें उन्होंने अपने एक्शन खुद किए थे। दिलचस्प यह है कि अधिकतर फिल्मों में मार्शल आर्ट का हुनर दिखाने वाली मिशेल ने इसके लिए कोई ट्रेनिंग नहीं ले रखी है।

दीपिका पादुकोण

अब ऑस्कर की बात हो और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम न सामने आए, ऐसा कैसे हो सकता है। दीपिका ने इस साल ऑस्कर में इंडियन गाने नाटु-नाटु को प्रेजेंट करने के लिए मंच पर शानदार स्पीच से सबके दिल को जीत ही लिया था। वहीं अब उनके नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। बीते दिनों ‘2023 अकादमी म्यूजियम गाला’ इवेंट में हिस्सा लेने वाली दीपिका पहली इंडियन एक्ट्रेस बनी, जो पूरे देश के लिए एक फक्र का मौका था।

नरगिस मोहम्मदी

ऑस्कर के बाद नोबेल पुरस्कारों की बात करें, तो यहां भी महिलाओं ने अपनी हिम्मत और जुनून से परचम लहराया है। ईरान की जेल में बंद महिला अधिकारों की सशक्त आवाज़ नरगिस मोहम्मदी को शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। नोबेल पुरस्कार समिति ने भी इस बात को माना है कि नरगिस उत्पीड़न के खिलाफ़ संघर्ष, महिला स्वतंत्रता और मानवाधिकार को बढ़ावा देने की बात करने के लिए बड़ी कीमत चुका रही हैं। नरगिस, महिला और मानवाधिकार कार्यकर्ता होने के साथ ही डिफेंडर ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने जेल में बंद होने के बावजूद कई बार महिला अधिकारों के समर्थन और सरकार की बर्बरता के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया।

क्लाउडिया गोल्डिन

इस साल आर्थिक विज्ञान का नोबेल पुरस्कार हार्वर्ड प्रोफेसर क्लाउडिया गोल्डिन को मिला। गोल्डिन को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महिलाओं पर उनके ऐतिहासिक काम के लिए जाना जाता है। उन्हें श्रम बाज़ार में महिलाओं पर उनके शोध के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया। नोबेल समिति ने पुरस्कार की घोषणा के दौरान कहा था कि गोल्डिन ने अपने शोध में सदियों से महिलाओं की कमाई और श्रम बाज़ार के परिणामों का पहला व्यापक विवरण प्रदान किया है। समिति ने कहा कि उनके शोध से नए पैटर्न का पता चलता है, परिवर्तन के कारणों की पहचान होती है और जेंडर गैप के बारे में भी जानकारी मिलती है।

डॉ. कैटालिन कारिको

मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार इस साल दो वैज्ञानिकों को दिया गया, जिसमें हंगरी मूल की अमेरिकी डॉ. कैटालिन कारिको का नाम भी शामिल था। प्रोफ़ेसर कैटालिन कारिको एक चर्चित बायोकैमिस्ट और आरएनएआरएक्स की सह-संस्थापक हैं। वो 2006 से 2013 के बीच इस कंपनी की सीईओ रही हैं। 2013 में वो बायोनटेक आरएनए फार्मा से जुड़ गईं, 2019 से वो इस कंपनी की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। फ़ाइज़र-बायोनटेक और मोडर्ना कंपनी की कोविड वैक्सीन में डॉ. कैटालिन कारिको और डॉ. ड्रियू वाइसमैन की ही एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इन दोनों मेडिसिन वैज्ञानिकों ने ही एमआरएनए तकनीक की खोज की है और इसमें नवीन प्रयोग किए हैं।

हरमनप्रीत कौर

भारत की राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत, इस साल विज़डन के पांच क्रिकेटर ऑफ दि ईयर में अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनी थीं। अपने खेल में माहिर हरमन, देश और विदेश में ढेरों रन बना चुकी हैं। पिछले साल उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने कॉमनवेल्थ खेलों का सिल्वर मेडल जीता था। घरेलू क्रिकेट में भी हरमनप्रीत अपना कमाल दिखा चुकी हैं। इसी साल मार्च में आयोजित पहली विमेन्स प्रीमियर लीग में उन्होंने अपनी टीम मुंबई इंडियंस को जीत दिलाई थी। 2017 में हरमनप्रीत ने अपने करियर में बड़ी कामयाबी हासिल की थी, जब महिलाओं के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैच में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 115 गेंदों में 171 रन बनाए थे। उनकी शानदार पारी की वजह से ही भारतीय टीम फाइनल में पहुंची थी।

शीतल देवी

भारतीय पैरा आर्चर शीतल देवी को इस साल एशियन अवार्ड 2023 में बेस्ट यूथ एथलीट ऑफ द ईयर के अवार्ड से सम्मानित किया गया है। हाल ही में शीतल वीमंस कंपाउंड ओपन सेक्शन में दुनिया की नंबर एक पैरा आर्चर भी बनी हैं। वैसे तो उनके नाम कई उपलब्धियां हैं, लेकिन चीन के हांग्जो में एशियाई पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप 2023 में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल हासिल कर उन्होंने इतिहास रच दिया था। वह एक ही संस्करण में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। गरीब परिवार में पली-बढ़ी शीतल अपनी लगन और हौसलो से आज अपने परिवार और देश का नाम रौशन कर रही हैं।

रितु करिधाल

भारत की ‘रॉकेट वुमन’ के नाम से मशहूर रितु करिधाल चंद्रयान-3 मिशन के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक हैं। लखनऊ के एक कस्बे से आई रितु ने इसरो के मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) समेत कई परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रितु करिधाल को 2007 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा इसरो युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साल 2015 में रितु को मंगलयान में उनकी प्रमुख भूमिका के लिए इसरो टीम अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था। चंद्रयान-2 में भी रितु करिधाल का महत्वपूर्ण योगदान था। वो साल 2019 में इस मिशन की डायरेक्टर रहीं थी।

जेन दीपिका

नेपाल की प्लस साइज़ मॉडल जेन दीपिका ने इस साल ब्युटी पेजेंट्स कॉम्पिटिशन मिस यूनिवर्स 2023 के नार्म्स को एक कड़ी चुनौती दी। जहां ऐसे कार्यक्रमों में अक्सर ही स्लिम और टॉल महिलाएं अपने कर्वी फिगर को फ्लॉन्ट करती नज़र आती हैं, वहीं प्लस साइज़ जेन दीपिका ने इसी पेजेंट में अपनी वॉक से सबका दिल जीत लिया। वो ऐसा करने वाली पहली प्लस साइज़ मॉडल बन गईं। उनकी हिम्मत और जज़्बें को हर जगह सराहना मिली। मिस नेपाल रह चुकीं जेन दीपिका ने बॉडी साइज़, बॉडी शेमिंग और अक्सेप्टबिलटी से जुड़े सभी स्टीरियोटाइप को तोड़ कर दुनिया के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है।

एरिका रॉबिन

इस बार मिस यूनिवर्स कई वजहों से चर्चा में था। एक कारण इसमें हिस्सा लेने वाली पहली पाकिस्तानी मॉडल एरिका रॉबिन भी रहीं। एरिका रॉबिन देश और दुनिया भर में महिलाओं के लिए समान अवसर और बेहतर शिक्षा के अधिकार की समर्थक हैं।

एरिका के लिए मिस यूनिवर्स की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का यह सफ़र आसान न था और इसके लिए उन्हें अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि एरिका को महिलाओं समेत सभी समूहों से दुनिया भर से प्रशंसा मिली और इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी हिम्मत थी, क्योंकि पाकिस्तान जैसे परंपरावादी समाज से निकलकर उनका सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेना, किसी संघर्ष से कम नहीं था।

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