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छत्तीसगढ़ : एस्मा के विरोध में संविदाकर्मियों का जलसत्याग्रह, 14 जुलाई को अनियमित कर्मचारी करेंगे सीएम आवास का घेराव!

स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल फ़िलहाल सरकारी आश्वासन के बाद ख़त्म हो गई है। लेकिन संविदा नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी अभी भी हड़ताल पर बने हुए हैं और सरकार के एस्मा को 'तुग़लक़ी फ़रमान' बता रहे हैं।
Health Wokers' Strike

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल पर राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने एस्मा यानी आवश्‍यक सेवा अनुरक्षण कानून लगा दिया है। इस कानून के प्रभाव में हड़ताल पर गए कर्मचारियों पर अब नौकरी से निकाले जाने तक की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का ये सख्त कदम बीते दिनों प्रदेश के सभी नियमित, अनियमित और संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद सामने आया है। जिसका कर्मचारियों द्वारा भारी विरोध भी देखने को मिल रहा है।

बता दें कि चुनावी समर के बीच सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आए दिन राज्य कर्मचारियों की नाराज़गी और हड़ताल का सामना करना पड़ रहा है। बीते 3 जुलाई से प्रदेशभर के सभी संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे हैं, तो वहीं 4 जुलाई से शुरू हुई स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल सरकारी आश्वासन के बाद खत्म हो गई है। हालांकि संविदा नेशनल हेल्थ मिशन और मनरेगा से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी अभी भी हड़ताल पर बने हुए हैं और सरकार के एस्मा को 'तुगलकी फरमान' बता रहे हैं।

क्या है इस आदेश में?

राज्य शासन के गृह विभाग की ओर से मंगलवार, 11 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार ‘लोक स्वास्थ्य’ (छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग) से संबद्ध समस्त काम और स्वास्थ्य सुविधाओं की अत्यावश्यक सेवाओं में कार्यरत डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, एम्बुलेंस सेवाओं में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारियों की ओर से काम करने से इनकार किए जाने को बैन कर दिया है।

एनएचएम प्रदेश अध्यक्ष एवं सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी हेमंत सिन्हा ने अपने एक बयान में कहा कि किसी भी संविदा स्वास्थ्यकर्मी को एस्मा से डरने की जरूरत नहीं है। सभी संगठन और विभागों के कर्मचारी उनके साथ हैं, किसी की नौकरी नहीं जाएगी। सभी एकजुट हैं और आगे भी अपने हक़ की लड़ाई के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे।

उधर, छत्तीसगढ़ इन डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल को अपना समर्थन देते हुए एक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि राज्य शासन से नियमितीकरण की मांग को लेकर सर्व विभाग संविदा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर हड़ताल पर गए स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों पर एस्मा एक्ट लगाया गया है। हैरत की बात ये है कि सत्ताधारी सरकार ने अपने घोषणापत्र में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का वचन राज्य की जनता को दिया था।

पत्र में आगे लिखा है, "हम संज्ञान में लाना चाहते हैं कि प्रशासन के इस आदेश का अर्थ राज्य की जनता द्वारा कहीं ये न निकाल लिया जाए कि अगर राज्य का कोई कर्मचारी, अधिकारी या राज्य का कोई भी आम नागरिक सत्ताधारी सरकार के घोषणा पत्र के वचन को याद दिलाएगा तो उसे जेल भेज दिया जाएगा।"

नियमित स्वास्थ्य कर्मी काम पर लौटे, संविदाकर्मियों का संघर्ष जारी

ध्यान रहे कि बीते दिनों 60 हजार से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने हड़ताल को अपना समर्थन दिया था और इसमें वेतन विसंगति, जरूरी भत्ते समेत समस्त विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, कार्यभारित एवं संविदा कर्मचारियों को जन घोषणा पत्र में किए वादे के अनुरूप नियमित करने की मांग शामिल थी। करीब 6 दिन चली इस हड़ताल के बाद रविवार, 9 जुलाई को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस देव सिंह के आश्वासन के बाद इसकी समाप्ती की घोषणा हो गई थी।

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री आलोक मिश्रा ने इस हड़ताल के संबंध में न्यूज़क्लिक को बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासन और मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद नियमित स्वास्थ्यकर्मी अपने काम पर लौट गए हैं, लेकिन नियमितीकरण को लेकर जारी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल अभी भी जारी है।

आलोक मिश्रा के मुताबिक मुख्यमंत्री ने पांच दिनों के भीतर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है। वेतन विसंगति वाले मुद्दे को वित्त विभाग में भेजा जाएगा और इस पर फिर आगे की कार्यवाही की बात कही गई है। हालांकि इसमें थोड़ा और समय लग सकता है, लेकिन फिलहाल सभी नियमित कर्मचारी सरकार के आश्वासन पर भरोसा कर वापस काम पर लौट आए हैं।

एस्मा के विरोध में जल सत्याग्रह

छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव श्रीकांत लास्कर ने कहा कि सरकार एस्मा लगाकर कर्मचारियों की आवाज़ नहीं दबा सकती है। और इसलिए आज प्रदेशभर से संविदाकर्मी राजधानी रायपुर में इस सरकारी फरमान के विरोध में जल सत्याग्रह कर रहे हैं। ये सत्याग्रह सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ है, जो पहले खुद वादा करती है और फिर उसे भूल जाती है और कोई आवाज़ उठाए, तो उसे दबाने के लिए ऐसे कानून लागू कर दिए जाते हैं।

ज्ञात हो कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के पटवारियों और पंचायत सचिवों का अनिश्चितकालीन धरना देखने को मिला था। पटवारियों की हड़ताल के समय भी सरकार ने एस्मा लगा दिया था, जिसके आदेश की प्रतिया पटवारियों ने खुद जलाते हुए किसी भी कार्यवाही के लिए खुद को तैयार बताया था। फिलहाल राज्य में कई अन्य विभागों के कर्मचारियों के साथ ही प्रदेश के अनियमित कर्मचारी भी आंदोलनरत हैं और आगामी 14 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान कर चुके हैं।

अनियमित कर्मचारियों का सीएम आवास घेराव

छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारी मोर्चा के प्रांतीय संयोजक गोपाल प्रसाद साहू ने न्यूज़क्लिक को जानकारी दी कि अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी शुक्रवार को राज्य के सभी अनियमित कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे और विशाल धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। उन्होंने एस्मा की कड़ी निंदा करते हुए इसे कांग्रेस सरकार द्वारा अनियमित आंदोलन को कुचलने के लिए अलोकतांत्रिक रास्ता बताया।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 54 सरकारी विभागों के क़रीब 45 हज़ार संविदाकर्मी कार्यरत हैं, वहीं लाखों अनियमित कर्मचारी हैं, जो विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं इसमें दैनिक वेतन भोगी से लेकर संविदा कर्मी, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, ठेका कर्मी और शिक्षाकर्मी समेत कई कैटेगरी के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों को सरकार और इस चुनावी साल से बहुत उम्मीदें थी क्योंकि वो बीते कई सालों से इन विभागों में अनियमित कर्मचारियों के तौर पर काम कर रहे हैं, और नियमित होने का इंतज़ार भी। लेकिन सरकार इन्हें नियमित करना तो दूर इनकी छंटनी कर रही है, जिसे लेकर इनके सामने रोज़गार का नया संकट खड़ा हो गया है।

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