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बीएचयू: 50 से ज़्यादा छात्र आई-फ्लू की चपेट में, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

छात्रों का आरोप है कि प्रशासन संक्रमित छात्रों को अलग रखने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा और ना ही उनके इलाज को लेकर कोई गंभीरता दिखा रहा है।
BHU
फ़ोटो साभार: Commons

बनारस का काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू एक बार फिर ख़बरों में है। इस बार वजह एक अनजान फ्लू है, जो लगभग 50 से ज़्यादा छात्रों की आंखों को प्रभावित कर चुका है। हैरानी की बात ये है कि प्रशासन और डॉक्टरों की टीम अभी तक इस फ्लू की कोई ख़ास जानकारी साझा नहीं कर पाए हैं, ताकि इसे और फैलने से रोका जा सके। एहतियात के तौर पर छात्रों को कुछ एडवाइज़री ज़रूर जारी की गई है लेकिन छात्रों के मुताबिक़ इस बीमारी से बचने के लिए ये नाकाफ़ी है।

बता दें कैंपस के राजा राम मोहन राय हॉस्टल के 50 से ज़्यादा छात्र इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन आरोप है कि प्रशासन इन संक्रमित छात्रों को स्वस्थ छात्रों से अलग रखने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा और ना ही इसे लेकर कोई गंभीरता दिखा रहा है। छात्रों का आरोप है कि संक्रमित छात्रों को भी इलाज और दवाईयों की व्यवस्था ख़ुद ही करनी पड़ रही है, जबकि उनकी आंखे तक नहीं खुल पा रही हैं।कुछ छात्रों का ये भी कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन इस मामले में शुरू से ही लापरवाह रहा है। इसके अलावा आरोप है कि आनन-फानन में केवल एक परीक्षा स्थगित करने और बोर्ड पर एक नोटिस चस्पा करने के अलावा बीएचयू प्रशासन यहां छात्रों का हाल लेने तक नहीं आया।

क्या है पूरा मामला?

बीएचयू के छात्रों के मुताबिक़ ये पूरा मामला होली के बाद शुरू हुआ, लेकिन शुरू से अब तक प्रशासन केवल मीडिया में ही मदद की ख़बरें छपवा रहा है। हॉस्टल तक कोई सुविधा नहीं पहुंच पा रही। राजा राम मोहन राय हॉस्टल के छात्र संक्रमित छात्रों के साथ रहने को मजबूर हैं और इसके साथ ही उन्हें अपने उन साथियों की भी मदद करनी है, जो इस फ्लू से ग्रसित हैं।

संक्रमित हॉस्टल राजा राम मोहन रॉय में रहने वाले छात्र कौशल के एक रूममेट को ये फ्लू संक्रमित कर चुका है। उनके मुताबिक़ हॉस्टल के ज़्यादातर बच्चे डरे हुए हैं क्योंकि लगभग हर दूसरे-तीसरे कमरे में कोई ना कोई संक्रमित है जिसकी देखभाल भी ख़ुद इन्हीं छात्रों को करनी पड़ती है, और उनसे बचाव भी ख़ुद ही करना है।

कौशल कहते हैं, “यहां कई छात्र ऐसे हैं सूजन के मारे जिनकी आंख तक नहीं खुल रही। दर्द तो है ही, साथ ही वे अपना कोई भी काम करने में असमर्थ हैं, लेकिन प्रशासन अब तक किसी मदद के लिए सामने नहीं आया है। प्रशासन ने केवल पीएम मोदी के बनारस दौरे की हिदायतें हॉस्टल में आकर दी, लेकिन इस बीमारी को लेकर छात्रों के लिए किसी तरह की व्यवस्था करने कोई नहीं आया।”

कौशल आगे बताते हैं कि कुछ छात्र इस फ्लू की शिकायत 10 दिन पहले से ही कर रहे थे, लेकिन तब प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया और अब जब मामला बढ़ गया तो स्वास्थ्य टीम को सूचित किया गया और कुछ एडवाइज़री जारी की गई है। लेकिन इससे छात्रों की किसी समस्या का कोई हल नहीं हो पा रहा। न तो संक्रमित छात्रों को किसी दवाई से कोई राहत मिल रही है और ना ही स्वस्थ बच्चों को यहां से निकालने का कोई आश्वासन।

कौशल की तरह ही एक अन्य छात्र रोहित ने बताया, “अब तक किसी बड़े अधिकारी ने हॉस्टल का कोई दौरा नहीं किया। किसी बीमार छात्र से कोई जानकारी नहीं ली गई। हॉस्टल के बाक़ी छात्रों का अलग से कोई इंतज़ाम नहीं किया गया। ऐसे में सिर्फ़ एक परीक्षा स्थगित करके क्या होगा। ये छात्रों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है क्योंकि इस वक़्त सभी की परीक्षाएं भी चल रही हैं, तो कोई ख़ुद से घर भी नहीं जा सकता।”

प्रशासन का क्या कहना है?

इस संबंध में न्यूज़क्लिक ने बीएचयू प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जन संपर्क अधिकारी डॉक्टर राजेश सिंह से संपर्क किया। डॉक्टर सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी दो नोटिस की जानकारी दी, जिसमें इस फ्लू से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों का ज़िक्र किया गया है। प्रशासन के मुताबिक़ ये एडवाइज़री हर हॉस्टल को दी गई है जिससे इस बीमारी की चपेट में आने से छात्र ख़ुद को बचा सकें। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने इस वायरस की जांच के लिए प्रदेश के डॉक्टरों की एक टीम भी बुलाई है।

प्रशासन की एडवाइज़री के मुताबिक़ ये संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैलता है इसलिए छात्रों को उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। लेकिन जब संक्रमित और स्वस्थ छात्र एक साथ एक ही कमरे में रहेंगे तो भला बचाव कैसे संभव है, इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन खामोश है।

ग़ौरतलब है कि आज शुक्रवार 24 मार्च को पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर हैं। ऐसे में काशी विश्वविद्यालय के छात्रों को ख़ास हिदायतें दी गई हैं, लेकिन कैंपस में अचानक आई इस विपदा की किसी को चिंता नहीं है। प्रशासन पीएम के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त है, तो वहीं छात्र अपनी बीमारी के चलते कई परेशानियों से दो-चार हो रहे हैं। वैसे भी बीएचयू प्रशासन पर ये लापरवाही का आरोप पहली बार नहीं लगा। इससे पहले भी कई बार छात्र सड़कों पर प्रशासन के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद कर चुके हैं। उदाहरण के तौर पर हाल ही में बीएचयू नर्सिंग के छात्रों का लंबा संघर्ष सुर्ख़ियों में था। इसके अलावा इससे पहले भी कई मर्तबा यौन उत्पीड़न, हॉस्टल की अव्यवस्था और तमाम बातों को लेकर छात्राएं प्रदर्शन कर चुकी हैं और हर बार छात्रों के मुद्दों पर बीएचयू प्रशासन पर मौन रहने का आरोप लगता है।

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