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यूपी के आलू किसानों ने कोल्ड स्टोरेज मालिकों द्वारा 'मनमाना' पैसे वसूलने का किया विरोध

भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान सभा के मुताबिक़, आलू उत्पादकों को अपनी फ़सल बेचने के बाद भी प्रति हेक्टेयर 17,000 रुपये से 19,000 रुपये का नुक़सान हो रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। PTI

लखनऊ: उत्तरप्रदेश की आलू बेल्ट कहे जाने वाले कन्नौज से आगरा तक के किसान पिछले कई दिनों से पश्चिमी इलाके के विभिन्न हिस्सों में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) और अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये संगठन कोल्ड स्टोरेज मालिकों से "अनुचित वृद्धि दर" को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

आगरा के आलू किसानों का आरोप है कि कोल्ड स्टोरेज मालिक 60 रुपये प्रति क्विंटल तक रेट बढ़ाकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। यूनियनों के अनुसार, आलू की खेती करने वालों को अपनी उपज बेचने के बाद भी 17,000 रुपये से 19,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का नुकसान हो रहा है।

किसान संघर्ष समिति की तरफ से एक बाइक जुलूस कन्नौज के कलेक्ट्रेट तक निकाला गया जिसमें किसानों की "अनदेखी" करने के लिए कोल्ड स्टोरेज मालिकों और जिला होर्टिकल्चर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की गई।

जुलूस का नेतृत्व करने वाले किसान नेता गीतेंद्र सिंह यादव ने कहा कि सरकार ने सादे आलू के भंडारण पर 2023-24 के लिए दर 230 रुपये प्रति क्विंटल और शुगर मुक्त आलू की भंडारण दर 260 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी।

उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया की, जबकि, कन्नौज कोल्ड स्टोरेज के मालिक मनमानी वसूली कर रहे हैं। कृषि आदानों की लागत में वृद्धि, उर्वरकों की अनुपलब्धता, अनियमित वर्षा, कम मंडी दर और कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मनमानी दर ऐसी कुछ चुनौतियां हैं जिनका सामना हर किसान को किसी भी सामान्य कृषि मौसम में करना पड़ता है।"

यादव ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोल्ड स्टोरेज की दरों को विनियमित नहीं किया गया, तो वे “12 जून को लखनऊ में एक जन-आंदोलन आयोजित करने पर मजबूर होंगे”।

कन्नौज बीकेयू के जिलाध्यक्ष शमीम अहमद ने कहा कि, 'इस साल आलू का बंपर उत्पादन हुआ है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कटाई के मौसम में कोल्ड स्टोरेज मालिकों को 230 रुपये प्रति क्विंटल वसूलने को कहा था। हालांकि, जिला बागवानी विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 260 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है। फिर भी किसान 280-300 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान कर रहे हैं, इससे लगता है कि जिला प्रशासन ने “हमारी मांगों को अनसुना कर दिया”।

अहमद ने 60 बीघा में आलू की खेती की थी। उन्होंने कहा कि, “कुछ मालिक भंडारण के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल वसूल रहे हैं और कुछ 300 रुपये भी वसूल रहे हैं। आलू के विशाल उत्पादन के कारण कोल्ड स्टोरेज भरे हुए हैं। इसलिए, सीएम द्वारा कम दर तय करने के लिए कहने के बावजूद, मालिक किसानों से मनमाना दाम वसूल रहे हैं।”

आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है और देश के कुल आलू उत्पादन में 35 प्रतिशत का योगदान देता है। सबसे अधिक स्टोर आगरा (457), फिरोजाबाद (235), इटावा (129), अलीगढ़ (120), हाथरस (118) और कन्नौज (112) के आलू-बेल्ट जिलों में हैं।

इटावा और मैनपुरी की स्थिति कन्नौज से अलग नहीं है। इटावा बीकेयू के जिला अध्यक्ष संजीव यादव ने न्यूज़क्लिक को बताया कि किसान 140 रुपये प्रति पैकेट (50-55 किलोग्राम) और लगभग 275 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान कर रहे हैं, जो कि सरकारी दर से 60 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।

उन्होंने कहा कि, “कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मनमानी ने किसानों पर और अधिक खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। लेकिन किसी को परवाह नहीं है।"

यादव ने आलू उत्पादकों की दुर्दशा के बारे में बताते हुए कहा कि, “प्रति एकड़ उत्पादन लागत 1,000 रुपये से 1,500 रुपये आती है जिसमें ट्रैक्टर ट्रॉली, उर्वरक, दवा, सिंचाई, टोकन मनी, स्टोर शुल्क और श्रम आदि शामिल है और इस सब के बावजूद राज्य सरकार ने आलू की कीमत 650 रुपये प्रति क्विंटल तय की है।

आलू किसानों की दुर्दशा को लगातार उठाने वाले आगरा के किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि सरकार किसानों के नाम पर कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए 30-40 फीसदी सब्सिडी देती है, लेकिन किसान को इसका फायदा नहीं मिलता है। इसके बजाय, उत्पादन अधिक होने पर भंडारण मालिक दरों में वृद्धि कर देते हैं।”

सिंह ने कहा कि, “कोल्ड स्टोरेज मालिकों को सब्सिडी देने का क्या फायदा जब वे सालाना दरें बढ़ाते हैं? दोषपूर्ण नीतियों और सरकार के घोर कुप्रबंधन ने आलू किसानों को आजीविका के अन्य साधनों को तलाशने पर मजबूर कर दिया है।”

किसानों ने दावा किया कि उन्हें उत्पादन लागत से कम कीमत पर थोक विक्रेताओं को आलू बेचने पर मजबूर किया जा रहा है।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें -

UP Potato Farmers Protest ‘Arbitrary’ Cold Storage Rates

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