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यूपी: चुनावी साल में सबसे बड़े बजट में आम लोगों को क्या मिला?

विपक्ष ने इस बजट को दिशाहीन बताते हुए सवाल उठाया कि इसमें 90 प्रतिशत जनता यानी ‘पीडीए’ (पिछड़ों-दलितों-अल्पसंख्यकों) के लिए क्या है।
UP Budget

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार, 5 फरवरी को अपने दूसरे कार्यकाल का तीसरा आम बजट पेश किया। ये बजट अब तक का सबसे बड़ा बजट कहा जा रहा है। इसे राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा पेश किया गया। जिनके भाषण में कहा गया कि इस बार बजट का जोर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य के बजट का आकार 7, 36,437 करोड़ रुपये बताया गया। जिसमें 24,863.57 करोड़ रुपये की नई योजनाएं शामिल हैं। हालांकि विपक्ष ने इस बजट को दिशाहीन बताते हुए सवाल उठाया कि इसमें 90 प्रतिशत जनता यानी ‘पीडीए’ (पिछड़ों-दलितों-अल्पसंख्यकों) के लिए क्या है।

बता दें कि इस बजट का मेन फोकस अयोध्या ही रहा। इसके सर्वांगीण विकास के लिए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बजट के दौरान 100 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। साथ ही अयोध्या में एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 150 करोड़ रुपये देने की बात भी कही गई है। राजनीतिक जानकारों की मानें, तो केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में भले ही कोई बहुत बड़ी घोषणाएं न हुई हों, लेकिन अस्सी लोकसभा वाली सीटों वाले यूपी के बजट ने सभी सियासी समीकरण साध लिए हैं।

बजट में किसे क्या मिला?

अपने बजट भाषण के दौरान सुरेश कुमार खन्ना ने राम मंदिर और कानून व्यवस्था समेत तमाम मुद्दों पर सरकार की ‘उपलब्धियां’ गिनाईं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'सबका साथ सबका विकास' के नारे को लागू किया है और हमारी नीतियां विशेष रूप से युवा महिलाओं, किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए समर्पित हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

इस बजट में प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के लिए 2500 करोड़ रुपये के आवंटन की बात की गई है। इसके अलावा अयोध्या और वाराणसी को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की भी बात कही गई है। राज्य में धर्मार्थ मार्गों के विकास के लिए करोड़ 1750 करोड़ और कान्हा गौशाला और बेसहारा पशु योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का भी आवंटन किया गया है।

बजट में कानपुर मेट्रो के लिए 395 करोड़ और आगरा मेट्रो के लिए 346 करोड़ रुपये देने का ऐलान भी किया है। वहीं रेलवे के ओवर ब्रिज के लिए 1350 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में सेतुओं के लिए 1500 करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है। 575 करोड़ पूर्वांचल विकास निधि और 425 करोड़ बुंदेलखंड विकास निधि में देने की बात कही गई है।

यूपी में निराश्रित महिला पेंशन योजनान्तर्गत पात्र लाभार्थियों को देय पेंशन की धनराशि 500 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अन्तर्गत पात्र बालिकाओं को 6 विभिन्न श्रेणियों में कुल 15000 रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 322 करोड़ रुपए का बजट दिया गया। जबकि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन योजना में हेल्थ वेलनेस सेन्टर केयर यूनिट, इन्टीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की स्थापना आदि के लिए 952 करोड़ रुपए दिए गए।

वित्त मंत्री का यह भी कहना था कि साल 2017 से 29 जनवरी 2024 तक वर्तमान सरकार द्वारा लगभग 48 लाख गन्ना किसानों को 2.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया, जो कि पिछले 22 वर्षों के संयुक्त गन्ना मूल्य भुगतान 2.1 लाख करोड़ रुपये से 20,274 करोड़ रुपये अधिक है। हालांकि इन तमाम दावों और वादों को विपक्ष ने एक स्वर में नकार दिया है।

विपक्ष ने आंकड़ों में उलझाने का लगाया आरोप

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि यूपी का बजट चाहे सात लाख करोड़ का हो या आठ लाख करोड़ का… सवाल यही रहेगा कि 90 फीसदी जनता यानी ‘पीडीए' (पिछड़ा, दलित और आदिवासी) के लिए इसमें क्या है।

उन्होंने आगे भारतीय जनता पार्टी की नीति को जन विरोधी बताते हुए कहा, “बीजेपी 10 फीसदी संपन्न लोगों के लिए 90 फीसदी बजट रखती है और 90 फीसदी जरूरतमंद जनता के लिए नाममात्र का 10 फीसदी बजट। सरकार आंकड़ों में नहीं उलझाकर सीधे बताएं कि इस बजट से महंगाई से कितनी राहत मिलेगी, कितने युवाओं को रोजगार मिलेगा, अपराध और भ्रष्टाचार कम करने के उपायों पर कितना खर्च किया जाएगा, मंदी और जीएसटी की मार झेल रहे कारोबार और दुकानदारों को बढ़ावा देने के लिए क्या प्रावधान हैं, फसल को सही दाम मिलेगा या नहीं, किसानों की आय दोगुनी होगी या नहीं और श्रमिकों को मेहनत की सही कीमत मिलेगी या नहीं।''

अखिलेश यादव ने पोस्ट में आगे पूछा, ‘‘महिलाओं को बेखौफ घर से निकलने की आजादी देने के लिए अपराधियों को काबू करने के खातिर जगह-जगह सीसीटीवी लगेंगे या नहीं, कर्मचारियों को पुरानी पेंशन मिलेगी या नहीं, अच्छी दवाई-पढ़ाई के लिए कितना आवंटन किया गया है, घर-घर पानी पहुंचाने और शौचालयों के सुचारु संचालन की योजना के लिए दिखावटी प्रावधान कितना है। गोरखपुर में बरसात में नाव चलाने और गोरखपुरवासियों को तैरने का मुफ्त प्रशिक्षण देने के लिए कितना प्रावधान किया गया है, नये बिजली घरों के लिए कितना बजट है, नई सड़कें तो छोड़िए, बस इतना और बता दें कि सड़कों के गड्ढे भरने का बजट में कोई प्रावधान है या नहीं…?''

बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने भी कहा कि यह बजट पार्टी के चुनावी हित का ज्यादा व व्यापक जनहित एवं जनकल्याण का कम लगता है। सरकार सर्व समाज के हित, विकास व कानून-व्यवस्था के सम्बंध में जितने भी दावे और वादे बजट में करती है उसका सही से अनुपालन जरूरी है।

बसपा नेता ने 'एक्स' पर लिखा, ''उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज सदन में पेश वर्ष 2024-25 का बजट पार्टी के चुनावी हित का ज्यादा व व्यापक जनहित एवं जनकल्याण का कम लगता है। सरकार की विभिन्न घोषणाएं, वादे और दावे अपनी जगह, किंतु क्या विकास सम्बंधी सरकार के पिछले सारे वादे पूरे हो गये हैं, इसका भी मूल्यांकन जरूरी।''

40 प्रतिशत विभागों ने अपना आवंटित बजट खर्च नहीं किया

उधर, कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने भी कहा कि बजट का आकार बड़ा होना बजट की सफलता की निशानी नहीं है, क्योंकि पिछले बजट को इसी तरह बड़ा बनाया गया था पर 40 प्रतिशत विभागों ने अपना आवंटित बजट खर्च नहीं किया। उनके अनुसार इस बजट में अधिकांश योजनाएं केंद्र सरकार की ही हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपना बनाकर प्रस्तुत कर रही है।

आराधना मिश्रा ने पूछा कि जब पिछले बजट का आवंटन विभाग खर्च नहीं कर पाए तो बजट की राशि खर्च किए बिना प्रदेश का विकास कैसे हो सकता है। उनका कहना था कि बजट को सबसे बड़ा बताकर कीर्तिमान रचने की बात की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि बजट में अधिकांश आवंटन सिर्फ पुरानी योजनाओं के लिए ही है।

गौरतलब है कि ये चुनावी साल है और उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर सबकी नज़रें भी टिकी हुई हैं। और यही कारण है कि इस बजट को उत्तर प्रदेश के विकास से ज्यादा दिल्ली की सत्ता का रास्ता साधने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि पक्ष और विपक्ष के तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस बड़े बजट का असल लाभ लोगों तक कैसे पहुंचता है, ये वाकई देखने वाली बात होगी।

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