कटाक्ष: कॉकरोच से डर लगता है, साहब!
अब ये क्या बात हुई? मोदी जी के विरोधी कहते फिर रहे हैं कि ये तो कॉकरोच से डर गए। छप्पन इंच की छाती भी जरूर इनकी झूठी शेखी थी, सिर्फ दिखावे की चीज थी, इनके बाकी तमाम दावों की तरह। वर्ना कॉकरोच से यूं नहीं डर जाते।
छप्पन क्या छत्तीस इंच की छाती वाले भी कम से कम कॉकरोच से तो नहीं ही डरते हैं। और तो और खुद मोदी जी की अपनी पार्टी के निचले तो निचले, बिचले कार्यकर्ता तक कॉकरोच से नहीं डरते हैं।
देखा नहीं कैसे जब कॉकरोचों की पार्टी खबरों में ज्यादा जगह घेरती नजर आ रही थी, तो कर्नाटक में मोदी जी की पार्टी के बिचले कार्यकर्ता टीवी कैमरों के सामने कॉकरोच मारकर दिखा रहे थे, ताकि बाकी सारे कॉकरोच समझ जाएं कि मोदी जी से पंगा लेने का क्या नतीजा होता है?
बेशक, बेचारे मोदी भक्तों को तब कैमरे के सामने कॉकरोच मारने में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। कॉकरोचों को डिब्बे से निकाल कर जब तक उन्होंने काला हिट छिड़का, तब तक ज्यादातर कॉकरोच कैमरे के सामने उन्हें और मोदी जी को भी मुंह चिढ़ाकर भाग चुके थे।
पर इम्पोर्टेंट यह नहीं है कि वे कॉकरोच मार पाए कि नहीं मार पाए। भक्त लोग तो वैसे भी आम तौर पर अहिंसक होते हैं। माने मारने से डरते नहीं हैं। इंसानों की लिंचिंग-विंचिंग तो खूब ही करते हैं। पर वह भी अंधाधुंध नहीं, जाति और धर्म देखकर करते हैं। देखते-देखते भी कभी कोई ‘मिस्टेक’ हो जाए तो बात दूसरी है! आखिर, गलती इंसान से ही होती है। वैसे भी इंसान हो कि जानवर, शिकार भी खाने की चीजों का ही करता है। कॉकरोच कौन खाता है, जी? नहीं है भक्तों को आदत, नहीं मरे उनके मारे कॉकरोच। मगर कैमरे पर यह तो साबित हो गया कि मोदी जी के सिपाही कॉकरोच से नहीं डरते हैं। आखिर, भक्तगण कैमरे की गवाही में मारने के लिए कॉकरोच घर से पकड़ कर लाए थे! मोदी जी कॉकरोच से फिर भी डर गए!
इनसे कोई पूछे कि मोदी जी के कॉकरोच से डरने का क्या कोई सबूत है? पहले कह रहे थे कि मोदी जी ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कॉकरोच पार्टी के सारे एकाउंट बंद करा दिए, यानी मोदी जी डर गए। आइटी सेल से लेकर, आरएसएस तक, सब कॉकरोचों को विदेशी, पाकिस्तानी, एंटीनेशनल, अराजक वगैरह बताने पर लगा दिए, यानी मोदी जी डर गए। कॉकरोच इन चीफ, दिपके के घर पर पुलिस वाले लगा दिए और उसके घरवाले बुरी तरह डरा दिए, यानी मोदी जी डर गए। गोदी मीडिया के सारे खबरची, खास-खास कॉकरोचों की जन्मपत्री खोजने और विदेशी-विरोधी षडयंत्र खोजने में लगा दिए, यानी मोदी जी डर गए। और यह तब था जब तक कॉकरोच सिर्फ साइबर स्पेस में थे।
पर अब, जब कॉकरोच साइबर स्पेस से उतर कर, इस धरती पर आने लगे, जब कॉकरोच राजधानी में जंतर-मंतर पर जुटने का मंसूबा बनाने लगे, जब कॉकरोच इन चीफ दिपके के पांव दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पड़ने लगे, जिसके नाम में अभी तक इंदिरा गांधी शब्द जुड़ा हुआ है, तब? मोदी जी के वही विरोधी कह रहे हैं कि दिपके को हवाई अड्डे पर ही नहीं रोका, यानी मोदी जी डर गए। हवाई अड्डे पर दिपके को लेने के लिए बहुत से कॉकरोचों को जमा होने दिया, यानी मोदी जी डर गए। दिपके को हवाई अड्डे पर ही बुलाकर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर जमावड़े की इजाजत दी, यानी मोदी जी डर गए। जंतर-मंतर पर कॉकरोचों की भीड़ जमा हो जाने दी, यानी मोदी जी डर गए। कॉकरोचों को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने और अगले हफ्ते फिर लौटने की धमकी देने के बाद, शांति से घर जाने दिया, यानी मोदी जी डर गए।
पर सच बताइए, इस सबमें से कोई भी सचमुच मोदी जी के डरने का सबूत है क्या? उल्टे मोदी जी के विरोधी तो अपनी ही बात को काट रहे हैं। पहले कह रहे थे कि साइबर स्पेस में कॉकरोचों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं यानी मोदी जी डर गए। अब कह रहे हैं कि इस धरती पर कॉकरोचों को दुलराने की कोशिश कर रहे हैं यानी मोदी जी डर गए।
सबूत की बात छोडि़ए, मोदी जी के विरोधी पहले यह तो तय कर लें कि मोदी जी कॉकरोचों को दबा रहे हैं या दुलरा रहे हैं। अब एक नजर न कॉकरोच न विपक्ष, मोदी जी के किसी से भी नहीं डरने के सबूत पर डाल लीजिए--धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री थे, शिक्षा मंत्री हैं और मोदी जी की कृपा हुई तो मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद भी, शिक्षा मंत्री बने रहेंगे! राजनाथ सिंह ने तो ग्यारह साल पहले ही बता दिया था--मोदी राज में इस्तीफे नहीं होते। पब्लिक के मांगने से इस्तीफे हर्गिज नहीं होते। बस प्रभु अपनी कृपा ही समेट लें तो मंत्रिमंडल से छुट्टी का रिवाज जरूर है, पर इस्तीफे का नहीं। बारह साल में एक भी खुली प्रेस कान्फ्रेंस नहीं करने के लिए, प्रेस से मोदी जी का डर तो सब को दिखाई देता है, पर बारह साल में एक भी इस्तीफा नहीं होने देने की, मोदी जी की निडरता किसी को क्यों याद नहीं रहती है?
सच्ची बात यह है कि मोदी जी किसी से नहीं डरते हैं। दूसरे जिस-जिस से डरते हैं, उससे तो बिल्कुल ही नहीं डरते हैं। तस्वीर तो देखी होगी--इस पार मोदी जी, उस पार शेर और मोदी जी शेर से आंखों में आंख डालकर बात करते हुए; बीच में सिर्फ एक कांच के पर्दे की दूरी। जो मर्द खूंखार शेर से नहीं डरता वह किसी और से क्या डरेगा? झूठे वादे करने से, हवाई दावे करने से, नागपुरी वाट्सएप ज्ञान पेलने से, सच को तोड़ने-मरोड़ने से, दोस्तो, भक्तों और गोदी सवारों को जिमाने से, हिंदू-मुसलमान करने से, मोदी जी डरने की तो बात दूर रही, कभी झिझके तक नहीं। हां! टेलीप्रॉम्प्टर ही दगा दे गया हो, तो बात दूसरी है।
यह भी कोरी अफवाह है कि मोदी जी जेन ज़ी से डरते हैं। कहीं, यहां भी श्रीलंका जैसा नहीं हो जाए। कहीं यहां भी, बांग्लादेश जैसा नहीं हो जाए। चुनाव आयोग, अदालत, संसद, ईडी, सीबीआई, नौकरशाही, यूनिवर्सिटी, राष्ट्र सेठ सब की सैटिंग कहीं धरी ही नहीं रह जाए। ऐसा न हो नागपुर-वागपुर, मंदिर-वंदिर कोई काम नहीं आए। सब झूठ।
और माना कि यह चीफ जस्टिस जी ने कहा है, फिर भी यह कोरी अफवाह है कि कॉकरोच और जेन ज़ी चूंकि एक समान हैं, इसलिए मोदी जी कॉकरोच से डरते हैं। जेन ज़ी, कॉकरोच की तरह कहीं से भी निकल आते हैं। एक बार निकलना शुरू हो जाएं तो निकलते ही जाते हैं। न दबाने से दबते हैं, न मारने से मरते हैं और न भगाने से भागते हैं। कॉकरोच तो बहाना है, विरोधियों को तो मोदी जी को जेन ज़ी से डराना है।
पर सब झूठ। जेन ज़ी से मोदी जी क्यों डरने लगे। जेन ज़ी से तो मोदी ज़ी का पुराना रिश्ता है। मोदी जी के तो नाम में ही जी लगा हुआ है। बस, कॉकरोच ही मोदी जी को पसंद नहीं है। कितना गंदा तो लगता है, देखने में ही। कहीं भी पहुंच जाता है। पसंद क्या, मोदी जी को कॉकरोच देखना भी बर्दाश्त नहीं है, विरोध की तरह, सवाल की तरह, सच की तरह। अब विरोधी इसे कॉकरोच से डरना मानना चाहें तो वही सही। क्या कहेंगे, यही ना कि मोदी भी कॉकरोच से डरता है। जब बाकी सारे डर मिट चुके, लोकलाज सब छुट चुके, कॉकरोच से डरना भी कोई डरना है, लल्लू!
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)
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